10 जून को यह खबर आई, 12 जून को आग लग गई, चुनाव आयोग ने नहीं बताया है कि जली हुई मशीनें कहां की हैं। चुनाव आयोग चुनावी डेटा सिर्फ 45 दिन ‘सुरक्षित’ रखता है। यहां उससे पहले ही आग लग गई।
संजय कुमार सिंह
देशबन्धु की एक खबर के अनुसार, कलकत्ता की एक सरकारी बिल्डिंग में भीषण आग लगने से 4000 ईवीएम जलकर खाक हो गए। राज्य में नई बनी भाजपा सरकार के अग्निशमन मंत्री ने इसमें साजिश की आशंका जताई है लेकिन दिल्ली के अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। आज छपी खबरों से मामले को समझना मुश्किल है। चुनाव आयोग ने नहीं बताया है कि असल में किसी मशीनें जलीं, कहां की थीं और कितने वोट का मामला खाक हो गया। आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी के ढेरों आरोप हैं। एसआईआर, ट्रिब्यूनल और फिर लाखों लोगों के वोट नहीं दे पाने के अजूबे तो सर्वविदित है। खबर आ रही थी कि मतदाता अपने वोट का हिसाब मांग रहे थे। उदाहरण के लिए किसी बूथ पर तृणमूल को पांच ही वोट मिले हैं और ज्यादा लोग पूछें कि मेरे वोट कहां गए तो स्थिति गंभीर होगी। खबरों से लग कलकत्ता में ऐसा चल रहा था। दूसरी ओर, तृणमूल की हार के बाद उसके नेताओं पर हमले, छापे आदि से डराने की कोशिशें चल रही हैं। तृणमूल संसदीय दल के टूटने का इंतजार चल रहा है। ऐसे समय में ईवीएम जहां रखी थीं वहां आग लगना और 4000 का जल जाना मायने रखता है। खबर के अनुसार, कोलकाता के अलीपुरद्वार इलाके में एक बिल्डिंग में आग लगने से 4000 ईवीएम जल गई हैं। आग लगने के बाद लगभग 24 घंटे तक फायर सर्विस के कर्मचारी आग बुझाने में लगे रहे। शुभेंदु अधिकारी सरकार में मंत्री कौशिक चौधरी ने इस हादसे पर शक जताया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसपर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा- सरकार और चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि आग कैसे लगी और ऊपरी मंजिलों तक कैसे पहुंची। आम आदमी पार्टी (आप) का भी कहना है कि एक सरकारी बिल्डिंग में इतनी बड़ी आग कैसे लगी और हजारों ईवीएम इसकी चपेट में कैसे आ गईं।
आज यह खबर मेरे दस अखबारों में सिर्फ तीन में पहले पन्ने पर है। हिन्दी अखबारों में देशबन्धु के साथ यह नवोदय टाइम्स में है जबकि अंग्रेजी अखबारों में सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर है। यहां शीर्षक और ‘गंभीर’ है। इससे यह भी पता नहीं चलता है कि ईवीएम जली है या नहीं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का शीर्षक है, कलकत्ता की सरकारी बिल्डिंग में लगी आग से ईवीएम क्षतिग्रस्त हो गए होंगे। नवोदय टाइम्स के शीर्षक में ही है, कोलकाता में सरकारी भवन में आग, 4000 ईवीएम राख। इसमें कहा गया है, ….राज्य सरकार ने मामले की जांच शुरू कराई है। तोड़-फोड़ या साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री कौशिक चौधरी ने कहा कि आग की प्रकृति कई सवाल खड़े कर रही है। उनके अनुसार, आग सबसे पहले भवन की दूसरी और तीसरी मंजिल पर देखी गई थी, लेकिन बाद में यह रहस्यमय तरीके से नौवीं और दसवीं मंजिल तक पहुंच गई। हैरानी की बात यह रही कि आग चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल को प्रभावित किए बिना ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई। “हम यह जांच कर रहे हैं कि कहीं इसके पीछे कोई तोड़फोड़ या साजिश तो नहीं है।” हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि नष्ट हुई मशीनें किन चुनावों में इस्तेमाल हुई थीं और उनकी स्थिति क्या थी। इस हिसाब से टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का हाइलाइट किया अंश है, विशेष टीम जांच करेगी। इसके तीन प्रमुख बिन्दु हैं
➤ 10वीं मंज़िल पर रखी 3,000 ईवीएम का इस्तेमाल कस्बा, जादवपुर, बेहला ईस्ट और अन्य जगहों के पोलिंग बूथ पर किया गया था
➤ अगर 45 दिनों के अंदर याचिका दायर की जाती है, तो केस के निपटारे तक ईवीएम यूनिट्स को संभालकर रखा जाता है; अधिकारी का कहना है कि नुकसान से स्थिति जटिल हो सकती है
➤ नुकसान का दायरा अभी पता नहीं है; सरकार ने जांच के लिए SIT बनाई है
जाहिर है, मामला गंभीर है फिर भी अखबारों में खबर पहले पन्ने पर नहीं है। अमर उजाला में यह खबर तो नहीं है लेकिन चार कॉलम के बॉटम का शीर्षक है, “नीट : पनर्परीक्षा निष्पक्ष तरीके से होगी बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा”। उपशीर्षक है, “कैबिनेट सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की, कहा – केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर काम कर रहे हैं”। यह अखबारों की प्राथमिकता है और पाठकों को अमूमन पता होता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर से भी मामले की गंभीरता मालूम होती है। खबर इस प्रकार है, कोलकाता के अलीपुर में 10 मंज़िला ‘न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग’ की कई मंज़िलें बुधवार को आग लगने से बुरी तरह जल गईं। चुनाव आयोग को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि आग में कुछ ईवीएम खराब हो सकती हैं। इस रिपोर्ट के बाद बंगाल सरकार ने शुक्रवार को चार सदस्यों वाली एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग की 10वीं मंज़िल पर बने स्ट्रॉन्ग रूम में करीब 3,000 ईवीएम रखी हुई थीं। अधिकारी ने कहा, “शुरुआती रिपोर्ट में जिलाधिकारी ने बताया है कि कुछ ईवीएम खराब हो सकती हैं, लेकिन नुकसान कितना हुआ है, इसका पता अभी नहीं चल पाया है।” एसीपी की अगुआई में एसआईटी जांच का एलान तब किया गया जब फोरेंसिक टीम ने अहम सबूत इकट्ठा किए। ये सबूत खासकर तीसरी और चौथी मंज़िल (जहाँ आग शुरू हुई थी) और नौवीं व 10वीं मंज़िल (जहाँ पहली आग पर काबू पाने के करीब एक घंटे बाद फिर से आग लगने की खबर मिली थी) से जुटाए गए।
भास्कर डॉट कॉम के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस ने एक्स पर आग का वीडियो शेयर कर लिखा, “चुनाव आयोग हमेशा सवालों से बच नहीं सकता। ईवीएम और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए पहले अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। फिर ऐसी घटना कैसे हो गई? क्या यह सिर्फ एक हादसा था या अहम सबूतों को मिटाने की सुनियोजित कोशिश?” तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि आग में नष्ट हुई मशीनें कस्बा, जादवपुर, बेहाला ईस्ट, बेहाला वेस्ट, मेटियाबुरुज, सतगछिया और डायमंड हार्बर सब-डिवीजन की कई विधानसभा सीटों से जुड़ी थीं। कांग्रेस ने कहा- सरकार और चुनाव आयोग को यह साफ करना चाहिए कि आग कैसे लगी और नौवीं-दसवीं मंजिल तक कैसे पहुंची? आम आदमी पार्टी ने कहा- आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक सरकारी भवन में इतनी भीषण आग लग गई? आग कैसे लगी, और हजारों ईवीएम इस आग की चपेट में कैसे आ गईं, भाजपा जवाब दे? एक्स पर एक उपयोगकर्ता अमित मेहरा ने अंग्रेजी में लिखा है, 4,000 ईवीएम में 28 से लेकर 32 लाख वोट नष्ट हो गए। ऐसा लगता है कि यह ममता बनर्जी की सीट की साफ़ तौर पर चोरी है। मोदी के इशारे पर तानाशाही पनपी है। यह एक गंभीर मामला लगता है जो चुनावी जवाबदेही पर सवाल उठाता है। भारत एक लोकतंत्र है जहाँ हर वोट मायने रखता है और लाखों वोटों का नुकसान गंभीर चिंता का विषय होगा। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट व्यस्त हैं। जवाबदेही तो धरती की गहराई में कहीं खो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना ज़िले के 10 विधानसभा क्षेत्रों में इस्तेमाल की गईं 4,000 ईवीएम आग लगने से नष्ट हो गईं।

फोटो मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


