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साहित्य

मृणाल पाण्डे की कथाकृति ‘हिमुली हीरामणि कथा’ का लोकार्पण

नई दिल्ली। हिमुली हीरामणि कथा की रचना युवाओं के लिए हुई है यदि इसे हज़ारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा को आगे ले जाने वाली कृति समझा जाता है तो यह मेरे लेखन का सम्मान है। सुप्रसिद्ध कथाकार और पत्रकार मृणाल पाण्डे ने मिरांडा हाऊस में अपनी सद्य प्रकाशित कथा कृति ‘हिमुली हीरामणि कथा’ के लोकार्पण एवं परिचर्चा के अवसर पर कहा कि यह नानी के घर और छठी के दूध के बीच की कथा है। पाण्डे ने परिहास भाव के लगातार विरल होते जाने को चिन्ताजनक बताते हुए कहा कि ऐसे दौर में मैंने बोलियों के बाल्यावस्था के साहित्य को पढ़ा और उस विरल होते परिहास भाव को इस कृति में समेटा है। उन्होंने कहा यह कहानी यथार्थ की कहानी है जिसकी भाषा दादी- नी की कहानियों वाली है।

नई दिल्ली। हिमुली हीरामणि कथा की रचना युवाओं के लिए हुई है यदि इसे हज़ारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा को आगे ले जाने वाली कृति समझा जाता है तो यह मेरे लेखन का सम्मान है। सुप्रसिद्ध कथाकार और पत्रकार मृणाल पाण्डे ने मिरांडा हाऊस में अपनी सद्य प्रकाशित कथा कृति ‘हिमुली हीरामणि कथा’ के लोकार्पण एवं परिचर्चा के अवसर पर कहा कि यह नानी के घर और छठी के दूध के बीच की कथा है। पाण्डे ने परिहास भाव के लगातार विरल होते जाने को चिन्ताजनक बताते हुए कहा कि ऐसे दौर में मैंने बोलियों के बाल्यावस्था के साहित्य को पढ़ा और उस विरल होते परिहास भाव को इस कृति में समेटा है। उन्होंने कहा यह कहानी यथार्थ की कहानी है जिसकी भाषा दादी- नी की कहानियों वाली है।

इससे पहले पुस्तक के लोकार्पण के बाद परिचर्चा प्रारम्भ करते हुए आलोचक वैभव सिंह ने कहा कि इस उपन्यास की संरचना में लोक कथा को पुनः गढ़ा गया है जिसमें लोककथा का मनोविज्ञान है तो वर्तमान राजनीति और विडम्बनाओं की गूँज भी। उन्होंने कहा आज के समय के सत्य को लोककथाओं के माध्यम से सुनाया गया है जिससे आस्थाओं का पुनर्स्थापना भी होती है। सुखांत की अनिवार्यता इस आस्था को जीवित बनाए रखती है। डॉ वैभव ने कहा कि इस देश में आधुनिकता की ब्लैक मार्केटिंग की गयी है और ग्रामीण अनपढ़ लोगों से उनकी परंपरा को छीना गया है। उन्होंने कहा कि हिमुली की कहानी को जेंडर डिस्कोर्स की कहानी के रूप में भी देखा जा सकता है वहीं कथा में राजसत्ता से मिले हुए नगर सेठों की खबर लेने को रोचक प्रसंग बताया।

परिचर्चा में चर्चित कवि कथाकार प्रियदर्शन ने कहा कि शब्द की सत्ता पिछले दशकों में टूटी है और तकनीक के दौर में साहित्यिक चुनौती से संघर्ष का लेखन हुआ है। उन्होंने कहा आधुनिकता के पार जाने के क्रम में हम पीछे जाते हैं तो ‌इस किताब को पढ़ते हुए यथार्थ की परिधि को तोड़ने वाले मनोहर श्याम जोशी, विजयदान देथा, की याद आ जाती है। प्रियदर्शन ने कहा यह लोककथा नहीं है, बल्कि उसके विन्यास में वर्तमान दीखता है। यहां नीरा राडिया, अम्बानी, रतन टाटा सब दिख जायेंगे। कृति की प्रशंसा में उन्होंने कहा कि हिंदी का रस ठेठ भाव में यहां मौजूद है। उन्होंने कहा कि कृति में सत्ता के गलियारों के प्रपंच फूटता है और यह स्त्री के दुखों और प्रतिरोध की कथा भी बन जाती है।

बाद में छात्राओं से हुए संवाद में यथार्थवाद पर सार्थक और लंबी बहस भी चली। बहस में मृणाल जी ने एक उत्तर में कहा बहुधा लेखन खेल की तरह लगता है, जिसमें उत्सुकता और भावुकता भरी होती है। उन्होंने इस कृति के लिए कहा कि ‌मैंने व्यंजनों की थाली पड़ोसी है, जो मन आये आप आस्वादन कर सकते हैं। आयोजन में राजपाल एंड संज़ की मीरा जौहरी ने इस कृति के प्रकाशन को अपने लिए गौरव की बात कहा। अंत में मिरांडा हाउस के हिंदी विभाग की रजनी सिसोदिया ने आभार व्यक्त किया।

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