किसी की जान जाए तो जाए लेकिन सोशल मीडिया के क्रांतिकारी पहले विडियो क्लिप बनाएंगे

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महान कवि धूमिल अगर आज होते तो उनकी प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां कुछ इस तरह होतीं:
एक आदमी शेर के बाड़े में गिर जाता है। दूसरा आदमी बचाने के लिए शेर को आवाज लगाता है। तीसरा आदमी शेर पर ऊपर से पत्थर चलाता है। चैथा आदमी पूरे माजरे की वीडियो क्लिपिंग बनाता है। मैं पूछता हूं ये चैथा आदमी कौन है? मेरे इस प्रश्न पर देश की संसद मौन है। धूमिल की पंक्तियों के इस अनुवाद पर जरूरी नहीं कि आप सहमत हों। धूमिल ने प्रश्न किया और मौन हो गए। मैं प्रश्न के साथ उत्तर देने का प्रयास करता हूं।

ये चौथा आदमी है, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ। धूमिल के समय ये गिनती में नहीं था। आज लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानि मीडिया पूरे रूतबे के साथ भन्ना रहा है। संस्थागत मीडिया की नाजायज औलाद की तरह सोशल मीडिया अपने बाप से आगे निकल कर पूरे विश्व में क्रांति के बीज बो रहा है।

इस क्रांति का एकमात्र औजार है वीडियो क्लिप बनाने की दक्षता। अगर आप वीडियो क्लिप बना सकते हैं तो क्रांति ला सकते हैं। अब ये सुविधा या प्राथमिकता पर निर्भर है कि आप अपनी गर्लफ्रेंड का वीडियो बनाते हैं, शेर के रूप में सामने खड़ी मौत से हाहाकार करते हुए बेबस इंसान का वीडियो बनाते हैं या पूरे विश्व को स्तबध करने के लिए किसी लाचार के सर कलम का वीडियो बनाते हैं।

क्लिपिंग बनाने की दक्षता बड़े से बड़े संकट में काम आती है। केदारनाथ की प्रलंयकर त्रासदी में गिरते मकानों, डूबते इंसानों और वाहनों के क्लिपिंग बनाये जा सकते हैं। बाढ़ग्रस्त पुल को पार करते समय बाइक समेत नदी में समाये युवक की और बांध से छोड़े गये पानी में तिनके की तरह बह गये इंजिनियरिंग छात्रों के दल की भी क्लिपिंग बनाई जा सकती है। और तो और अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड टॉवरों पर टक्कर मारते हुए हवाई जहाजों की भी क्लिपिंग बनाई जा सकती है। इस दक्षता को धरती से धरती पर ही नहीं वरन धरती से हवा में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मगर अफसोस कि तकनीकी विकास की इस दौड़ में आम आदमी के हाथ में पहुंच चुके क्रांति के इस औजार से किसी जिन्दगी को बचाने की क्लिपिंग सामने नहीं आती है।

धूमिल की कविता की मूल पंक्तियां इस प्रकार हैं:
एक आदमी रोटी बेलता है। एक आदमी रोटी खाता है। एक तीसरा आदमी है जो- न रोटी खाता है और न रोटी बेलता है, सिर्फ रोटी से खेलता है। मैं पूछता हूं ये तीसरा आदमी कौन है? मेरे देश की संसद मौन है।

 

मुकेश मणिकांचन (स्वतंत्र पत्रकार) निवास- सिरसागंज, जनपद फिरोजाबाद, उ.प्र.। दूरभाष – 9411060600, 8445112116



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