विनोद मेहता ने चुपचाप नंगी तस्वीर जेब में रख ली

विनोद मेहता तथाकथित अश्लील पत्रिका डेबोनेयर के संपादक हुआ करते थे। इमरजेंसी लगने के बाद सूचना प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने पत्रिका के एक अंक की नैतिकता का स्तर जांचने के लिए विनोद मेहता को प्रस्तावित प्रकाशन सामग्री के साथ राजभवन में बुलाया। इस काम में वे इतने गंभीर हुए कि एक नंगी तस्वीर चुपचाप अपनी जेब के हवाले कर ली। विनोद मेहता ने इसे आत्मकथा में लिखा है। आज ऐसे बहुत से संपादकों की जरूरत है। विद्या भैया के पावन किस्से सुनाने वाले कांग्रेसी नेताओं की कमी नहीं। खैर उनकी तो छोड़िए, विनोद मेहता ने संजय गांधी को भी जीते जी लिखा। उनके व्यक्तित्व को अश्लील नहीं, साहसी और बेलीक कहेंगे।

लेखक-पत्रकार अनिल कुमार यादव के फेसबुक वॉल से…



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