Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

साहित्य

एक यादगार मुलाकात ‘सुरेन्द्र मोहन पाठक साहब’ से

अमित ख़ान-

दिनांक, 29 अगस्त 2024!

शाम का वक़्त था। मैं अपने बचपन के मित्र डॉ. कुमार विश्वास के घर जा रहा था। नोयडा में नया-नया घर बना है। मैं मुम्बई से दिल्ली विजिट पर था, तो जाना लाज़िमी था। तभी सडनली मुझे ख्याल आया कि पाठक साहब भी नोयडा में ही रहते हैं। मैंने अपने फोन में पाठक साहब का नंबर देखा, मौजूद था। बस फिर क्या था, मैंने पाठक साहब को फोन लगा दिया। दूसरी तरफ़ से पाठक साहब ने ही फोन उठाया। मैंने जब उन्हें यह बताया है कि मैं नोयडा में ही हूँ और आपसे मिलना चाहता हूँ, तो उन्होने फ़ौरन, बेहद उत्साहित होकर मुझे निमंत्रित किया। मैं सोच रहा था, डॉ. कुमार विश्वास के यहाँ से मैं एक घंटे में फ्री हो जाऊँगा। लेकिन वहाँ एक बार बातों का सिलसिला शुरू हुआ, तो दो-ढाई घंटे कब गुज़र गये, पता ही न चला।

रात के तक़रीबन 10 बजने वाले थे। मेरे अन्दर पाठक साहब के घर जाते हुए अब थोड़ी हिचक पैदा हुई। उन्होंने अपना एड्रेस भेज दिया था। मैंने रात होने की वजह से उन्हें पहले फोन करना मुनासिब समझा। तुरंत ही उन्होंने गर्मजोशी के साथ फोन उठाया और पहले की तरह ही वेलकम किया।

अब ड्राइवर ने गूगल मैप पर पाठक साहब के घर का एड्रेस डाला, जो ज्यादा दूर नहीं था। बस फिर क्या था, मैं जल्द ही पाठक साहब के दीवान-ए-ख़ास (राइटिंग रूम) में मौजूद था। वह भरपूर गरमजोशी के साथ मिले। एक बार बातों का सिलसिला शुरू हुआ, तो धाराप्रवाह चलता चला गया। राज पॉकेट बुक्स, वेद प्रकाश शर्मा, मेरठ के पब्लिशर्स, पेंगुइन, हार्पर, वेस्टलैंड से बातें होते-होते फिल्म और वेब सीरीज तक जा पहुँची।

दुनिया-जहान की बातें। बातें जो पश्मीने की चादर में लिपटी थीं और वक़्त रात के स्याह आँचल में आहिस्ता-आहिस्ता मख़मल की तरह सरक रहा था। रात गहराने लगी थी। मगर पाठक साहब से बातें करते हुए न मैं थका, न वो थके।

इस बीच पाठक साहब की कुछ बातों ने मुझे चौंका दिया। पाठक साहब ने बताया, उन्होंने सबसे पहले मुझे तब देखा था, जब मैं दिल्ली में दरियागंज, अंसारी रोड पर ‘फ़िल्मी दुनिया मैगज़ीन’ के ऑफिस के ऊपर ही रहता था और अपनी मदर की मेडिसिन लेने एक केमिस्ट शॉप पर जाता था। वह केमिस्ट शॉप, पाठक साहब के टेलीफोन दफ्तर के नज़दीक ही थी। इस उम्र में (हालाँकि अभी उनकी उम्र कुछ नहीं) पाठक साहब की इतनी ज़बरदस्त मेमोरी, सच में काबिले-तारीफ़ थी। दाद के काबिल थी। हालाँकि मुझे वो वाकया बिल्कुल याद न था। पाठक साहब को बातचीत के दौरान जब मैंने यह बताया कि डॉ. कुमार विश्वास और दिल्ली के भूतपूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी पिलखुवा से ही हैं, तो यह ख़बर उनके लिये चौंका देने वाली थी।

बहरहाल देर रात मैं ढेर सारी यादों का पुलिंदा समेटे पाठक साहब के घर से विदा हुआ। लेकिन बातों और यादों का पेट अभी भी ख़ाली था, वो भरा नहीं था। मैंने पाठक साहब से इस वादे के साथ रुख्सती ली कि मैं दिल्ली की नेक्स्ट विज़िट पर जब भी आऊंगा, पाठक साहब से जरूर मिलूँगा और वह मुलाकात लम्बी होगी।

मुम्बई पहुँचकर मैंने पाठक साहब के और अपने फोटो उन्हें मेल किये। जिसके जवाब में उन्होंने लिखा- “आपकी सोहबत में जवान लग रहा हूँ। गॉड ब्लेस यू माई डियर!”

पाठक साहब के उन शब्दों ने दिल्ली और मुम्बई के बीच की दूरी एकदम से कम कर दी। सफ़र की सारी थकान मिटा दी। मैं यही कहूँगा- 85 साल की उम्र में भी आप जवान हैं। आपकी सोहबत से हमें कल्पना के पंख मिलते हैं। आप हमारे घर के बड़े हैं। मेरे लिये पिता तुल्य हैं। ईश्वर यह साया हमेशा बनाये रखे।

जल्द ही आपसे एक लम्बी और यादगार मुलाकात होगी।

लव यू पाठक साहब!

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन