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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट: स्विस कंपनी की इस दवा की एक बोतल भारत में 6 लाख की क्यों है?

शमीमउद्दीन अंसारी-

इण्डियन एक्सप्रेस ने दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीस) पर आज एक रपट छापी है। (किसी हिन्दी अख़बार से ऐसी ख़बरों की उम्मीद भी नहीं की जाती) केरल की एक लड़की को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफ़ी नाम की बीमारी है, जिसकी एक बोतल दवा ‘रिस्डिप्लम’ की क़ीमत 6 लाख रुपये है। उस लड़की को महीने में ऐसी तीन बोतलों की दरकार होती है, जिनकी क़ीमत 18 लाख बैठती है।

इस दवा की ईजाद एक स्विस कम्पनी रोचे (Roche) ने की। लड़की ने दो साल पहले केरल हाई कोर्ट में अर्जी दाख़िल की और सरकार से माँग की कि वो इण्डियन पेटेंट्स क़ानून 1970 की धारा 84 का इस्तेमाल करके अनिवार्य लाइसेंसिंग उपबन्ध को लागू करे। इससे दूसरी कम्पनियों को इस महँगी पेटेंटेड दवा को बनाने की इजाज़त मिल जाएगी।

एक हिन्दुस्तानी कम्पनी नैटको का कहना है कि अगर उसे रिस्डिप्लम के जेनेरिक वर्ज़न बनाने की इजाज़त दी जाती है तो वो इसे 15,900/- रुपये में बेचेगी।

लेकिन एक अजीब बात और है, जिसकी ओर अख़बार ने ध्यान दिलाया है। यही दवा ये स्विस कम्पनी चीन और पाकिस्तान में 42,000/- रुपए में बेच रही है, क्योंकि इन देशों ने कंपनी के साथ मोलभाव किया था। तो हमारा देश ऐसा क्यों नहीं कर सकता, या फिर पेटेंट्स क़ानून में दी गई ताक़त का इस्तेमाल क्यों नहीं करता।

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1 Comment

1 Comment

  1. Raj Shekhar Singh

    June 10, 2025 at 1:33 pm

    Kerala में यह दवा राज्य सरकार द्वारा फ्री में दी जाती है।

    यह दावा बहुत महंगी जरूर है लेकिन तमाम NGO की मदद से दवा आमतौर पर मुफ्त में उपलब्ध हैl
    https://www.thehindu.com/news/cities/bangalore/50-children-to-get-free-lifelong-access-to-drug-for-sma-treatment/article68868245.ece

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