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आज के अखबार : तेजस्वी को ‘निपटाने’ के बाद राहुल पर निशाना और ट्रम्प को ‘जवाब’ देना, उसका प्रचार

संजय कुमार सिंह

सरकार के इस प्रचार और बचाव में अखबारों ने इस खबर को दबा दिया है कि आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई को दिल्ली की एक अदालत ने बंद कर दिया है क्योंकि वह उनके खिलाफ कुछ तलाश नहीं पाई। यह भी कि उड़ीशा में महिला को जलाने के मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो सदस्य गिरफ्तार किये गये हैं। गनीमत है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी के कार्यकाल की सीएजी रिपोर्ट पेश की है पर अखबार उससे भरे हुए नहीं हैं (द हिन्दू)। इसी तरह, “एसआईआर पर लोकसभा में विपक्ष का प्रदर्शन; सरकार पटल पर दो विधेयक रखने में नाकाम रही” को भी कम महत्व मिला है। उच्च सुरक्षा वाले दिल्ली के चाणक्यपुरी में सांसद से चेन खींची गई भी आज की बड़ी खबर है। वैसे, यह भी संभव है कि चेन खींचना आम हो पर खबर तब छपी जब सांसद की खींची गई। बाकी में एफआईआर भी नहीं होती हो।

मेरे ज्यादातर अखबारों ने बिहार में एसआईआर के एक मजबूत विरोध को कल निपटा दिया था। फिर, सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रचारकों को मसाला दिया। इसे आज मीडिया ने भी लपक लिया है। अपनी इस ‘मजबूती’ के साथ आज ट्रम्प को ‘जवाब’ देने का प्रचार कर रहा है। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार का लक्ष्य बिहार विधानसभा चुनाव जीतना है। इसके लिए किये जा रहे प्रयासों या अपनाई गई रणनीति के तहत बिहार में एसआईआर चलाया गया। सुप्रीम कोर्ट की मेहरबानी से इसका पहला चरण पूरा हो चुका है और चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि किसी भी दल ने कोई शिकायत नहीं की है। उसका एक मजबूत विरोध बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने किया था। चुनाव आयोग और मीडिया ने उन्हें (या उनके मुद्दे को) कल अपने अंदाज में निपटा दिया। सुप्रीम कोर्ट के एक जज की टिप्पणी के बाद कल राहुल गांधी निशाने पर रहे जो आज दि एशियन एज में लीड और अमर उजाला में सेकेंड लीड है। हालांकि, देशबन्धु में यह अलग ही शीर्षक से सेकेंड लीड है। खबर है, मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत। मुख्य शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाई। अखबार ने इस खबर के साथ सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की बात भी प्रकाशित की है। इसका शीर्षक है, मुद्दे उठाना विपक्ष के नेता का काम।

जाहिर है, मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को राहत दी है। फिर भी अमर उजाला का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – राहुल गांधी सच्चे भारतीय होते तो सेना पर अपमानजनक टिप्पणी नहीं करते। चार कॉलम में छपी इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, शीर्ष कोर्ट ने कांग्रेस सांसद से पूछा – चीन ने 2,000 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में कब्जा किया इसके क्या सबूत हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि मुद्दा विपक्ष के नेता का सवाल उठाना और उसके लिए मानहानि का मुकदमा किया जाना है। फिर भी अदालत में जो बातचीत हुई उसके आधार पर राहुल गांधी को बदनाम करने का काम चल रहा है जबकि उनकी ओर से अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा और यह अमर उजाला में छपा है, राहुल गांधी अपनी टिप्पणियों को बेहतर ढंग से व्यक्त कर सकते थे। मगर यह शिकायत केवल सवाल उठाने के लिए उन्हें परेशान करने का प्रयास मात्र है जबकि विपक्ष के नेता का यह काम है। इसलिए, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट को राहत दे भी दी। जो देशबन्धु का शीर्षक है। लेकिन यह अमर उजाला में हाईलाइट किये हुए अंशो में नहीं है। उपरोक्त के अलावा यहां एक और शीर्षक है, सेना का सम्मान कीजिये, उन्हीं की वजह से चैन की नीन्द सो पा रहे हैं। यह खबर अखबार में देश विदेश के खबरों के पन्ने पर चार कॉलम से भी ज्यादा में छपी है और कोई अन्य मामला है। इसका उपशीर्षक है, पंजाब पुलिस के अफसरों पर कर्नल की पिटाई की सीबीआई जांच का आदेश सही। यहां मुझे कल (चार अगस्त 25) के अखबारों में छपी खबर याद आती है जो सेना के एक कर्नल से संबंधित है। खबरों के अनुसार, सेना के अधिकारी ने स्पाइस जेट कर्मचारी को मार कर घायल कर दिया। अदालत ने सेना का सम्मान करने की सीख तब दी है जब सेना अधिकारी पर आरोप है कि उनने अपना काम कर रहे स्पाइस जेट के एक कर्मचारी को पीट कर बुरी तरह घायल कर दिया है। इस मामले में मीडिया की भूमिका यह रही कि 26 जुलाई की घटना 4 अगस्त के अखबारों में छपी। कइयों में पहले पन्ने पर लेकिन तब जब मामले की एफआईआर हुई। मुझे लगता है कि यह सेना के सम्मान में खबर छिपाने का मामला है और अदालत की ऐसी ही नसीहतों के कारण हुआ होगा जबकि अदालत का यह काम नहीं है और खबर इसपर भी हो सकती थी

राहुल गांधी के खिलाफ टिप्पणी करने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज की तस्वीर कल सोशल मीडिया पर घूम रही थी। इसमें वे महाराष्ट्र के पूर्व और मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ दिख रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के जज को ऐसे राजनीतिकों के साथ सार्वजनिक तौर पर तो नहीं ही दिखना चाहिये और सच्चे जज नहीं दिखते थे। अब जज साब खुद राजनीतिक संगत में हैं और अदालत में राजनीतिक झुकाव के आधार पर सीख देते हैं। निश्चित रूप से यह भी खबर है। खासतौर पर तब जब हाईकोर्ट के जज सत्तारूढ़ दल के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद हो चुके हैं। एक वकील को वेतन भत्ते लेकर सरकारी काम करने के लिए राज्य सभा में मनोनीत किया जा चुका है और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले जज के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। जजों को ईनाम देने का मामला पहले से गंभीर था और वह कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। फिर भी अदालत की टिप्पणी एक आदर्श सीख के रूप में प्रस्तुत की गई है जो अदालत का काम ही नहीं है और उस जज का तो बिल्कुल नहीं जो मुवक्किल के विपक्षी पार्टी के नेताओं की संगत में है। दिलचस्प यह है कि अंग्रेजी अखबार दि एशियन एज ने भी इसे महत्व दिया है। शीर्षक है, सेना पर टिप्पणी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राहुल की खिंचाई की। हालांकि, फ्लैग शीर्षक है – लखनऊ में सभी कार्रवाई पर रोक लगा दी और यह भी कि आप सच्चे भारतीय हैं तो ऐसा नहीं कहेंगे। जाहिर है यह जज साब की निजी राय है, आदेश या फैसला नहीं। इसीलिए कार्रवाई रोक भी दी गई है। लेकिन खबर कुछ और संदेश दे रही है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर दो कॉलम में है। शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी के लिए राहुल की आलोचना की लेकिन कार्यवाही रोक दी। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर तीन कॉलम में है, ‘हमारे सैनिकों की पिटाई कर रहे हैं चीनी’ टिप्पणी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की खिंचाई की।

‘तेजस्वी यादव फंसे, जांच होगी’

कल की इन खबरों के बाद आज उसका कोई फॉलोअप किसी अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। तेजस्वी के दो एपिक नंबर का रहस्य और आज की पत्रकारिता पर यही कहा जा सकता है कि एपिक नंबर की बात पहले नहीं होती थी – नया है पर खबर नहीं। अभी तक मतदाता सूची में नाम विधान सभा क्षेत्र बूथ संख्या, भाग संख्या, क्रमांक आदि के नाम से ढूंढ़े जाते थे। एपिक नंबर आया तो इससे भी मिल जाना चाहिये। लेकिन यह बदलेगा कि नहीं, कब बदलेगा इसकी कोई सूचना या जानकारी नहीं है। तेजस्वी यादव को अपने एपिक नंबर के आधार पर एसआईआर के बाद प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं मिला तो उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। जवाब में चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि उनका नाम मतदाता सूची में फलां जगह है और फिर दो एपिक नंबर होने का मामला, नोटिस और चर्चा छिड़ गई। तेजस्वी ने इसके बाद संभवतः कुछ नहीं कहा है। मुझे आम तौर पर खबरों या सोशल मीडिया में ऐसा कुछ नहीं दिखा।

खबरों के अनुसार, चुनाव आयोग ने दावा किया है कि तेजस्वी ने इसी (जो चुनाव आयोग ने बताया है) एपिक कार्ड का उपयोग 2020 के चुनाव में किया था। पर तेजस्वी ने यह भी कहा है कि मेरा एपिक नंबर बदल सकता है तो आम आदमी का क्या होगा और इसके बिना आदमी अपना नाम कैसे ढूंढ़ेगा और कैसे वोट डालेगा। ऐसे में सवाल है कि दो एपिक कार्ड क्या तेजस्वी की जानकारी में हैं। खबरों से मुझे लगता है – नहीं। चार अगस्त को अमर उजाला में छपा कि ये दो नंबर हैं, RAB 0456228 और RAB 2916120 इनमें पहले यानी – RAB 0456228 का उपयोग तेजस्वी ने 2020 के चुनाव में किया था। तेजस्वी के 2020 के चुनाव के शपथपत्र के अनुसार, “मेरा नाम 181, दीघा – सामान्य विधानसभा क्षेत्र में क्रम संख्या 511 भाग संख्या 160 में है।” इसमें एपिक नंबर का जिक्र नहीं है और इससे नहीं लगता है कि चुनाव आयोग का दावा सही है। दूसरी ओर चुनाव आयोग अब इसी कार्ड को अवैध बता रहा है। अगर खबरों से मेरी यह समझ सही है तो बहुत बड़ी बात है लेकिन मीडिया इस पर शांत है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल के अनुसार, तेजस्वी ने प्रेस कांफ्रेंस में जिस कार्ड की चर्चा की थी उसका नंबर RAB 2916120 है और जो दूसरा नंबर बताया जा रहा है वह चुनाव आयोग का बताया नया नंबर है। यह अमर उजाला का जानकारी से उलट है। खबरों में मुझे इस बात के सबूत नहीं मिले कि पहले के चुनावों में तेजस्वी ने इसका उपयोग किया है। खबरों के अनुसार चुनाव आयोग का यह दावा जरूर है कि तेजस्वी ने दूसरे या नये वाले यानी RAB 0456228 का प्रयोग किया है लेकिन इसमें पते की जगह सिर्फ मकान संख्या 110 लिखा है। दूसरी ओर, तेजस्वी के 2020 के शपथ पत्र में जो पता है वह 208, कौटिल्य नगर, एमपी-एमएलए कॉलोनी, डाकघर – बीवी कॉलेज, जिला पटना है। यही पता तेजस्वी के पुराने (या अकेले) कार्ड में है। ऐसे में तेजस्वी के दूसरे कार्ड से वाकिफ होने या उसके उपयोग किये जाने की कोई खबर मुझे कहीं नहीं मिली। खबरों के अनुसार, पटना जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम मतदान केंद्र संख्या 204, लाइब्रेरी बिल्डिंग, बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी में है। पटना के डीएम ने यह भी कहा है कि पहले उनका नाम मतदान केंद्र संख्या 171, क्रम संख्या 481, लाइब्रेरी बिल्डिंग, बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी में था। सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि तेजस्वी के यही कार्ड और विवरण 2015 और 2020 के चुनावों में हैं। लेकिन इसका विवरण शपथ पत्र के विवरण से मेल नहीं खाता है। ऐसे में तेजस्वी के दो कार्ड उपयोग करने का कोई सबूत या मामला अभी तक मीडिया में नहीं है और चुनाव आयोग का आरोप सही साबित नहीं हुआ है और ना ही तेजस्वी के दो कार्ड (अथवा एपिक) नंबर के उपयोग का कोई सबूत है।

पता बदलने से अगर कार्ड नया बनेगा तो एपिक नंबर भी बदलना चाहिये, बदला या नहीं इसपर भी खबरें शांत हैं हालांकि तेजस्वी ने जो पता शपथपत्र में लिखा है वह RAB 2916120 में ही है और एपिक नंबर बदलना भी सामान्य है – जांच किस बात की होगी। गड़बड़ यह है कि चुनाव आयोग जो दूसरा एपिक नंबर बता रहा है उसमें पता पूरा नहीं है और शपथ पत्र वाले से अलग है। उनके चुनावी शपथ पत्र में पता वही है जो खबरों में है। RAB 0456228 का पता मकान संख्या 110, अगर सही भी हो तो अधूरा है। पते की जांच और संबंधित विवरण के लिए मैंने पूरी सूची देखी। इस सूची में नामों की शुरुआत क्रम संख्या एक से तो है लेकिन उसके लिए मकान संख्या 0 यानी शून्य लिखा है जो लगभग असंभव है। पटना में अगर शून्य संख्या वाला कोई मकान कहीं, किसी मोहल्ले में बना तो उसकी खबर होनी चाहिये पर वह भी नहीं मिली। सूची में मकान संख्या बढ़ते हुए 254 तक है। बीच में कई मकानों (अंकों) में कोई वोटर नहीं है। मकान संख्या 0 से 254 तक किस बिल्डिंग, कंडोमियम, मोहल्ला या कॉलोनी में है यह स्पष्ट नहीं है। पता अलग है तो यह विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का ही है, क्यों माना जाये, मैं नहीं जानता। वैसे भी, अगर एपिक नंबर मालूम नहीं होगा तो कोई भी व्यक्ति इस सूची में न अपना नाम ढूंढ़ पायेगा ना वोट दे सकेगा। सूची देखकर समझना मुश्किल है और यह स्पष्ट नहीं है की यह किस मोहल्ले या बिल्डिंग के लोगों की सूची है। एपिक नंबर तो तेजस्वी का ही बदला है जिसे दो कार्ड होना बताया जा रहा है और उसी को मुद्दा नहीं बनने दिया गया। ।

हो सकता है ड्राफ्ट या प्रारूप होने के कारण पता पूरा न हो लेकिन सोशल मीडिया पर 2015 की जो मतदाता सूची है उसमें भी यही पता है। इससे चुनाव आयोग के दावे की पुष्टि तो नहीं होती है। सूची में मकान संख्या 254 के बाद क्रम संख्या 450 के लिए मकान संख्या 305, मुन्द्रिका पैलेस लिखा है। इसके बाद क्रम संख्या 451 के तहत मकान संख्या है ए/2/596 जबकि क्रम संख्या 452-453 में मकान संख्या आकाश गंगा अपार्टमेंट है। 454 में मकान संख्या अमूकुरा है। 455 मकान संख्या आनंद विहार कॉलोनी है। 456 में मकान संख्या बजरंग कॉलोनी है। संक्षेप में, यह ठीक नहीं लगता है अधूरा है और किसी रिपोर्टर ने जमीन पर जाकर या मतदाता सूची देखकर रिपोर्ट की हो तो मुझे नहीं मिली है। सबने चुनाव आयोग ने जो कहा उसे छाप दिया – तेजस्वी फंस गये। अखबारों और सोशल मीडिया के कुछ शीर्षक हैं, दो वोटर कार्ड पर जांच शुरू, अब तेजस्वी का एपिक घोटाला, तेजस्वी के दो-दो वोटर आईडी क्यों? तेजस्वी के दो वोटर कार्ड सामने आने से राहुल गांधी का एटम बम फट गया, दो वोटर कार्ड होने पर कानूनी एक्शन संभव, तेजस्वी लड़ पायेंगे चुनाव? उल्टा पड़ गया तेजस्वी का दांव, कहां से आया दूसरा वोटर कार्ड, जांच शुरू

इन दो मामलों से निपटने या सरकार को राहत दिलाने के बाद आज के अखबारों में ट्रम्प के अभियान पर भारत के पलट वार का प्रचार है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, ‘अनुचित’ : रूसी तेल मामले में ट्रम्प के अभियान पर भारत ने पलटवार किया। इंट्रो है, ताजा हमले में अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ में भारी वृद्धि का डर दिखाया। इसके साथ दो कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, इस धमकी से भारत को रूसी कच्चे (तेल) से अलग करने की संभावना कम ही है। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक भी मिलता-जुलता है। ‘अनुचित’ : ट्रम्प के टैरिफ अभियान पर भारत। द हिन्दू की आज की लीड का शीर्षक है, ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बाद केंद्र का पलटवार। उपशीर्षक है, विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के समय से अमेरिका ने रूसी आयात को सक्रियता से प्रेरित किया है। साथ ही, रूस के साथ ईयू के व्यापार का भी उल्लेख किया। ट्रम्प के खिलाफ भारत के पलट वार की खबर इंडियन एक्सप्रेस में भी लीड है। शीर्षक है, ट्रम्प ने टैरिफ वृद्धि की चेतावनी दी तो भारत ने पलट वार किया : ‘यह अनुचित है’। उपशीर्षक है, ट्रम्प का नवीनतम : भारत रूस की ‘युद्ध मशीन’ की सहायता कर रहा है; दिल्ली ने अमेरिका और ईयू का उल्लेख किया, कहा कि दोनों मास्को के साथ व्यापार करते हैं। द टेलीग्राफ का शीर्षक है, टैरिफ बढ़ाने की धमकी पर भारत ने कहा, निशाना बनाया गया है। नवोदय टाइम्स की लीड थोड़ी पुरानी लगती है, ट्रम्प की धमकी, टैरिफ और बढ़ायेंगे।

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