अभिषेक श्रीवास्तव-
इन मैडम को शांति का नोबल मिला है क्योंकि ये अमेरिका के भरोसे अपने देश में तानाशाही खत्म कर के लोकतंत्र लाने की कोशिश कर रही हैं।

कैसे?
अपने देश के तेल उद्योग को निजीकरण के हवाले कर के। इससे एक तीर से दो शिकार होंगे। पहला, ट्रम्प जी वेनेजुएला के तेल में वाल स्ट्रीट का पैसा लगवाएंगे और सब संसाधन खरीद लेंगे। दूसरा, मदूरो का तख्तापलट करवाएंगे।
यानि, तुम मुझे लोकतंत्र दो, मैं तुम्हें तेल दूँगी। क्या नोबल खयाल है! धूम Machado धूम Machado धूम!
यहां मचाडो मैडम के बारे में विस्तार से जानिए। मैडम करीब साल भर से अमेरिका में रह रही हैं और स्पेनिश भाषा में कोई 42000 ट्वीट कर चुकी हैं। मेरी जानकारी में अपने बीच इस भाषा को P Kumar Mangalam जानते हैं, वे पढ़ के इसकी पुष्टि करेंगे कि मैडम CIA की एसेट हैं या नहीं। बहरहाल, उनकी पार्टी vente venezuela यानी ‘वेनेजुएला आओ’ (तेल खरीदने वालों) को USAID और नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी से काफी पैसा मिला है। वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने उनके ऊपर इसलिए प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि उन्होंने अपने देश में तख्तापलट करने के लिए इजरायल और अमेरिका के नेताओं से कहा था।
आज से पंद्रह साल पहले CIA के रास्ते दुनिया भर में जो केजरीवाल नामक परिघटना अरब स्प्रिंग, ऑक्युपाई वॉल स्ट्रीट और पिंक इंकलाब की अलग अलग शक्ल में शुरू हुई थी, मचाडो मैडम उसी की फसल हैं। मैडम ने भी सन 2002 में केजरीवाल की तरह एक एनजीओ Sumate बनाकर सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता का नारा देकर प्रवेश किया था। आप चाहें तो मैडम की पार्टी का एक डॉक्यूमेंट गूगल से निकाल के पढ़ सकते हैं जिसमें उनकी घोषित विचारधारा है कि वे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों की समर्थक हैं। मतलब? वही, केजरीवाल टाइप, न दाएं न बाएं। जहां से तेल निकले वहां जाएं।
मैडम की आपराधिक खुराफातें पढ़ने के लिए इसको भी पढ़ा जाए:
https://orinocotribune.com/maria-corina-machados-lengthy-criminal-record/
नोबेल कमेटी का क्या, वो तो पहले ही किसिंजर और ओबामा जैसे युद्ध अपराधियों को नवाज चुकी है। उसके मुकाबले मचाडो मैडम ठीक ही हैं। पहले बाहर के हमलावरों को इनाम मिलता था, अब भीतर के जयचंदों को मिल रहा है जो स्वदेशी क्रांतियों की बची खुची विरासत को लोकतंत्र के नाम पर मिटाने में जुटे हैं। मैडम जी को नोबेल सिमोन बोलिवर की इंकलाबी विरासत के ताबूत में आखिरी कील है।
सौमित्र रॉय-
वेनेजुएला की नेता प्रतिपक्ष मारिया कोरीना को शांति का नोबेल, दरअसल गांधीवाद की बड़ी जीत है। मारिया ने अपने देश को तानाशाही के चंगुल से निकालकर लोकतंत्र में बदल दिया। बिना किसी हिंसा के।
उन्होंने देश के हरेक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों को मुकम्मल किया है। मारिया गांधीजी की कट्टर अनुयायी रही है। मारिया को नोबेल असल में गांधीवाद को सम्मान है।
अब सुनिए वेनेजुएला और नोबेल की कहानी– मारियो कोरीना मचादो, यही नाम है साल 2025 की नोबेल पुरस्कार विजेता का, जिसने दुनिया के ताकतवर आतंकी देश अमेरिका के राष्ट्रपति को मात दी।

वही अमेरिका, जिसने मारियो के देश वेनेजुएला को घेरा हुआ है।
ट्रंप वहां सत्ता बदलना चाहता है। और मारियो ने वहां लोगों की लोकतंत्र तक पहुंच बना दी।
बिना किसी सेना या हिंसा के। मारियो को नोबेल अमेरिका के गाल पर करारा तमाचा है। बिना हिंसा, सेना या किसी बाहरी देश के दखल से।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने मारियो पर न जाने कितने जुल्म ढाए। वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने भी मारियो को देशद्रोही कहा, क्योंकि वह तानाशाही पर सवाल उठा रही थीं। आज राहुल गांधी बिल्कुल मारियो के मुकाम पर खड़े हैं। और आरएसएस की नींद हराम है।
अशोक कुमार पांडेय-
अमरीका के राष्ट्रपति को तो नोबल नहीं मिला लेकिन वेनेजुएला में अमरीकी हितों के लिए काम करने वाली विपक्षी नेता María Corina Machado को नोबल मिल गया है शांति के लिए।
ह्यूगो शावेज से लेकर निकोलाई मादुरो तक अमरीकी आँखों को लगातार चुभने वाले नेताओं के समक्ष मारिया ने लगातार विपक्ष का प्रतिनिधित्व किया है। उसे इजरायल का खुला समर्थन है और उसने अपने देश पर हमले के लिए नेतनयाहू को खत लिखे हैं।
ट्रम्प दुखी होंगे लेकिन अमरीकी डीप स्टेट खुश होगा।

वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना को नोबेल विश्व शांति पुरस्कार एक बड़ा संदेश है. वेनेजुएला के तानाशाह राष्ट्रपति निकोलस मदुरो का गोदी मीडिया मारिया को बदनाम करने के रोज़ शो चलाता है. तानाशाह ने उनकी संसद सदस्यता रद्द करावा दी. उनके पीछे एजेंसियां लगा दी, दर्जनों केस लाद दिये. वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो सरकार ने कहा. उन्हे देश द्रोही बताया गया. कहानी कुछ सुनी सुनी से लगती है. -प्रशांत टंडन
राजीव नयन बहुगुणा-
गाँधी नाम सत्य है गोविन्द नाम सत्य है! सुनो गाँधी द्रोहियो ! इस विश्व का हर सभ्य, सुसंस्कृत तथा लोक तंत्र कामी मनुष्य जगद गुरु महात्मा गाँधी के पथ का अनुगामी है. अल्बर्ट आइंस्टिन से लेकर मरिया कोरिना तक दर्ज़नो नोबल विजेताओं के वह आराध्य हैँ. गाँधी का जप, सुमिरन तथा नाम संकीर्तन मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाता है.
उन्होंने पूरे विश्व के लिए शांति, अहिंसा तथा स्वाधीनता के पट खोले. ईश्वर प्रदत्त अपना दायित्व निभाया, और प्रपूर्ण जीवन से अधिक भव्य मृत्यु का मंचन कर जीसस क्राइस्ट के समतुल्य सिद्ध हुए.
जब उन्हें नोबल पुरष्कार देने का प्रश्न जूरी में आया, तो उस निर्णायक मंडल के अध्यक्ष अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए, और कहा, हम गाँधी को जीसस के समकक्ष मानते हैँ.
हम जीसस को नोबल देने की धृष्टता कर सकते हैँ?
ऐ अभागे गोडसे पूजक!
देव दूत गाँधी करुणा के अवतार हैँ.
तेरे सारे संचित पाप निवाड़ देंगे .
तू उनकी शरण गह, और अपना जन्म सफल कर ले.


