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मध्य प्रदेश

पुत्र और संपत्ति मोह शिवराज मामा को ले न डूबे! EOW में शिकायत

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार की कथित संपत्तियों, कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत की गई है। यह शिकायत सेवानिवृत्त IFS अधिकारी और सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास ने की है।

शिकायत में डबास ने शिवराज सिंह चौहान के बेटों कार्तिकेय सिंह चौहान और कुणाल सिंह चौहान के नाम पर कथित तौर पर अर्जित संपत्तियों और उनसे जुड़ी कंपनियों व फर्मों के वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिवराज सिंह चौहान के लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सामने आए व्यापमं, ई-टेंडर, डंपर, पोषण आहार, अवैध रेत खनन, छात्रवृत्ति, नर्सिंग कॉलेज, मिड-डे मील और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच नहीं हुई। डबास ने इन मामलों को ध्यान में रखते हुए व्यापक आर्थिक जांच की मांग की है।

जमीन खरीद पर भी उठाए सवाल

शिकायत में विदिशा और सीहोर जिलों में परिवार से जुड़ी जमीनों की खरीद का भी जिक्र है। डबास का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले परिवार के पास सीमित कृषि भूमि थी, जबकि बाद के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में जमीन खरीदी गई। उन्होंने इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत, भुगतान और लेन-देन की जांच की मांग की है।

शिकायत में परिवार से जुड़ी कुछ कंपनियों और फर्मों के संचालन तथा निवेश की भी जांच की मांग की गई है। साथ ही सुधामृत ब्रांड से जुड़े कारोबार को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, ये सभी बातें शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी जांच होना अभी बाकी है। उपलब्ध जानकारी में यह सामने नहीं आया है कि EOW ने इन आरोपों को सही पाया है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों को निष्कर्ष के तौर पर नहीं, बल्कि जांच की मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।

शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ शिकायत के बाद डबास ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और मध्य प्रदेश के DGP से पुलिस सुरक्षा की मांग की है।


Front page of a Hindi newspaper with a large bold headline, a red subheading, and portraits of two men at the bottom, indicating a political corruption story with multiple columns of text.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को उज्जैन में भू माफिया कहा भले न जाए लेकिन माना जाता है। पिछले दिनों उनके परिवार की भूमि संबंधी पूरा खुलासा इंडियन एक्सप्रेस ने किया था। जिसे लेकर कुछ दिनों तक अच्छी खासी हलचल रही।
खबर तो अखबार ने छापी थी लेकिन इस खबर की पृष्ठभूमि में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का नाम लिया जा रहा था। अब शिवराज सिंह की कमाई और सम्पति को लेकर यह खबर राजधानी के अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित हुई है।
आरोप लगाने वाले अधिकारी सिर्फ मोहरा है असली चाल मोहन यादव की बताई जा रही है। भाजपा में समकालीन नेताओं के बीच शीतयुद्ध की यह पहली वारदात नहीं है। इस रस्साकशी में सबकी पोल अपने आप खुलती जा रही है।
विपक्ष को होम वर्क करने की आवश्यकता ही नहीं।
-देवेंद्र सुरजन

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