
अनिल कुमार-
गन्ना राज्यमंत्री कैसा है, बगैर पूंछ का भैंसा है! इस नारे को सुनने के बाद लगा कि किसान यूनियन वाले बड़े क्रियेटिव किसान हैं. पीलीभीत में तमाम समस्याओं को लेकर किसान यूनियन ने मार्च टाइप का निकाला और स्थानीय विधायक एवं गन्ना राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार के खिलाफ नारे लगाये.
उन्होंने कई और नारे लगाये, लेकिन मजेदार तो भैंसा वाला ही लगा. मैंने इस नारे के आधार पर निष्कर्ष निकालने की कोशिश की कि बिना पूंछ से क्या आशय हो सकता है, लेकिन हमारी समझ में नहीं आया. आप बता सकते हैं क्या?
अब जानिये पूरी खबर
उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार के गृह जनपद पीलीभीत से बड़ी खबर है। गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली व बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर भड़के किसानों ने जिला मुख्यालय पर रैली निकालने के दौरान मंत्री के जनसंपर्क कार्यालय के सामने काफिला रोककर जबरदस्त प्रदर्शन किया। मुर्दाबाद के नारे लगाए। नारों के माध्यम से चूड़ी पहनने को कहा। एक नहीं अनगिनत अनाप-शनाप अभद्र नारे लगाकर गन्ना राज्य मंत्री की जमकर छीछालेदर की। सवाल उठाया कि मंत्री बताएं, कहां से आया चीनी मिल लगाने के लिए उनके पास पैसा ?
भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) की जिला मुख्यालय पर मंडी समिति से रैली शुरू हुई। टनकपुर मार्ग पर उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार के जनसंपर्क कार्यालय के सामने जैसे ही रैली पहुंची, तभी आंदोलनकारी ने काफिला रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाकर आक्रोश का इजहार किया। यह पहला मौका है, जब किसी संगठन ने मंत्री के कार्यालय के सामने विरोध की हिमाकत की है।
भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट)के जिलाध्यक्ष भजनलाल क्रोधी के नेतृत्व में किसानों ने करीब आधा घंटा तक काफिला रोककर गन्ना मंत्री पर सीधे निशाना साधते हुए आरोपों की बौछार कर दी। किसानों ने माइक पर चिल्ला चिल्ला कर कहा कि वह (मंत्री) किसानों की बदौलत ही विधायक बने और आज गन्ना राज्य मंत्री हैं।
किसानों ने माइक पर भाषण देकर आरोप लगाया कि जिन्हें उन्होंने विधायक और मंत्री तक बनाया, वही आज किसानों के खून–पसीने पर अरबों की संपत्ति खड़ी कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि मंत्री ने “किसानों की गन्ना कीमत रोककर अपनी निजी मिलें तैयार कर लीं।” प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई और आईबी जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि “इतना पैसा आया कहां से, यह सब जानते है कि पहले इनकी स्थिति क्या थी और आज चीनी मिल के मालिक कैसे बन बैठे ? ” किसानों ने आरोप लगाया कि राज्यभर की गन्ना मिलों में करोड़ों की गड़बड़ियों की जिम्मेदारी भी मंत्री पर ही बनती है। उन्होंने कहा कि किसानों का भुगतान महीनों से लटका है, जबकि मंत्री अपनी सुविधाओं का विस्तार कराने में लगे हैं। प्रदर्शनकारियों ने ललौरीखेड़ा क्षेत्र की टूटी पुलिया का मुद्दा भी उठाया, जिसे कई बार लिखित शिकायत के बावजूद अब तक नहीं बनवाया गया। किसानों का कहना है कि “किसानों की बुनियादी मांगों को नज़रअंदाज़ कर मंत्री अपनी मिल खड़ी करने में व्यस्त रहे।” किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बकाया भुगतान, पुलिया निर्माण और चीनी मिलों की जांच नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
कलेक्ट्रेट तक पहुंचकर भाकियू ने नौ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन डीएम को दिया। ज्ञापन में किसानों ने कहा कि पिछले गन्ना भुगतान को ब्याज सहित दिलाया जाए और आगे भुगतान 15 दिन के भीतर सुनिश्चित हो। खड़ी तौल बंद कराकर प्लांट पर गन्ने की तौल कराई जाए तथा सभी चीनी मिलों में मान्यता प्राप्त धर्मकांटे स्थापित किए जाएं, ताकि घटतौली पर रोक लगे।
ज्ञापन में गन्ने के रकबे के अनुसार किसानों को मैली उपलब्ध कराने, गन्ना सेंटरों पर इंचार्ज द्वारा हो रही अवैध वसूली की जांच कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई। किसानों ने आरोप लगाया कि बीसलपुर और पूरनपुर क्षेत्रों के कई क्रय केंद्र किसानों के साथ बेईमानी और धोखाधड़ी कर रहे हैं। ऐसे केंद्र संचालकों को चिन्हित कर जांच कराई जाए और दोषियों को बर्खास्त किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री के जनसंपर्क कार्यालय के सामने टनकपुर मार्ग पर सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान किसानों के गंभीर आरोपों को लेकर जब मंत्री संजय सिंह गंगवार से संपर्क किया गया तो उनके फोन पर घंटी जाती रही। उनके जनसंपर्क कार्यालय ने भी भारतीय किसान यूनियन के गंभीर आरोपों पर कोई पक्ष नहीं रखा।
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