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टीवी, रेडियो और DTH के लिए एक ब्रॉडकास्टिंग नियम; MIB के नए प्रस्ताव से मीडिया सेक्टर में हलचल!

नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देश के प्रसारण क्षेत्र में बड़ा नियामकीय बदलाव प्रस्तावित किया है। मंत्रालय ने ‘टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीविजन, रेडियो एंड एसोसिएटेड सर्विसेज) रूल्स, 2026’ का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। इसके तहत टीवी, रेडियो, डीटीएच, HITS, कम्युनिटी रेडियो और IPTV जैसी सेवाओं को पहली बार एकीकृत नियामक ढांचे के तहत लाया जाएगा। उद्योग जगत के हितधारकों को इस मसौदे पर अपनी राय देने के लिए 27 जुलाई तक का समय दिया गया है।

यह पहल टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 के तहत की जा रही है, जिसने 1885 के भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की जगह ली है और संचार क्षेत्र के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार किया है।

छह अलग-अलग नियमों की जगह एक नियमावली

मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा समय में प्रसारण क्षेत्र कई अलग-अलग दिशानिर्देशों के तहत संचालित होता है। नए मसौदे में इन छह प्रमुख ढांचों को एकीकृत किया गया है—

  • टीवी अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस
  • डीटीएच लाइसेंसिंग नियम
  • HITS रेगुलेशन
  • एफएम रेडियो नीति
  • कम्युनिटी रेडियो गाइडलाइंस
  • IPTV नियम

सरकार का दावा है कि इससे अनुपालन संबंधी जटिलताएं कम होंगी और कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी।

IPTV को पहली बार औपचारिक मान्यता

ड्राफ्ट का एक अहम पहलू यह है कि इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) को औपचारिक रूप से नियामक ढांचे में शामिल किया गया है। इंटरनेट सेवा प्रदाता अथवा पंजीकृत मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) सरकार को घोषणा देकर IPTV सेवाएं शुरू कर सकेंगे।

हालांकि, उन्हें कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता का पालन करना होगा तथा प्रसारित सामग्री की रिकॉर्डिंग 90 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी।

टीवी चैनलों के लिए नए दायित्व

प्रस्तावित नियमों के तहत टीवी चैनलों को लाइसेंस मिलने के एक वर्ष के भीतर संचालन शुरू करना होगा। यदि कोई चैनल लगातार 90 दिनों तक प्रसारण बंद रखता है, तो उसका प्राधिकरण वापस लिया जा सकता है।

इसके अलावा, हर टीवी चैनल को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट जनहित कार्यक्रम प्रसारित करना होगा। इनमें शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक, महिला कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता जैसे विषय शामिल होंगे।

DTH और मीडिया स्वामित्व पर सख्ती

ड्राफ्ट में क्रॉस-मीडिया स्वामित्व पर भी नियंत्रण बरकरार रखा गया है।

DTH ऑपरेटरों में टीवी ब्रॉडकास्टर और केबल ऑपरेटरों की संयुक्त हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। इसी तरह DTH कंपनियां टीवी चैनलों या केबल वितरण कंपनियों में 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकेंगी। HITS ऑपरेटरों के लिए भी इसी तरह के प्रतिबंध प्रस्तावित हैं।

एफएम रेडियो के लिए क्या बदलेगा?

ड्राफ्ट में निजी एफएम रेडियो के लिए मौजूदा व्यवस्था को काफी हद तक बरकरार रखा गया है, लेकिन कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं।

एफएम लाइसेंस नीलामी के जरिए ही दिए जाएंगे। प्रतिदिन कम से कम एक घंटे का सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम प्रसारित करना होगा। कुल दैनिक प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय सामग्री होगी। स्वतंत्र समाचार प्रसारण पर रोक जारी रहेगी, लेकिन आकाशवाणी के बुलेटिन बिना बदलाव के प्रसारित किए जा सकेंगे।

कम्युनिटी रेडियो का दायरा बढ़ेगा

सरकार ने कम्युनिटी रेडियो के लिए पात्र संस्थाओं का दायरा भी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। अब स्वयं सहायता समूह (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) भी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे।

हालांकि, उन्हें संबंधित क्षेत्र में कम से कम तीन वर्षों के सामुदायिक विकास कार्य का प्रमाण देना होगा।

सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य

ड्राफ्ट के अनुसार समाचार चैनलों, टीवी समाचार एजेंसियों, वितरण प्लेटफॉर्म और निजी एफएम ऑपरेटरों के प्रमुख पदाधिकारियों के लिए सुरक्षा मंजूरी पूरी अवधि तक अनिवार्य होगी। साथ ही, इन संस्थाओं के अधिकांश निदेशक और प्रमुख प्रबंधन कर्मी भारत में निवासी होने चाहिए।

विदेशी तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले भी सरकार की सुरक्षा मंजूरी आवश्यक होगी।

27 जुलाई तक मांगे गए सुझाव

मंत्रालय ने कहा है कि यह मसौदा प्रसारण उद्योग के लिए “एकीकृत और सरल नियमावली” तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है। टीवी ब्रॉडकास्टर, डीटीएच कंपनियां, रेडियो नेटवर्क, टेलीकॉम ऑपरेटर, सैटेलाइट कंपनियां और डिजिटल टीवी सेवा प्रदाता 27 जुलाई 2026 तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

मसौदा अंतिम रूप लेने के बाद यही नियम देश में टीवी, रेडियो और संबद्ध प्रसारण सेवाओं के लिए प्रमुख नियामक ढांचा बन जाएंगे और टेलीग्राफ एक्ट युग की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

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