उपजा ने मांगा पीजीआई में फ्री इलाज तो एआईआरए बोली मत करो बिरादरी के टुकड़े, स्टिंगरों को भी देखो

उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविंद शुक्ला के एक पत्र से पत्रकार बिरादरी में असंतोष फैल रहा है. ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन (एआईआरए) के महामंत्री एमके त्रिपाठी का कहना है कि अरविंद शुक्ला पत्रकारों के परिजनों को स्वास्थ्य एंव चिकित्सा सुविधा दिलाए जाने के नाम पर पत्रकारों को बड़ा-छोटा या अगड़ा-पिछडा जैसे वर्गों में विभाजित कर रहे हैं.

एआईआरए के महामंत्री एमके त्रिपाठी ने सभी पत्रकार यूनियनों और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि पत्रकारों या उनके परिजनों को जो भी सुविधाएं दी जाएं वो सभी पत्रकारों को एक समान और एक साथ दी जाएं. राज्य और जिला स्तर या डेस्क या फील्ड नाम पर पत्रकरों को न बांटा जाए. एमके त्रिपाठी ने मीडिया के सभी संगठनों और सरकार से भी आग्रह किया है कि अखबारों और टीवी चैनलों के लिए बेगार की तरह काम करने वाले संवादसूत्रों, स्टिंगरों व उनके परिजनों के लिए भी रेगुलर पत्रकारों की तरह सभी सुविधाएं मुहैया करायी जायें. उन्होंने संवादसूत्रों और स्टिंगरों के आर्थिक शोषण की तरफ भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया है. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एक पत्र लिख कर पहले चरण में राज्य स्तरीय पत्रकारों के परिजनों को भी संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ तथा लोहिया इंस्टीट्यूट में निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं की मांग की है. अरविंद शुक्ला ने दूसरे चरण में जिला स्तरीय मान्यता प्राप्त पत्रकारों को यही सुविधा देने और सबसे बाद में डेस्क पर कार्यरत पत्रकारों का जिक्र किया है. ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन के महामंत्री का सुझाव है कि राज्य, जिला, फील्ड और डेस्क के नाम से विभाजन से पत्रकारों में परस्पर द्वेष और हीन भावना पैदा न की जाये.



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