नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बिजली क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं में भागीदारी के लिए भारत में विनिर्माण इकाइयां संचालित करने वाली चीन से जुड़ी चार कंपनियों को विशेष छूट प्रदान की है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 24 जून 2026 को जारी आदेश के तहत इन कंपनियों को सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) नियमों से दो वर्षों के लिए सीमित छूट दी है।
यह निर्णय बिजली मंत्रालय के अनुरोध और विभिन्न मंत्रालयों के बीच हुई विस्तृत विचार-विमर्श प्रक्रिया के बाद लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल दो वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी और इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल (Precedent) नहीं माना जाएगा।
किन कंपनियों को मिली छूट
सरकार ने जिन चार कंपनियों को राहत दी है, उनमें शामिल हैं—
- TBEA Energy India
- Nanjing Electric India
- New Northeast Electric India
- Taikai Electric (India)
ये सभी कंपनियां भारत में विनिर्माण इकाइयां संचालित करती हैं और चीनी कंपनियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं।
2020 के नियमों से मिली राहत
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा तनाव के बाद केंद्र सरकार ने ऐसे देशों की कंपनियों के लिए कड़े सार्वजनिक खरीद नियम लागू किए थे, जो भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करते हैं। इन नियमों के तहत सरकारी निविदाओं में भाग लेने से पहले संबंधित कंपनियों को भारत सरकार से विशेष पंजीकरण और मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था।
अब जारी आदेश के तहत इन चार कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं में निविदा प्रक्रिया के लिए उन प्रतिबंधों से सीमित छूट दी गई है।
बिजली मंत्रालय ने मांगी थी छूट
रिपोर्टों के अनुसार, बिजली मंत्रालय ने जनवरी 2026 में वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर भारत में उत्पादन इकाइयों वाली कुछ कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। मंत्रालय का तर्क था कि बिजली क्षेत्र की कुछ अहम परियोजनाओं के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और तकनीकी क्षमता को देखते हुए यह छूट जरूरी है।
कई स्तरों पर हुई समीक्षा
यह निर्णय समिति सचिवों (Committee of Secretaries) तथा उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत गठित रजिस्ट्रेशन कमेटी की सिफारिशों के बाद लिया गया। इन समितियों ने मामले की समीक्षा करने के बाद छूट देने की अनुशंसा की।
सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल विशेष परिस्थितियों में लिया गया है और इसे अन्य मामलों में नीति परिवर्तन या स्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दयाशंकर मिश्रा-
भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) ने चार चीन लिंक्ड कंपनियों को सरकारी पावर प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में बोली लगाने की अनुमति दे दी है।
- इन कंपनियों को पब्लिक प्रोक्योरमेंट के नियमों से 2 साल के लिए छूट दी गई है।
- यह फैसला पावर मंत्रालय के ‘अनुरोध’ पर और विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा (inter-ministerial consultation) के बाद लिया गया।
- 24 जून 2026 को यह आदेश जारी किया गया।यह कंपनियाँ चीन से जुड़ी हैं, भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट रखती हैं।
इन सबके बीच आपको याद दिलाना देना ज़रूरी है, कैसे कथित ‘चीन कनेक्शन’ के नाम पर ‘न्यूज़ क्लिक’ पत्रकारिता संस्थान को बर्बाद किया गया।


पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘न्यूज़क्लिक’ (NewsClick) समाचार पोर्टल और उसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIR) और मामलों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस कार्रवाई को कानून का ‘घोर दुरुपयोग’ और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश बताया था।
हाईकोर्ट के निर्णय से स्पष्ट हुआ, संस्था को ‘चीन समर्थक’ और ‘अवैध विदेशी फंडिंग’ (Money Laundering) के झूठे आरोपों में फंसाया गया था। इस कानूनी लड़ाई और एजेंसियों की छापेमारी के दौरान न्यूज़क्लिक के बैंक खाते सील कर दिए गए, जिससे 100 कर्मचारियों और पत्रकारों की आजीविका छिन गई । स्वतंत्र आवाज़ और शानदार मीडिया संस्थान बर्बाद हो गया।
कितनी आसानी से चीन के नाम पर पत्रकारिता का गला घोट दिया गया। अब चीन के साथ दोस्ती की नई कहानियाँ शुरू की जा रही हैं।
सरकार से कोई सवाल पूछेगा; ‘न्यूज़ क्लिक’ के माफ़ी कौन माँगेगा। पत्रकारिता संस्थानों का दमन तानाशाही का प्रत्यक्ष उदाहरण है। अगर जनता अब भी समझ सके।



