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बधाई, एक और ‘निष्पक्ष’ चैनल बाजार में आ गया :)

अर्नब गोस्वामी और राजीव चंद्रशेखर का रिपब्लिक टीवी अब लॉन्च हो गया है। इस मौक़े पर ज़रा मालिक राजीव चंद्रशेखर के बारे में बता दूं। फ़िलहाल वो राज्यसभा सांसद हैं और केरल में NDA के उपाध्यक्ष हैं। डिफेंस पर स्टैंडिंग कमेटी में भी वो हैं। उनकी कंपनी को भारतीय एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट्स में तकनीकी सहयोग का ठेका मिला हुआ है। बीते साल ये ठेका मिला। चैनल जब शुरू हुआ तो उनकी कंपनी जुपिटर कैपिटल के CEO अमित गुप्ता ने एडिटोरियल को मेल लिखा कि कंटेंट “प्रो मिलिट्री” होना चाहिए। मिलिट्री नैशनलिज़्म चंद्रशेखर की आइडियोलॉजी में फिट बैठता है, लेकिन इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण ये फैक्ट है कि मिलिट्री के साथ उनका धंधा चलता है। बिजनेस इंटरेस्ट है।

अर्नब गोस्वामी और राजीव चंद्रशेखर का रिपब्लिक टीवी अब लॉन्च हो गया है। इस मौक़े पर ज़रा मालिक राजीव चंद्रशेखर के बारे में बता दूं। फ़िलहाल वो राज्यसभा सांसद हैं और केरल में NDA के उपाध्यक्ष हैं। डिफेंस पर स्टैंडिंग कमेटी में भी वो हैं। उनकी कंपनी को भारतीय एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट्स में तकनीकी सहयोग का ठेका मिला हुआ है। बीते साल ये ठेका मिला। चैनल जब शुरू हुआ तो उनकी कंपनी जुपिटर कैपिटल के CEO अमित गुप्ता ने एडिटोरियल को मेल लिखा कि कंटेंट “प्रो मिलिट्री” होना चाहिए। मिलिट्री नैशनलिज़्म चंद्रशेखर की आइडियोलॉजी में फिट बैठता है, लेकिन इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण ये फैक्ट है कि मिलिट्री के साथ उनका धंधा चलता है। बिजनेस इंटरेस्ट है।

बाक़ी अर्नब के पास बीजेपी को छोड़कर हर पार्टी को गरियाने का एक बढ़िया मंच मिला है। लालू यादव से शुरुआत भी हो गई। टीवी में एक और बीजेपी चैनल खुल गया है। बाक़ी चंद्रशेखर एशियानेट के भी मालिक हैं। बाय द वे, रिपब्लिक में 14 लोगों का शेयर है, जिनमें अर्नब और उनकी पत्नी भी शामिल हैं। किसका कितना शेयर है, ये नहीं पता।

The Wire ने राजीव चंद्रशेखर, अर्नब और रिपब्लिक पर दो लेख छापे। चंद्रशेखर ने सिद्धार्थ वरदराजन पर मानहानि का मुक़दमा कर दिया। एक लेख Sandeep Bhushan का था और एक सचिन राव का। कहा क्या गया था लेख में कि चंद्रशेखर बिलबिला गए? किन बातों से बिलबिलाए? फैक्ट लिखा गया था। मैं उसी तरह का फैक्ट फिर से लिख रहा हूं।

-चंद्रशेखर की कंपनी जुपिटर कैपिटल का Axiscades Engineering Technology Limited में निवेश है, जोकि रक्षा उत्पाद से जुड़ी कंपनी है।

-जुपिटर को रक्षा मंत्रालय ने सेना और एयरफोर्स के लिए 18 महीने तक Aircraft Recognition Training Systems सप्लाई करने का ठेका दिया। दशक भर से ऊपर का मेनटेंनेंस भी इसी कंपनी को मिली।

-मार्च 2016 में रक्षा मंत्रालय और जुपिटर की ये डील हुई।

-चंद्रशेखर फ़िलहाल संसद की रक्षा संबंधी स्थाई समिति के सदस्य हैं। वे रक्षा पर परामर्श समिति के भी सदस्य हैं। वे NCC के भी केंद्रीय परामर्श समिति के सदस्य हैं।
मुझे कोई समझाएं कि ये कैसे हितों का टकराव (conflict of interest) नहीं है?

-जुपिटर के CEO ने चैनल लॉन्च होने से पहले अर्नब समेत एडिटोरियल के टॉप लोगों को मेल लिखकर साफ़ कहा कि कंटेंट “प्रो-मिलिट्री” होना चाहिए। ये मिलिट्री को बचाने के लिए है या फिर अपना धंधा बचाने के लिए?

-चंद्रशेखर “Flags of honour” नाम से एक NGO भी चलाते हैं। इसमें वो मिलिट्री से जुड़े लोगों की हौसला-आफजाई करते हैं। चंद्रशेखर का पूर धंधा MMMM यानी मीडिया, मिलिट्री, मोबाइल और मोदी है।

-Asianet News, कन्नड़ प्रभा, सुवर्ण न्यूज़, बेस्ट FM और रेडियो इंडिगो इन्हीं की कंपनी है।

-बीपीएल मोबाइल इन्होंने ने ही खोला था।

-राज्यसभा में हैं निर्दलीय सांसद, लेकिन केरल में NDA के उपाध्यक्ष हैं।

(यह पोस्ट फेसबुक पर वायरल हो गई है. इसके ओरीजनल लेखक कौन हैं, इसका पता नहीं चल पाया है.)

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