
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के बोर्ड ने हाल ही में मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ के रूप में पुनीत गोयनका का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि इसके बावजूद 24 से 28 नवंबर के बीच होने वाली सालाना जनरल मीटिंग (AGM) में गोयनका को शेयरधारकों से समर्थन पाने में कठिन चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
बताया जा रहा है कि बोर्ड के फैसले पर वोटिंग 28 नवंबर को होगी, जो गोयनका के लिए शेयरधारकों के भरोसे की असल परीक्षा हो सकती है.
मनीकंट्रोल डॉट कॉम ने एनालिस्ट्स के अनुसार अपनी रिपोर्ट में बताया है कि घरेलू म्यूचुअल फंड्स और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, जैसे ZEEL के संस्थागत शेयरधारक, गोयनका का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. कंपनी एक्ट के तहत उनकी नियुक्ति के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है, यानी बैठक में मौजूद शेयरधारकों की संख्या का 50 प्रतिशत, जिस कारण संस्थागत निवेशकों की भूमिका इस वोटिंग में काफी अहम हो जाती है.
ZEEL के शेयरधारकों में एलआईसी, ICICI प्रूडेंशियल, वैनगॉर्ड और नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल जैसे नाम शामिल हैं. इन पब्लिक शेयरधारकों के पास कंपनी की कुल 96 प्रतिशत हिस्सेदारी है और सेबी के नियमों के मुताबिक बोर्ड के पदों पर नियुक्तियों के लिए संस्थागत निवेशकों का वोट अनिवार्य है.
गोयनका परिवार के पास जील में लगभग 4% हिस्सेदारी है और कंपनी के मैनेजमेंट पर अब भी उनका नियंत्रण है. हाल के समय में उन्हें निवेशकों की ओर से कई मुद्दों पर कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. इनमें मुख्य रूप से सोनी के साथ 10 अरब डॉलर का असफल मर्जर भी शामिल है.
जी एंटरटेनमेंट ने दिसंबर 2021 में सोनी के साथ मर्जर पर सहमति जताई थी. हालांकि दिसंबर 2024 में यह डील टूट गई, जिसके बाद इसके शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. सोनी के साथ मर्जर डील कैंसल होने की खबर के बाद इसका शेयर करीब 48 फीसदी गिर चुका है और इस दौरान इसकी मार्केट वैल्यू भी लगभग 10,700 करोड़ रुपये घट गई है और इससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर भी असर पड़ा है.
हालांकि ZEEL और सोनी ने अब मर्जर से जुड़े सभी कानूनी मुद्दों का निपटारा कर लिया है और अगस्त तक कोई बकाया देनदारी नहीं थी. बावजूद इसके ZEEL की चुनौतियां बरकरार हैं.


