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वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ‘पीहू’ के बाद फिल्म ‘पायर’ के जरिए दर्शकों की धड़कनें रोकने आ रहे हैं!

रिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार विनोद कापड़ी की ‘पीहू’ के बाद एक नई फिल्म आ रही है. फिल्म का नाम है ‘पायर’. यह उत्तराखंड में हिमालय के बैकग्राउण्ड पर आधारित एक 80 वर्ष के बुजुर्ग जोड़े की अनोखी प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म होगी.

‘पायर’ का वर्ल्ड प्रीमियर प्रतिष्ठित तेलिन ब्लैक नाइट्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 28वें संस्करण में होने जा रहा है. आपको बता दें कि विनोद कापड़ी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पत्रकार और फिल्म निर्माता हैं.

अमर उजाला की वेबसाइट में प्रकाशित ख़बर बताती है कि, विनोद कापड़ी ने दो स्थानीय बुजुर्ग पदम सिंह और हीरा देवी को मुख्य कलाकार के रूप में लिया, जिनमें से किसी ने भी पहले कभी कैमरा या फिल्म नहीं देखी थी.

पदम सिंह और हीरा देवी दोनों उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग तहसील के रहने वाले हैं. पदम एक रिटायर्ड सेना के जवान हैं जो अब किसान के रूप में काम करते हैं. वहीं, हीरा देवी भैंसों की देखभाल करती हैं और जंगल से लकड़ियां और घास इकट्ठा करती हैं.

बताया जाता है कि फिल्म का रफ कट देखने के बाद अकादमी पुरस्कार विजेता संगीतकार माइकल डैना ने तुरंत फिल्म का संगीत बनाने के लिए हामी भर दी. माइकल वही हैं जिन्होंने वर्ष 2012 में लाइफ ऑफ पाई के लिए ऑस्कर जीता था. इसके अलावा पुरस्कार विजेता और जर्मन संपादक पेट्रीशिया रोमेल भी फिल्म में सहयोगी हैं. उन्होंने बर्लिन में फिल्म का संपादन किया.

पेट्रीशिया ने द टूरिस्ट, द लाइव्स ऑफ अदर्स जैसी फिल्मों का संपादन किया, जिसने 2006 में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म का अकादमी पुरस्कार जीता. गुलजार ने पहली बार माइकल के साथ सहयोग किया और पायर के लिए एक दिल छू लेने वाला गीत लिखा है.

विनोद कापड़ी ने एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा है कि, “यह उनके लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि विश्व सिनेमा के इन तीन महान लोगों ने पायर में योगदान दिया है. माइकल और पैट्रीशिया ने बिना किसी व्यवसायिक लाभ के मानदेय पर काम किया, जबकि गुलजार ने कोई फीस लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने यहां तक कहा कि, “मैं उस सिनेमा के लिए फीस कैसे ले सकता हूं, जिसमें सत्यजीत रे के काम की झलक मिलती हो.”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पायर एक सच्ची कहानी से प्रेरित है, जो विनोद को 2017 में मुनस्यारी के एक गांव में मिले बुजुर्ग जोड़े की कहानी है. उत्तराखंड से लगातार पलायन के कारण वीरान हो चुके भुतहा गांवों की पृष्ठभूमि में यह जोड़ा मौत का इंतजार कर रहा था, लेकिन एक-दूसरे के लिए उनके प्यार ने विनोद के दिल पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उन्होंने इसे फिल्माने का फैसला लिया.

इसका एक किस्सा यह भी है कि कोई भी निर्माता इस फिल्म को बनाने के लिए तैयार नहीं था, जिसमें किसी भी अभिनेता की बजाय एक बुजुर्ग जोड़े को दिखाया गया था. इसलिए विनोद और उनकी पत्नी साक्षी जोशी ने कहानी पर अपने दृढ़ विश्वास के साथ फिल्म निर्माण करने का निश्चय किया.

भागीरथी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक साक्षी जोशी कहती हैं- “जब कहानियों और किरदारों की बात आती है तो मैंने हमेशा विनोद के दृढ़ विश्वास पर भरोसा किया है. भारत में स्वतंत्र फिल्म बनाना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है. तेलिन ब्लैक नाइट्स में अपने वर्ल्ड प्रीमियर के बाद पायर अगले साल के अंत में भारत में रिलीज होने से पहले अपने फेस्टिवल रन पर होगी.”

वहीं, विनोद कापड़ी ने फेसबुक पर तीन तस्वीरें साझा कर इसके बारे में लिखा है कि- “2014 की एक तस्वीर से Pihu का जन्म हुआ था, 2018 की दूसरी तस्वीर से Pyre का जन्म हुआ. और अब 2024 की इस तीसरी तस्वीर से एक और फिल्म जन्म लेने के लिए बेक़रार है. कहानी अभी कुछ नहीं है. कहानी के नाम पर अभी सिर्फ़ ये दो पहाड़ हैं. सोचिए और बताइए”…

विनोद कापड़ी की पहली फिल्म ‘पीहू’ पर भड़ास एडिटर यशवंत का रिव्यू पढ़ें…

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