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अविनाश दास की फिल्म ‘आरा वाली अनारकली’ का प्रोमो / ट्रेलर रिलीज

Harsh Vardhan Tripathi : हम और अविनाश दास विचार के दो छोरों पर ज्यादातर खड़े रहे। वेबसाइट, ब्लॉगिंग के शुरुआती दिनों में जब हम मुंबई में थे और अविनाश दिल्ली में, तब हमारी जान-पहचान-झूमाझटकी हुई थी। हम सीएनबीसी आवाज मुंबई में थे और अविनाश एनडीटीवी दिल्ली में। अब अविनाश मुंबई में हैं और हम दिल्ली में। मुंबई जाकर अविनाश फिल्म निर्देशक हो गए हैं। उनकी फिल्म आ रही है, ये आरा वाली अनारकली की कहानी है। प्रोमो भर देख लीजिए, फिल्म देखने खुद जाइएगा। पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने अविनाश की सफलता की ये शुरुआत है। प्रोमो देखते मुझे इस फिल्म पर कुछ-कुछ गैग्स ऑफ वासेपुर की छाप दिखी।

Harsh Vardhan Tripathi : हम और अविनाश दास विचार के दो छोरों पर ज्यादातर खड़े रहे। वेबसाइट, ब्लॉगिंग के शुरुआती दिनों में जब हम मुंबई में थे और अविनाश दिल्ली में, तब हमारी जान-पहचान-झूमाझटकी हुई थी। हम सीएनबीसी आवाज मुंबई में थे और अविनाश एनडीटीवी दिल्ली में। अब अविनाश मुंबई में हैं और हम दिल्ली में। मुंबई जाकर अविनाश फिल्म निर्देशक हो गए हैं। उनकी फिल्म आ रही है, ये आरा वाली अनारकली की कहानी है। प्रोमो भर देख लीजिए, फिल्म देखने खुद जाइएगा। पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने अविनाश की सफलता की ये शुरुआत है। प्रोमो देखते मुझे इस फिल्म पर कुछ-कुछ गैग्स ऑफ वासेपुर की छाप दिखी।

Riwa Singh : ट्रेलर में ही गर्दा उड़ा दिये हैं आपलोग! एक-एक डायलॉग ‘करेजवा’ के आर-पार हो गया। क्या लिखा है Avinash जी ने! मज़ा आ गया! रातभर पागल होती रही मैं! संजय मिश्रा नेगेटिव रोल में हैं, निर्देश दे रहे हैं – कांड बनाओ पर कमांड रखो। पंकज त्रिपाठी हैं अनारकली के हमदम, दोस्त और मंच संचालक भी। और स्वरा भास्कर! इन्होंने जिस अंदाज़ में डायलॉग्स की डिलीवरी की है, वो दीवाना कर देता है।

पिंक में लड़कियां चीखकर कहती हैं कि हमने पैसे नहीं लिए! आरा की अनारकली कहती है – “पैसा भी रखेंगे और देंगे भी नहीं।” मतलब अब पैसा देकर भी खरीदने का सपना मत देखिए। अबतक ये समझ आता था कि औरतें पैसे से खरीदी जा सकती हैं। जो पैसे नहीं लेती थीं वो शरीफ़ कहलाती थीं। अबकी औरत पैसे भी लेगी क्योंकि उसे आपके दिये हुए शराफ़त के तमगे का अचार नहीं डालना है। और आप उसके साथ कोई ज़बरदस्ती भी नहीं कर पाएंगे इसका भी दावा करती है। ये अभी तक की सिनेमायी औरतों से एक कदम आगे की बात है।

कितना आसान होता है एक रसूख़दार के लिए एक आम इंसान को कुचलना या बेबस कर देना! और ये काम और भी आसान हो जाता है जब वो एक औरत होती है। गानेवालियों की कौन-सी इज्ज़त होती है, उन्हें अपनी देह से कैसा लगाव! गानेवालियों का कबसे चरित्र होने लगा! अनारकली कहती है – सबको लगता है हम गानेवाले लोग हैं तो कोईओ आसानी से बजा भी देगा और फिर वो बताती है – पर अब अइसा नहीं होगा!

वो गानेवाली होकर भी बड़े लोगों के लिए ‘उपलब्ध’ नहीं होती इसलिए उसे देह का अवैध धंधा करने के झूठे इल्ज़ाम में गिरफ्तार करवा दिया जाता है और अख़बार की सुर्खियों के लिए वो वेश्या बन जाती है। तोड़ा उसे पहले ही जा चुका है, अब उसके पास सिर्फ़ उठने का विकल्प होता है। वो तब भी उपलब्ध नहीं थी और अब भी नहीं है, चाहे जितना ज़ोर लगा लो।  अनारकली कहती है – आज या तो आर-पार होगा, नहीं हम आरा की अनारकली नहीं, समझे! पहले से भी ज्यादा उत्सुक और बेसब्र हूं अनारकली ऑफ़ आरा के लिए। पूरी टीम को शुभकामनायें!

पत्रकार हर्षवर्द्धन त्रिपाठी और रीवा सिंह की एफबी वॉल से.

अविनाश की फिल्म का प्रोमो / ट्रेलर देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=jHFT_PdLh20

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