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जानिए क्या है CBSE का OSM टेंडर घोटाला, जिसे 17 साल के सार्थक ने बेनकाब किया!

Two men in white shirts shake hands in a living room, with a Gandhi portrait on the wall behind them.

डॉ विजेंद्र सिंह-

करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़? जानिए क्या है CBSE का OSM टेंडर घोटाला, जिसे 17 साल के सार्थक ने बेनकाब किया!

आजकल हर तरफ 17 साल के युवा व्हिसलब्लोअर सार्थक सिद्धांत और राहुल गांधी जी की मुलाकात की चर्चा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सार्थक ने सीबीएसई (CBSE) की किस बड़ी गड़बड़ी को उजागर किया है?

अगर आपके घर में भी कोई बच्चा पढ़ रहा है, तो इसे बहुत आसान भाषा में समझिए:

क्या है पूरा मामला?

CBSE बोर्ड की कॉपियों को कंप्यूटर पर चेक (On-Screen Marking – OSM) करवाने के लिए एक बाहर की कंपनी को टेंडर (ठेका) दे रहा था। इस पूरे प्रोसेस में पारदर्शिता ताक पर रखकर एक ऐसी कंपनी को फायदा पहुँचाया गया, जिसका ट्रैक रिकॉर्ड बेहद डरावना है। सार्थक सिद्धांत ने सरकारी दस्तावेजों को खंगालकर जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं:

दागी कंपनी को एंट्री देने के लिए बदले नियम: पहले नियम था कि जो कंपनी ‘पहले कभी ब्लैकलिस्ट’ हुई हो, वो टेंडर में भाग नहीं ले सकती। लेकिन Coempt EduTeck (पुराना नाम Globarena) को ठेका देने के लिए नियम बदलकर कर दिया गया कि ‘बस वर्तमान में ब्लैकलिस्ट नहीं होनी चाहिए’।

यह कंपनी पहले भी दे चुकी है गहरा जख्म: साल 2019 में इसी कंपनी की तकनीकी लापरवाही के कारण तेलंगाना में 3.8 लाख छात्र फेल हो गए थे और कई मासूमों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया था। इतनी बदनाम कंपनी को CBSE देश के करोड़ों बच्चों का भविष्य सौंपने जा रही थी!

सज़ा के नियम ही हटा दिए: अगर कंपनी कॉपियां जांचने में कोई बड़ी गलती करती है, तो उसे हटाने या ब्लैकलिस्ट करने के जो कड़े नियम थे, उन्हें नए टेंडर से चुपके से गायब कर दिया गया। यानी कंपनी चाहे जैसी मर्जी गलती करे, उसकी कोई जवाबदेही नहीं होगी।

सार्थक का साहस और हमारा समर्थन:

एक तरफ देश का शिक्षा मंत्रालय बड़े-बड़े दावे करता है, और दूसरी तरफ एक 17 साल का छात्र आकर पूरे सिस्टम की पोल खोल देता है। आज सार्थक ने इस पूरे घोटाले की रिपोर्ट पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने भी रखी है।

यह सिर्फ एक टेंडर का मामला नहीं है, यह हमारे बच्चों के भविष्य, उनके अंकों और उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) होनी ही चाहिए।

सार्थक सिद्धांत के इस साहस को सलाम! देश के युवाओं को ऐसे ही जागरूक होने की ज़रूरत है।

मूल खबर…

CBSE टेंडर में बदलावों की पड़ताल: छात्र सार्थक सिद्धांत ने खोली नियमों के संशोधन की परतें

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