Connect with us

Hi, what are you looking for?

सियासत

पाकिस्तान बॉर्डर के इतने नज़दीक अदानी ग्रुप द्वारा सौर उर्जा पार्क बनाना क्या बगैर सांठगांठ के संभव है?

सेना के अधिकारियों की आपत्ति भी अदाणी की इस परियोजना के लिए नजरअंदाज की गई। म्यांमार में भी सेना की सांठगांठ से अदाणी समूह ने बड़ी छीछालेदर कराई थी… पढ़ें

कल से “The Guardian” के अदाणी और पाकिस्तान पर एक ख़ुलासे के बाद से हंगामा मचा हुआ है। ख़बर है कि भारत पाकिस्तान सरहद गुजरात के 1 किलोमीटर के दरम्यान अदाणी का सोलर प्लांट लग रहा है.

खरबों का प्लांट पाकिस्तानी सरहद पर बग़ैर पाकिस्तानी सेटिंग के मुमकिन है क्या? एक तोप का गोला पूरे प्लांट को तबाह कर सकता है… इतना बड़ा ख़तरा अदाणी हवा में नहीं उठा रहा होगा..

याद कीजिए, म्यंमार के मिलेट्री के साथ अदाणी के रिश्तों की ख़बर भी वायरल हुई थी.. तब भी यहां-वहां हंगामा खूब हुआ, हुआ कुछ नहीं। क्या ये सब सेटिंग बग़ैर मुमकिन है?

बांग्लादेश, श्रीलंका, केन्या, ऑस्ट्रेलिया, हर जगह सेटिंग! सेटिंग करने वाला कौन है, उस नेता को सब जानते हैं। नीचे पढ़ें Guardian में रवि नायर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट क्या है-


सीमा सुरक्षा नियमों में ढील देकर अडानी समूह को दी गई ज़मीन

नई दिल्ली/गुजरात – केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार ने पाकिस्तान सीमा पर वर्षों से लागू राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढील देते हुए, अडानी समूह को दुनिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा पार्क के निर्माण की अनुमति दे दी है। ब्रिटिश अख़बार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना गुजरात के कच्छ के रण में पाकिस्तान सीमा से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात की भाजपा सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए उच्च स्तर पर पैरवी की, जबकि सैन्य अधिकारियों ने इस स्थान को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ जाहिर की थीं। बावजूद इसके, अप्रैल 2023 में रक्षा मंत्रालय ने नियमों में संशोधन कर दिया, जिससे 10 किलोमीटर की सुरक्षा सीमा के भीतर बड़े निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटा दी गई। इसके बाद, सरकारी स्वामित्व वाली भारतीय सौर ऊर्जा निगम से अडानी समूह को यह भूमि हस्तांतरित कर दी गई, जिससे इसकी क़ीमत कई गुना बढ़ गई।

सैन्य आपत्तियों को किया नज़रअंदाज

सैन्य अधिकारियों ने इस क्षेत्र में टैंकों की तैनाती और सुरक्षा निगरानी को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन परियोजना से जुड़े डेवलपर्स ने दावा किया कि सौर प्लेटफॉर्म दुश्मन के टैंकों की गतिविधियों से उत्पन्न खतरे को कम करने में मदद करेंगे। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह दावा संदिग्ध है क्योंकि सैन्य रणनीतिक दृष्टि से इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।

परियोजना और संभावित लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में शुरू की गई इस 445 वर्ग किलोमीटर की अक्षय ऊर्जा परियोजना से अधिकतम 30 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन की उम्मीद है, जो छोटे यूरोपीय देशों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन भूमि नियमों में बदलाव और इसे निजी कंपनी को हस्तांतरित करने को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

अमेरिका में रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप

अडानी समूह पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों में घिरा हुआ है। अमेरिकी न्याय विभाग ने अडानी और उनके सहयोगियों पर भारतीय अधिकारियों को 2,075 करोड़ रुपये (250 मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने का आरोप लगाया है, जिससे वे 16,600 करोड़ रुपये (2 बिलियन डॉलर) से अधिक का मुनाफा कमा सकते थे।

नवंबर 2024 में न्यूयॉर्क में दायर एक पांच-गिनती वाले आपराधिक अभियोग में, अडानी समूह पर विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम के उल्लंघन, प्रतिभूति धोखाधड़ी और न्याय में बाधा डालने की साजिश के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन का दीवानी मामला भी दायर किया है।

अडानी समूह ने आरोपों को किया खारिज

अडानी समूह ने द गार्जियन की रिपोर्ट को आधारहीन बताते हुए कहा कि खावड़ा परियोजना के लिए सभी आवश्यक अनुमतियाँ और सरकारी मंजूरी ली गई हैं। साथ ही, कंपनी ने अमेरिका में लगाए गए रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया है।

सरकार पर बढ़ा दबाव

इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर अडानी समूह को अनुचित लाभ पहुँचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस समेत कई दलों ने इस सौदे की गहन जाँच की मांग की है।

अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या अमेरिकी जांच का कोई असर इस विवादित परियोजना पर पड़ता है।


म्यांमार में अडानी समूह की संलिप्तता पर बड़ा खुलासा

काले घेरे में करण अदाणी और लाल घेरे में सेना प्रमुख जनरल मिन आंग हलिंग की तस्वीर

30 मार्च 2021 को आई एक नई रिपोर्ट में सामने आया कि अडानी पोर्ट्स ने म्यांमार की सैन्य स्वामित्व वाली कंपनी MEC को 52 मिलियन डॉलर का भुगतान किया, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में है। लीक दस्तावेज़ों से पता चला कि यह राशि यांगून में सैन्य-नियंत्रित ज़मीन पर कंटेनर पोर्ट के लिए चुकाई गई थी। 2019 में अडानी पोर्ट्स के सीईओ करण अडानी और म्यांमार सेना प्रमुख जनरल मिन आंग हलिंग की मुलाक़ात की तस्वीरें भी सामने आई थीं, जबकि जनरल पर पहले से ही मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप थे।

इस खुलासे के बाद मानवाधिकार संगठनों ने अडानी के निवेशकों से परियोजना से हटने की अपील कर दी थी, जिसके बाद एचएसबीसी, नॉर्जेस बैंक, ब्लैकरॉक, पीजीजीपी और टीआईएए जैसे प्रमुख निवेशकों से अडानी पोर्ट्स के साथ तुरंत संबंध तोड़ने का आह्वान किया था।

म्यांमार में अडानी समूह पर गंभीर आरोप

  1. 52 मिलियन डॉलर का भुगतान – अडानी पोर्ट्स ने म्यांमार की सैन्य स्वामित्व वाली कंपनी MEC को कंटेनर पोर्ट के लिए भारी राशि दी।
  2. लीक दस्तावेज़ों से खुलासा – रिपोर्ट में बताया गया कि अडानी पोर्ट्स की म्यांमार इकाई ने भूमि पट्टा और निकासी शुल्क के रूप में करोड़ों डॉलर चुकाए।
  3. जनरल मिन आंग हलिंग से संबंध – 2019 में करण अडानी और म्यांमार सेना प्रमुख के बीच बैठक और उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, जबकि जनरल पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे थे।
  4. मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया – संगठनों ने अडानी के निवेशकों से इस प्रोजेक्ट से हटने की अपील की, इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।
  5. अडानी समूह की सफाई – कंपनी ने आरोपों को निराधार बताया, कहा कि सभी आवश्यक अनुमतियाँ ली गईं और कोई नियम नहीं तोड़ा।
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन