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सुख-दुख

हार्ट फेल होने से दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर जी का निधन!

शीतल पी सिंह-

बड़ी हृदयविदारक सूचना है। हम लोगों के पत्रकारिता में अग्रज रहे भाई वीरेंद्र सेंगर जी नहीं रहे। आज दो बजे के आसपास नौकुचियाताल स्थिति आवास पर उनकी तबियत बिगड़ी और फिर संभल न सकी। भाभी जी नोएडा में थीं और पता चला अब रास्ते में हैं!

शब्दहीन हूं, भाई शेष नारायण सिंह के बाद ये दूसरे अग्रज हैं जिनसे सदा संबल और साहस मिला और जिनका साथ छूट गया।

हाशिमपुरा के नरसंहार का उन्होंने पर्दाफाश किया था तब वीर बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।


सूरज सिंह-

पत्रकारीय जगत में हमारे गार्जियन रहे सर Virendra Sengar जी नहीं रहे. आज दोपहर में हार्ट फेल होने की खबर.

सर ने DLA अखबार में नौकरी देकर हमें बच्चे की तरह बहुत कुछ सिखाया. उन्होंने हिन्दी लेखन, शब्दों का ज्ञान, वाक्यों के प्रयोग, राजनीतिक टीका टिप्पणी, व्यंग्य सब कुछ सिखाया.

मेरी शादी, भाई- बहनों के वैवाहिक कार्यक्रमों में शामिल हुए. जॉब चेंज होने के बाद भी हमेशा हाल चाल पूछते रहे. नैनीताल से जब भी आते और प्रेस क्लब पहुंचते तो चाय पर बुलाते.

घर परिवार के बारे में, छोटे भाई के बारे में, अखबार में काम के बारे में पूछते थे. फेसबुक पर हमने सर का अकाउंट बनाया था, कहते थे अब इस सब पर रहना होगा. सर के अचानक चले जाने का दुख हमेशा रहेगा. आपके संग बहुत सी प्रेरणादाई यादें रहीं.


कमर वहीद नकवी-

बहुत ही दु:खद ख़बर है। हम सबके अत्यन्त प्रिय वीरेन्द्र सेंगर जी के अचानक निधन से स्तब्ध हूँ। दो दिन पहले ही उनसे बात हुई थी।‘चौथी दुनिया’ में हम लोगों ने साथ-साथ काम किया था।

हाशिमपुरा-मलियाना कांड समेत कई बड़ी ख़बरें ‘चौथी दुनिया’ को वीरेन्द्र सेंगर जी की ही देन थीं। विनम्र श्रद्धांजलि और सादर नमन।


संजीव भगत-

पत्रकार वीरेन्द्र सेंगर नहीं रहे। आजकल रोज बातचीत हो रही थी। दोपहर तक सोशल मीडिया में सक्रिय थे। आजकल वे नौकुचियाताल, नैनीताल में रह रहे थे। वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर बेहद शरीफ और मिलनसार इंसान थे. लखनऊ और दिल्ली के बडे संस्थानों में कार्यरत रहे.


शंभुनाथ शुक्ल-

साथी वीरेंद्र सेंगर स्कूल में मुझसे एक वर्ष जूनियर थे। हम दोनों का गांव कानपुर जिले में तीन किमी की दूरी पर था और शहर में अपन आसपास ही पले-बढ़े। पत्रकार वे लखनऊ में और मैं कानपुर में। फिर दिल्ली आ गए। मैं पहले वे थोड़ा बाद में।

जब मैंने अमर उजाला जॉइन किया तो कई गुरुमन्त्र भी दिए। उनसे आख़िरी मुलाक़ात तब हुई जब देश में कोरोना नहीं आया था। कोरोना के दौरान वे नोएडा छोड़ कर नैनीताल के समीप जा बसे। लेकिन फेसबुक के ज़रिए एक दूसरे के हलचाल से वाक़िफ़ रहते।

आज फ़ेसबुक से ही सूचना मिली कि वे नहीं रहे। धक्का लगा, पता नहीं कब कौन साथ छोड़ जाए। Virendra Sengar अब स्मृतियों में रहेंगे।


उर्मिलेश-

वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर के आकस्मिक निधन की सूचना बेहद दुखद और स्तब्धकारी है. अभी कल ही किसी मित्र की फेसबुक पोस्ट पर उनकी एक बहुत सार्थक और साहसिक टिप्पणी पढ़कर खुशी हुई थी कि हम लोगों का पुराना साथी वक्त के उतार-चढ़ाव के बावजूद अपने बुनियादी विचारों पर आज भी कायम है..पर आज देर शाम उसी साथी वीरेंद्र सेंगर की आकस्मिक मृत्यु की बुरी खबर पाकर हम स्तब्ध रह गये! जीवन में सबकुछ कितना अनिश्चित सा है!

जहां तक याद आ रहा है, हम लोगों की पहली मुलाकात पिछली सदी के अस्सी दशक में कभी हुई थी. वह एक साहसी और समझदार पत्रकार थे. उन्हें समय और सियासत की अच्छी पहचान थी. एक दौर में वीरेन ने महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग की. उनकी ऐसी हर खबर गहन खोज-पडताल पर आधारित होती थी, जिसका खंडन करना किसी बड़े नेता या नौकरशाह के लिए मुमकिन नहीं था.

ऐसे पुराने साथी-पत्रकार का बिछुड़ना बहुत तकलीफदेह है. उनकी पत्नी, बेटी और पूरे परिवार के प्रति हमारी हार्दिक शोक संवेदना. दिवंगत साथी को सादर श्रद्धांजलि!


सलीम अख्तर सिद्दीकी-

वीरेंद्र सेंगर नहीं रहे। निडर और बेबाक पत्रकार। जब हाशिमपुरा कांड की खबर को कोई हाथ लगाने को तैयार नहीं था, कहते हैं नवभारत टाइम्स में ये खबर एक हफ्ते तक पड़ी रही थी। उस खबर को वीरेंद्र सेंगर ने साप्ताहिक चौथी दुनिया में छापा और दुनिया को आजाद भारत में हुए नरसंहार का पता चला।

दो दिन पहले ही उनका नंबर किसी को दिया था पॉडकास्ट के लिए। विनम्र श्रद्धांजलि।

वीरेंद्र सेंगर जी के इंटरव्यू के दोनों भाग देखिए…

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2 Comments

2 Comments

  1. पद्मसंभव श्रीवास्तव

    March 26, 2025 at 7:45 pm

    वीरेंद्र सेंगर जो कुछ लिखा, ताल ठोंक कर लिखा। हिंदी पत्रकारिता में अपनी लेखनी से पहचान बनाई थी और अपने करियर में किसी वरिष्ठ पत्रकार के पिछलग्गू कभी नहीं बनें।
    ईमानदारी का मोल समझा और सामाजिक जीवन में उन्होंने अपने पत्रकारीय धर्म का निर्वहन किया।

  2. गणेश प्रसाद झा

    March 27, 2025 at 8:22 am

    अत्यंत दुखद समाचार। आदरणीय सेंगर साहब से DLA के उनके नोएडा दफ्तर में कई बार मिलना हुआ था। चंडीगढ़ जनसत्ता के अपने साथी जगमोहन फुटेला जी (अब दिवंगत) ने मेरा उनसे परिचय कराया था। तभी से उनसे संपर्क कायम था और हवाट्सेप पर भी उनसे जुड़ाव बना हुआ था। सेंगर साहब को अश्रूपूर्ण श्रद्धांजलि। उनकी स्मृतियों को सादर नमन।
    ।। ॐ शांति।।

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