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उत्तर प्रदेश

आरटीआई से सूचना मांगने पर पत्रकार को जान का खतरा, लिखा सीएम योगी को पत्र

सेवा में,
श्री आदित्यनाथ योगी जी
मुख्यमंत्री, उ.प्र.शासन,
पांच कालीदास मार्ग,लखनऊ          

विषयः आरटीआई से सूचना मांगने पर पत्रकार को जान का खतरा।

महोदय,

मैं प्रदीप कुमार रावत पुत्र श्री गंगाधर रावत, निवासी 92सी, दशरथ कुंज, अर्जुन नगर, आगरा का निवासी हूं व प्रार्थी भारत गणराज्य का नागरिक है। सर मैं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं। इस दरम्यान मेरी विचारधारा सामाजिक व सरकारी योजनाओं के प्रति आमजन को जागरूक करने की रही है। इसी क्रम में मैं जन सूचना अधिकार के माध्यम से सूचनायें प्राप्त कर लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का प्रयास करता रहा हूं। यह प्रक्रिया भविष्य में भी अनवरत जारी रहेगी।

सेवा में,
श्री आदित्यनाथ योगी जी
मुख्यमंत्री, उ.प्र.शासन,
पांच कालीदास मार्ग,लखनऊ          

विषयः आरटीआई से सूचना मांगने पर पत्रकार को जान का खतरा।

महोदय,

मैं प्रदीप कुमार रावत पुत्र श्री गंगाधर रावत, निवासी 92सी, दशरथ कुंज, अर्जुन नगर, आगरा का निवासी हूं व प्रार्थी भारत गणराज्य का नागरिक है। सर मैं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं। इस दरम्यान मेरी विचारधारा सामाजिक व सरकारी योजनाओं के प्रति आमजन को जागरूक करने की रही है। इसी क्रम में मैं जन सूचना अधिकार के माध्यम से सूचनायें प्राप्त कर लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का प्रयास करता रहा हूं। यह प्रक्रिया भविष्य में भी अनवरत जारी रहेगी।

महोदय, मैं 2012 से उ.प्र. अग्निशमन विभाग से सूचनायें प्राप्त कर रहा हूं। सूचना अधिकार के माध्यम से मेरे द्वारा कई ऐसी सूचनायें मांगी गई जो फायर विभाग के कुछ अधिकारियों के गले की फांस बन गई। इसलिए उक्त महकमे द्वारा मुझे सूचनायें नहीं दी गई। मजबूरन मुझे राज्य सूचना आयोग जाना पड़ा, लेकिन कई मामलों में मेरी अनुपस्थिति के चलते आयोग से भी सूचनायें प्राप्त न हो सकी। जिसके कारण मैंने पुनः आरटीआई द्वारा उक्त सूचनाओं को प्राप्त करने हेतु आवेदन किया। यहां भी उक्त विभाग द्वारा पुरानी प्रक्रिया अपनाई गई और मुझे सूचनाओं से वंचित रहना पड़ा।

मजबूरन मुझे प्रमुख सचिव, गृह विभाग, उ.प्र.शासन, लखनऊ व पुलिस महानिदेशक, उ.प्र.पुलिस, लखनऊ को सूचना प्राप्त करने हेतु आवेदन करना पड़ा। वहां के अपीलीय अधिकारी द्वारा उ.प्र. अग्निशमन विभाग से सूचनायें देने के लिए कहा गया, लेकिन मुझे कोई सूचनायें नहीं मिली। अतः मुझे राज्य सूचना आयोग जाना पड़ा। इसी बीच प्रदेश में नई सरकार बनने से पूर्व सूचनायें तो उपलब्ध नहीं कराई गई लेकिन दो-तीन साल से लगातार धमकियां मिलती रहीं, साथ ही कई माध्यमों से मुझ पर दबाव बनाया गया जिससे मैं सूचना अधिकार के माध्यम से सूचना प्राप्त करने से पीछे हट जाऊ। मैंने उस दौरान उन पर कोई गौर नहीं किया। इस दौरान मैंने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया व तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी फेसबुक के माध्यम से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री जी, पिछले दो अप्रैल 2017 को मेरी अनुपस्थिति में लगभग 12 बजे दो लोग घर पहुंचे। उस समय मेरे बड़े भाई श्री मयंक रावत मौजूद थे। गेट को खटखटाने पर मेरे भाई बाहर आये। तदोपरांत उक्त दोनों लोगों ने मेरे (प्रार्थी) के लिए कहा कि उनसे मिलना है, उनको बुलाईये। मेरे भाई द्वारा बताया गया कि वह घर पर नहीं है। उन्होंने कहा कि आप उनको बुलवाईये। महोदय, उन दोनों तथाकथित लोगों से बात कराने व घर बुलाने के लिए मेरे भाई द्वारा मुझे कई बार फोन किया गया। मैं किसी आवश्यक कार्य में व्यस्त रहने के कारण उस समय फोन नहीं उठा सका। मेरे भाई द्वारा दोनों लोगों से घर के अंदर आकर बात करने व शिष्टाचार अनुसार चाय-पानी के लिए पूछा, लेकिन वह लोग घर के अंदर नहीं आये। मेरे भाई द्वारा उनसे उनका नाम व परिचय पूछने पर भी उन्होंने अपनी पहचान नहीं बताई। जाने से पूर्व इतना जरूर कहा कि अपने भाई को समझाईये कि आरटीआई वगैरह से दूर रहे, इसी में भलाई है।

महोदय, मेरे घर से निकलने के बाद उक्त लोगों ने मुझे कई बार फोन किया। लगातार अननोन नंबर का फोन आने से मैंने फोन पिक किया। उधर से बताया गया कि आप से मिलना चाहते हैं, आरटीआई के संबंध में। उन्होंने कहा कि आप के द्वारा डाली गयी आरटीआई के जवाब देने के लिए मिलना चाहते हैं। मेरे द्वारा पूछने पर कि किस महकमे से कहां से और कौन बोल रहे हैं, तो उन्होंने बताया कि यूपी फायर विभाग से एनपी सिंह बोल रहा हूं, फायर मुख्याल लखनऊ से बात कर रहा हूं। मैंने कहा आप नियमानुसार जवाब भेज दीजिये। तो उन्होंने मिलने के लिए दबाव डाला। मुख्यमंत्री जी, मैंने उनसे कहा कि प्रदेश में निज़ाम बदल चुका है आप भी अपनी मानसिकता बदलिये। मैं एक राष्ट्रवादी हूं और अब सरकार भी राष्ट्रवादी है। सर, उक्त बातचीत मेरे पास रिर्काड है, आप के आदेश पर उपलब्ध करवाई जा सकती है।

सीएम साहब, मैं घर पहुंचा तो पता चला कि उक्त लोग मेरे निवास पर आये थे। जबकि उन्होंने फोन पर बताया था कि यूपी फायर सर्विस मुख्यालय, लखनऊ से बोल रहे हैं। जब कि उस समय वह मेरे घर आये हुए थे। जिससे स्पष्ट हैं कि उक्त लोगों के इरादे सही नही हैं। मैंने अपने स्तर से जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि उक्त श्री एनपी सिंह, लीडिंग फायर मैन हैं व नोएडा में मुख्य अग्निशमन अधिकारी कार्यालय में सीएफओ के बाबू के रूप में तैनात हैं। सर, मैं और मेरा परिवार डरा और सहमा हुआ है। मैं आप से अपनी जान-माल की सुरक्षा हेतु गुहार लगाता हूं। मैं कहना चाहूंगा कि अगर मुझे या मेरे परिवार के किसी सदस्य को कुछ भी होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश के पुलिस महानिदेश, प्रमुख सचिव गृह, उ.प्र.शासन, लखनऊ व अग्निशमन विभाग की होगी। साथ ही जिन अधिकारियों के बारे में जानकारी चाही गई है वह भी इसके पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे। सीएम साहब, गौर करने की बात यह है कि जो अधिकारी पिछले वर्षों में सूचनायें देने में असमर्थ रहे वह अचानक रातों-रात कैसे बदल गये। जो विभाग अभी तक सूचनायें नहीं दे रहा है उसके लोग रविवार को छुट्टी के दिन घर पर आकर मिलने को आतुर हैं। यह एक यक्ष प्रश्न है?

मुख्यमंत्री जी, पुलिस व फायर विभाग एक दूसरे से जुडे़ हुए हैं जहां पुलिस ‘बल’ है, तो वही उ.प्र. अग्निशमन विभाग ‘दल’ है। इसलिए मुझे स्थानीय पुलिस पर कोई यकीन नहीं, अतः मैं सीधे आप से अपनी जान माल की रक्षा हेतु मांग करता हूं। मुझे यकीन ही नहीं अपितु पूरा विश्वास है कि मेरे मुख्यमंत्री, प्रदेश के एक आम नागरिक पर आये संकट पर गंभीरता पूर्वक लेंगे व तत्काल कार्यवाही करेंगे।

प्रार्थी
प्रदीप कुमार रावत
(पत्रकार/आरटीआई कार्यकर्त्ता)
92.सी दशरथ कुंज,अर्जुन नगर,
आगरा-282001
फोन-9927117788

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