संजय कुमार सिंह
आज जब हिन्दी के मेरे तीन में से दो अखबारों, अमर उजाला और नवोदय टाइम्स में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन की खबरें हैं तो अंग्रेजी के हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू की खबर भी लगभग यही है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह लीड नहीं, लेकिन दि एशियन एज में भी यही खबर लीड है। शीर्षक थोड़े अलग हैं लेकिन बांग्लादेश उच्चायोग पर उग्र प्रदर्शन हो कैसे पाया? सरकार के खिलाफ जब प्रदर्शन नहीं हो पाते हैं, बर्बर तरीके से रोक दिए जाते हैं तो बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन वह भी दिल्ली में ही नहीं, कोलकाता में भी हो तो खबर खास है ही भले उसका खुलासा नहीं है। आज के अखबारों में एक खबर उन्नाव बलात्कार में सजा काट रहे भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने और जमानत मिलने की भी है। इसके खिलाप पीड़िता ने अपनी मां और महिला एक्टिविस्ट योगिता भयाना के साथ मंगलवार देर शाम इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। खबर यह भी है, …. हालांकि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए बैठी पीड़िता और अन्य प्रदर्शनकारियों को कुछ देर बाद ही इंडिया गेट से हटा दिया। ऐसे में बांग्लादेश दूतावास पर प्रदर्शन सिर्फ खबर नहीं राजनीति भी है। आप जानते हैं कि राहुल गांधी विदेश में थे और सोशल मीडिया पर विदेश में भारत को बदनाम करने की बड़ी चिन्ता है लेकिन बांग्लादेश में जो हो रहा है उसके लिए दिल्ली में प्रदर्शन वह भी सांप्रदायिक आधार पर और उससे पहले मोहन भागवत का बयान, आरएसएस और दूसरे सहयोगी दलों की भूमिका ने देश भर में जो कर रखा है उसका काफी हिस्सा द टेलीग्राफ ने अपने पहले पन्ने पर पेश किया है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड आज इस लिहाज से अलग है। दिल्ली के पास दादरी में 2015 में अखलाख की हत्या के मामले में आरोपों को खत्म करने की उत्तर प्रदेश सरकार की अपील को अदालत ने नहीं माना। ऐसे समय में सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस ने अरावली के मामले में सरकारी कारनामे को उजागर किया है जिसका बचाव सुप्रीम कोर्ट के फैसले के रूप में किया जा रहा है। देशबन्धु की लीड सबसे अलग है, मध्य प्रदेश में 42.74 लाख नाम हटाए गये। उपशीर्षक है, चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश, केरल, छत्तीसगढ़ में एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की। सेकंड लीड है, जर्मनी दौरे में बोले राहुल गांधी – सीबीआई, ईडी बनी राजनीतिक हथियार। यह खबर सरकार को पसंद नहीं आनी है और प्रचारक इसका विरोध भी कर रहे हैं इसलिए इस खबर को तो महत्व नहीं ही मिला है दि एशियन एज की एक खबर का शीर्षक है, बर्लिन में वोट चोरी पर राहुल गांधी के भाषण से भारत में हंगामा। हालांकि इस हंगामे की खबर दूसरे अखबारों में इतनी प्रमुखता से नहीं है। देश में अदालत, सरकार और भाजपा से संबंधित आज एक और खबर है। इसे नवोदय टाइम्स और द टेलीग्राफ ने पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापा है। खबर है, अवयस्क बालिका से बलात्कार के आरोप में जेल में बंद बर्खास्त भाजपा नेता को जमानत मिली। बांग्लादेश दूतावास पर प्रदर्शन की खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में फूहड़ भाजपाई शैली में नहीं है कि कोई सवाल करे। यहां शीर्षक है – राजदूतों को बुलाया गया, दिल्ली, ढाका ने एक दूसरे से विरोध जताया। इमरजेंसी के जमाने में खबरें सेंसर होकर छपती थीं और इंडियन एक्सप्रेस सेंसर की हुई खबरों की जगह खाली छोड़ देता था। अघोषित इमरजेंसी में खबरें छपती ही नहीं हैं जो छपती हैं वह प्रचार होता है या फिर भर्ती का माल। आज जब ज्यादातर अखबारों में बांग्लादेश उच्चायोग के घेराव की खबर लीड है तब इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के 100 मीटर अरावली नियम मान लिया, उसके अपने पैनल ने इसका विरोध किया था।
इससे पहले इंडियन एक्सप्रेस ने 22 दिसंबर के अंक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव का बयान छापा था। इसका शीर्षक था, विरोध का सामना कर रहे मंत्री ने दावा किया कि अरावली में खनन के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। नई दिल्ली डेटलाइन से निखिल घाणेकर ने इस खबर में लिखा था, अरावली पहाड़ियों की एक नई और समान परिभाषा को लेकर विरोध और आलोचना का सामना कर रहे केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि इससे इस रेंज में खनन के लिए कोई छूट नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के नेतृत्व वाले पैनल की सिफारिशों के आधार पर इसे स्वीकार कर लिया था। इसके लिए केंद्र सरकार ने जो सब किया वह अलग खबर है लेकिन दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने नियमों में साधारण परिवर्तन किया तो यह मान लिया गया कि उससे राजस्व का नुकसान होगा, अपने लाभ के लिए किया है और उसकी जांच हुई, सरकार को परेशान किया गया और घटिया राजनीति की गई। केंद्र सरकार या नरेन्द्र मोदी की सरकार के किए का बचाव करते हुए सुंदरबन में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा, “पूरी अरावली रेंज 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर है और इसमें से केवल दो प्रतिशत में ही खनन किया जा सकता है और वह भी कुछ स्टडी के बाद ही। गौरतलब है कि दो प्रतिशत में भी खनन की इजाजत क्यों दी जाए और दी गई है तो क्या किसी को लाभ हुआ है। खासकर चुनावी चंदे का 82 प्रतिशत जब भाजपा को मिल रहा है और कांग्रेस को मिलने वाला चंदा आधा हो गया है। इसकी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश का है और चूंकि सरकार ने ऐसा आदेश करवाया है और उसकी आलोचना हो रही है तो सरकार अपने आदेश का बचाव कर रही है जबकि आम मामलों में और मुख्यमंत्रियों को पहली बार गिरफ्तार किए जाने के मामले में कहा गया था कि अदालत का आदेश है और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के लिए केजरीवाल को जमानत दी तो उसपर टीका-टिप्पणी की ही गई थी। यह सब अखबारों की खबर का भाग नहीं हो सकता है और इसीलिए मैं यहां यह सब लिखकर अघोषित इमरजेंसी की याद दिलाता रहता हूं।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एक सस्टेनेबल माइनिंग प्लान तैयार किया जाना चाहिए जैसा कि सारंडा, झारखंड में किया गया है और उसके बाद ही (खनन के लिए) अनुमति दी जाएगी। सुनने में यह अच्छा लगता है लेकिन हुआ यह है कि पहले जहां खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती थी वहां अब दी जा सकेगी। इससे किसे क्या लाभ होगा और क्या वह मुफ्त में होगा और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह नहीं है। खासकर तब जब भाजपा के जो प्रचारक पहले दिल्ली में प्रदूषण के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदार ठहराते थे और हाल में दिल्ली के भाजपाई पर्यावरण मंत्री ने भी आम आदमी को ही जिम्मेदार ठहराया है तब रजत शर्मा ने कहा है कि प्रदूषण का कारण यह (भी) है कि दिल्ली तीन तरफ से अरावली की पहाड़ियों से घिरी हुई है। इस स्थिति में टेलीविजन मीडिया ईश्वर अल्लाह के अस्तित्व पर बहस करा रहा है। अखबारों में बांग्लादेश के उच्चायोग पर प्रदर्शन की खबर है लेकिन अरावली का मामला खबर नहीं है क्योंकि सरकार चाहती है कि उसे सेंसर कर दिया जाए और आज की मीडिया ने कर भी दिया है। यह इस सरकार की कार्यशैली है और मीडिया को ही नहीं, तमाम शक्तियों और सत्ताओं को नियंत्रण में कर लिए जाने की खबरों के बीच देश की असली स्थिति आज द टेलीग्राफ ने बताई है और शीर्षक है, हिन्दुस्तान का चेहरा। (जारी)
आगे पढ़ें – देश में आग लगाने की कोशिशों पर रेत में सिर छिपाए शुतुर्मुर्ग और हाथ सेंकते मीडिया वाले।
लिंक यह रहा – https://www.bhadas4media.com/aag-lagane-ki-koshishon-par-ret-mein-muh-chhipaye/
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