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न्यूज़ चैनलों को नफरत का सौदागर बताकर खुद को पाक-साफ दिखा रहा है इंडियन एक्सप्रेस!

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस का 39 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अखबार टीवी न्यूज चैनलों को नफरत का सौदागर बताकर खुद को चकाचक पत्रकारिता का पाक-साफ उदाहरण बताने की कोशिश कर रहा है। लेकिन समय समय पर यह अखबार भी सरकार के पक्ष में पैरोकार बनता नजर आता है।

नीचे पढ़िए और विज्ञापन भी देखिए…


उमाशंकर सिंह-

इंडियन एक्सप्रेस के विज्ञापन की बहुत तारीफ़ हो रही है

पर ज़रा ठहरिए !

टीवी चैनलों के ज़हर को निशाना बनाना आसान है। लेकिन कई बार दबे पाँव इंडियन एक्सप्रेस जैसा अख़बार भी जो करता है वो भूलना नहीं चाहिए।

याद है ये हेडलाइन –

“Opposition Stands, Women’s Bill Falls”

Front page of The Indian Express with the headline 'Opposition stands, women's Bill falls' and a photo of parliament proceedings below it.

इसमें उसने संसद में सीटों की तादाद बढ़ाने के लिए लाए गए बिल को ‘महिलाओं का बिल’ बता कर छापा और विपक्षी दलों को ग़लत रौशनी में दिखाने की कोशिश की!

‘मानव की स्मरण शक्ति बहुत छोटी होती है’ -इंडियन एक्सप्रेस ने इस विज्ञापन के ज़रिए उसी का लाभ लेने की कोशिश की है। वह जानता है कि पाठक और दर्शक उसके उस ‘ज़हरीले हेडलाइन’ को भूल चुके हैं।

टीवी चैनलों की शर्ट से अपनी शर्ट अधिक सफ़ेद बताना आसान है। जबकि ये भी मौक़े बेमौक़े अपने तरीक़े से गंद फैलाने में पीछे नहीं रहते हैं।

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