Connect with us

Hi, what are you looking for?

बिहार

लोकायुक्त कार्रवाई की अनुशंसा के बावजूद डॉ. सच्चिदानंद जोशी को ऊंचे पद क्यों? सांसद ने मोदी को भेजी शिकायत

नई दिल्ली। बक्सर से लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्तियों और उनके पूर्व कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में दावा किया है कि छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) की जांच में डॉ. जोशी के विरुद्ध नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं के प्रथमदृष्टया तथ्य प्रमाणित पाए गए थे और उनके विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।

सांसद का आरोप है कि इसके बावजूद डॉ. जोशी को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में सदस्य-सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई तथा भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के कुलपति का दायित्व भी सौंपा गया। सांसद ने प्रधानमंत्री कार्यालय से पूछा है कि उपलब्ध प्रतिकूल अभिलेखों के बावजूद उन्हें इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने से पहले सत्यनिष्ठा और सतर्कता संबंधी जांच किस स्तर पर की गई।

मामला कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में नियुक्तियों से जुड़ा बताया गया है। शिकायत के अनुसार तत्कालीन कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी उस भर्ती प्रक्रिया के लिए गठित चयन समिति के अध्यक्ष भी थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान निर्धारित पात्रता, अकादमिक उपलब्धियों और अनुभव के आधार पर अंक देने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं।

शिकायत में विशेष रूप से आरोप लगाया गया कि कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को भी साक्षात्कार के लिए बुलाया गया जिन्हें विश्वविद्यालय की स्क्रूटिनी समिति ने अयोग्य पाया था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों को निर्धारित मानकों से अधिक अंक दिए गए, जबकि अन्य उम्मीदवारों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुपात में कम अंक मिले।

शिकायत पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाई गई थी। रिपोर्ट के हवाले से शिकायत में कहा गया है कि आशुतोष मंडावी को तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने के बावजूद 8 अंक दिए गए, जबकि संबंधित मानदंड के अनुसार 5 अंक निर्धारित थे। अनुभव के लिए भी निर्धारित अवधि से संबंधित सवाल उठाए गए। हालांकि विभागीय रिपोर्ट में कुछ अन्य आरोपों को पूरी तरह प्रमाणित नहीं माना गया और कुछ बिंदुओं पर विश्वविद्यालय से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर अलग स्थिति बताई गई।

शिकायत में शैलेन्द्र खंडेलवाल के अनुभव और अन्य अकादमिक उपलब्धियों के लिए दिए गए अंकों पर भी सवाल उठाए गए। इसी तरह पंकज नयन पाण्डेय को स्क्रूटिनी समिति द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के बावजूद साक्षात्कार में बुलाए जाने और चयन किए जाने का उल्लेख किया गया है। विभाष झा के मामले में रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ।

सांसद के पत्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) ने जांच के बाद भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित चयन मापदंडों की अनदेखी और अयोग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल किए जाने सहित विभिन्न बिंदुओं पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। लोकायुक्त की अनुशंसा में भर्ती के दौरान अकादमिक एवं अनुभव के आधार पर दिए गए 80 प्रतिशत अंकों का पुनर्मूल्यांकन करने और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर मेरिट तैयार करने की बात कही गई थी। साथ ही अयोग्य पाए जाने वाले पूर्व चयनित उम्मीदवारों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा का उल्लेख है।

सांसद ने प्रधानमंत्री से यह भी मांग की है कि डॉ. जोशी के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में कार्यकाल के दौरान केंद्रों की स्थापना, नियुक्तियों, संविदा नियुक्तियों, पद सृजन, खरीद, निविदाओं, निर्माण, किराये, परामर्श सेवाओं और प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णयों की जांच कराई जाए।

पत्र में वाराणसी में संविदा नियुक्तियों के दौरान आरक्षण रोस्टर की कथित अनदेखी की भी जांच की मांग की गई है। इसके अलावा डॉ. जोशी के विभिन्न कार्यकालों में खरीद, निविदा, निर्माण, किराया, परामर्श, संविदा सेवाओं, कार्यक्रमों, यात्रा, मानदेय, अनुदान और परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच की मांग की गई है।

सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री से डॉ. जोशी को भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के कुलपति और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य-सचिव पद से मुक्त करने, उनके कार्यकाल से संबंधित मूल एवं इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सुरक्षित कराने तथा उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णयों की समीक्षा कराने की मांग की है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच के बाद कोई नियुक्ति अवैध पाई जाती है तो उसे रद्द किया जाए और डॉ. जोशी को उच्च पदों पर नियुक्त करने वाले अधिकारियों तथा उनकी सत्यनिष्ठा-सतर्कता जांच में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तुत दस्तावेज सांसद सुधाकर सिंह की ओर से प्रधानमंत्री को भेजी गई शिकायत है। इसमें लगाए गए आरोपों और मांगों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता के दावे तथा उसमें उद्धृत सरकारी/लोकायुक्त अभिलेखों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। दस्तावेज में छत्तीसगढ़ लोकायुक्त से संबंधित 23-पृष्ठीय अभिलेख संलग्न होने का भी उल्लेख है।

पढ़ें पत्र…

Official government letterhead with emblem and green Hindi text for Sudhakar Singh; formal letter to the Prime Minister’s Office (page 1 of 11).
Official letterhead document in Hindi with a green emblem at top center and contact details on the right; body contains numbered list of notes/paragraphs in Hindi.
Green government letterhead with state emblem and Sudhakar Singh details; page 3 of 11 with a formal Hindi notice.
Official government letterhead with emblem and bilingual contact details for Sudhakar Singh (green text).
Official government form page with emblem and a table of qualifications and marks.
Front page of Sudhakar Singh's government document with state emblem, Hindi header and a large table of sections in Hindi
Official green government document header with emblem and Hindi text; body of a formal memo/article, page 8 of 11.
Official government document page with green header and emblem; contains Hindi sections 7–10 and contact info for Sudhakar Singh, Bihar; page 10 of 11.
Green-ink government document header with emblem, Hindi text, and a signature; page 11 of 11
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन