लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति, जिसे प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सबसे पुरानी और प्रभावशाली संस्था माना जाता है, इन दिनों गंभीर संगठनात्मक संकट से गुजर रही है। करीब एक हजार राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली इस समिति के निर्वाचित अध्यक्ष हेमंत तिवारी हैं, जो लगातार चौथी बार इस पद पर चुने गए हैं। लेकिन पत्रकारों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर संगठन की यह स्थिति बनी कैसे और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
पत्रकारों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि समिति का नेतृत्व लंबे समय से पत्रकारों के वास्तविक मुद्दों से दूर हो गया है। आरोप है कि अध्यक्ष हेमंत तिवारी सार्वजनिक कार्यक्रमों, सम्मान समारोहों और विभिन्न आयोजनों में सक्रिय तो दिखाई देते हैं, लेकिन पत्रकारों की समस्याओं, संगठन की मजबूती और संवाददाता समिति की गरिमा को बचाने के लिए अपेक्षित पहल नहीं कर रहे हैं।
इसी नेतृत्व शून्यता का परिणाम बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति के नाम पर कई समानांतर संगठन और समितियां अस्तित्व में आ गईं। किसी ने खुद को असली समिति बताया तो किसी ने पुनर्गठित समिति का दावा किया। नतीजा यह हुआ कि पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग भ्रम और गुटबाजी के बीच फंस गया।
स्थिति अब केवल संगठनात्मक मतभेद तक सीमित नहीं रह गई है। विभिन्न गुटों के बीच सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और प्रेस कक्षों में एक-दूसरे की मान्यता, पत्रकारिता के अनुभव और संगठन में वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हाल ही में इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के उपाध्यक्ष केके सिंह ने शेखर पंडित को एक लंबा कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस नोटिस में शेखर पंडित पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनके पत्रकार होने, मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया, विभिन्न संगठनों और कथित समूहों से संबंधों को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। यहां तक कि उनकी पेशेवर पृष्ठभूमि और राज्य मुख्यालय की मान्यता की वैधता तक पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं।
दूसरी तरफ प्रभात त्रिपाठी और उनके समर्थक भी इन आरोपों को राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिशोध का हिस्सा बताते रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच आरोपों का स्तर लगातार तीखा होता जा रहा है। चर्चा यहां तक पहुंच गई है कि विभिन्न पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमेबाजी की तैयारी में जुटे हैं।
पत्रकारों का कहना है कि सबसे दुखद पहलू यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में पत्रकार हित पूरी तरह पीछे छूट गए हैं। एनेक्सी, लोकभवन और विधानसभा के प्रेस कक्ष, जहां पत्रकारों के पेशेगत मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, वहां अब संगठनात्मक खेमेबाजी और नेतागीरी की चर्चाएं अधिक सुनाई देती हैं।
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि यदि हेमंत तिवारी के नेतृत्व वाली मूल संवाददाता समिति समय रहते सक्रिय रहती, नियमित संवाद करती और संगठन को मजबूत बनाए रखती, तो शायद समिति के नाम पर इतने समानांतर संगठन खड़े नहीं होते। उनका तर्क है कि जब मूल संस्था कमजोर होती है तो उसकी जगह लेने के लिए कई दावेदार पैदा हो जाते हैं और फिर वैधता की लड़ाई शुरू हो जाती है।
आलोचकों का कहना है कि आज हालत यह है कि पत्रकारों के हितों की लड़ाई लड़ने के बजाय विभिन्न गुट अध्यक्ष, पदाधिकारी और संगठन की वैधता साबित करने में जुटे हैं। कोई किसी की मान्यता को फर्जी बता रहा है तो कोई किसी के पत्रकार होने पर ही सवाल उठा रहा है। इससे पत्रकारिता जगत की सार्वजनिक छवि भी प्रभावित हो रही है।
प्रदेश के अनेक मान्यता प्राप्त पत्रकार अब यह मांग कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति को फिर से सक्रिय किया जाए और निर्वाचित नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे। उनका कहना है कि समिति का उद्देश्य पत्रकारों के अधिकारों, सुविधाओं, सुरक्षा और पेशेगत हितों की रक्षा करना है, न कि उसे अंतहीन गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बनने देना।
फिलहाल सवाल यही है कि क्या हेमंत तिवारी इस बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक अव्यवस्था पर कोई पहल करेंगे या फिर संवाददाता समिति के नाम पर चल रही यह खींचतान आगे और गहराती जाएगी।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित “हिंदी सेवा सम्मान समारोह” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक, कौशल विकास मंत्री श्री मंगल प्रभात लोढ़ा, प्रो. राम मोहन पाठक, श्री अमित साटम, श्री राजहंस सिंह, श्री मुरजी पटेल, श्री संजय उपाध्याय, श्री संजय पांडे, आचार्य पवन त्रिपाठी, डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह, श्री संतोष आरएन सिंह, श्री ज्ञानप्रकाश सिंह सहित अनेक सम्मानित अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई और हम सभी का उत्साहवर्धन किया।
समारोह में हिंदी भाषा, पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बड़े भाई, यूपी मंत्रालय मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ के अध्यक्ष श्री हेमंत तिवारी, श्री विनीत सिंह, श्री गंगाधर ढोबले, श्री अवधेश व्यास, श्रीमती कुमुद संघवी चावरे तथा लोकगायक श्री सुरेश शुक्ल को “हिंदी सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया। इन सभी विभूतियों का सम्मान वास्तव में हिंदी भाषा, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित भावनाओं का सम्मान है।
मैं हमारे अध्यक्ष श्री आदित्य दुबे जी, महासचिव श्री विजय सिंह कौशिक जी, कोषाध्यक्ष श्री सुरेंद्र मिश्रा जी, उपाध्यक्ष श्री राजकुमार सिंह जी, श्री हरिगोबिन्द जी तथा कार्यकारिणी के सभी सम्मानित सदस्यों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।
साथ ही उन सभी पत्रकार मित्रों का आभार जिन्होंने आयोजन की सफलता में मेहनत किया।
शैलेश तिवारी
सदस्य : मुंबई हिंदी पत्रकार संघ



