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बिहार

बिहार में पत्रकारों की हत्या पर गृह मंत्रालय ने सम्राट सरकार से मांगी रिपोर्ट

सुभाष हत्याकांड की फाइल फिर खुलेगी

Portrait of a man with a red tilak on his forehead, wearing a red plaid shirt, standing beside a shallow water body with reeds in the background.

पटना। बिहार में पत्रकारों की हत्या के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीरता दिखाई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से पत्रकारों की हत्या से जुड़े मामलों की रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद पुराने मामलों की जांच और उनकी मौजूदा स्थिति की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक, केंद्र ने बिहार में पत्रकारों की सुरक्षा और उनके खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें पत्रकारों की हत्या के मामलों में हुई पुलिस कार्रवाई, जांच की स्थिति और आरोपियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल हो सकती है।

बेगूसराय के पत्रकार सुभाष हत्याकांड की भी होगी समीक्षा

इस प्रक्रिया में बेगूसराय के पत्रकार सुभाष कुमार हत्याकांड की फाइल भी दोबारा सामने आ सकती है। सुभाष कुमार की 20 मई 2022 को बेगूसराय के सांखो गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह एक स्थानीय न्यूज चैनल के लिए काम करते थे। घटना के समय वह गांव में आयोजित एक कार्यक्रम से लौट रहे थे।

मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को नामजद किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उनके घरों पर इश्तेहार चस्पा किया और आत्मसमर्पण के लिए समय दिया था। बाद में कुछ आरोपियों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी की गई और दो आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया था।

हत्या के पीछे क्या थी वजह?

सुभाष कुमार की हत्या को लेकर उस समय कई तरह के कारण सामने आए थे। उनके परिवार की ओर से पंचायत चुनाव से जुड़े विवाद की बात कही गई थी। वहीं, यह भी चर्चा थी कि सुभाष ने इलाके में बालू और शराब के कथित कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ खबरें प्रकाशित की थीं। हालांकि, हत्या की वास्तविक वजह को लेकर जांच में सामने आए तथ्यों को ही अंतिम आधार माना जाएगा।

हत्या के बाद स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। पत्रकारों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।

पत्रकारों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बिहार में पत्रकारों पर हमले और हत्या के मामलों को लेकर समय-समय पर पत्रकार संगठनों की ओर से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में केंद्र की ओर से राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगे जाने को पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है।

अब राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में पुराने मामलों की जांच की स्थिति, आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई और लंबित मामलों का ब्योरा सामने आने की उम्मीद है। इसी क्रम में बेगूसराय के सुभाष कुमार हत्याकांड समेत पत्रकारों की हत्या के पुराने मामलों की फाइलों की भी समीक्षा हो सकती है।

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