राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब एक और गंभीर दावा सामने आया है। आरोप है कि भारत सरकार के एक पूर्व गृह सचिव द्वारा रामलला को श्रद्धापूर्वक भेंट की गई करीब एक किलो शुद्ध सोने से निर्मित प्राचीन रामचरितमानस का भी स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है।
दावों के अनुसार, पूर्व गृह सचिव ने यह बहुमूल्य धार्मिक भेंट राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी थी, लेकिन उन्हें उस समय इसकी कोई रसीद नहीं दी गई। बाद में भी इस भेंट के संबंध में संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
आरोप यह भी है कि पूर्व गृह सचिव को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मिलने के लिए एक बार लगभग नौ घंटे और दूसरी बार करीब चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपनी भेंट का विवरण और रसीद मांगी तो उन्हें निराशा और अपमान का सामना करना पड़ा।
इन दावों के सामने आने के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि एक पूर्व गृह सचिव जैसी वरिष्ठ शख्सियत द्वारा चढ़ाई गई इतनी मूल्यवान धार्मिक भेंट का रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, तो आम श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान और चढ़ावे के अभिलेखों की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर भी स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं।
कृष्ण कांत-
ये देश के पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण जी हैं। इन्होंने राम मंदिर में एक सोने से बनी रामचरितमानस दान की थी। कह रहे हैं कि वह गायब हो चुकी है।
ये अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इनकी मां ने करीब 15 साल तक वैधव्य का जीवन जिया। उन्होंने अपने सारे गहने अपनी बहू को दे दिए। जब वे नहीं रहीं तो इन्होंने सोचा कि उनके गहने हम राम के चरणों में न्योछावर कर देंगे। इन्होंने अपनी मां के गहने और कुछ और पैसे लगाकर सोने की रामचरितमानस बनवाकर दान की। इनको कोई रसीद नहीं दी गई। फिर इनको एक दिन बताया गया कि आपका रामचिरतमानस अब गायब हो गया है।
ये कई बार अयोध्या गए। घंटों-घंटों इंतजार करके चंपत राय से मिले और शिकायत की। चंपत बोले कि क्या मैं यही करता रहूं? इन्होंने कहा कि आपने तो कहा था कि आप इसे रखवाएंगे, फिर अब क्यों हटवा दी? चंपत बोले कि जो मैं कहूंगा वही होगा। जाओ, जो करना है करो। इन्होंने बहुत पत्र लिखे, बहुत कोशिश की, बहुत अधिकारियों से गुहार की, लेकिन गायब रामचरितमानस आजतक नहीं मिली। अब ये जानना चाहते हैं कि आखिर वह रामचरितमानस गया कहां? इन्होंने लूट कांड की जांच कर रही SIT को भी चिट्ठी लिखी है।
सोचिए, राममंदिर में बैठाए गए चोरों ने ऐसी कितनी आस्थाओं पर डाका डाला है?



