कल दिल्ली पुलिस ने 4पीएम न्यूज नेटवर्क की दो युवा महिला पत्रकारों शाहीन और नफीसा के साथ जो कुछ किया वह देशभर में विरोध का विषय बन गया। लोग दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। वहीं कुछ लोग अमित शाह से भी सवाल कर रहे हैं कि यह उनके अंडर आने वाली पुलिस किस तरह का व्यवहार कर रही है, वह भी महिला पत्रकारों के खिलाफ। जबकि यही भाजपा महिला सम्मान के नाम पर छाती पीटकर वोट मांगती है। इसे लेकर पत्रकार संगठनों ने पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग भी की है, नीचे पढ़ें…
विक्रम सिंह चौहान-
4PM न्यूज़ चैनल की पत्रकार शाहीन खान और उनकी साथी पत्रकार नफ़ीसा खान के साथ दक्षिण दिल्ली में दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर मारपीट की घटना यह साबित कर रही है कि अमित शाह खुलकर गुंडागर्दी में उतर आया है. वे गुजरात की तर्ज पर दिल्ली और देश में आतंक फैलाना चाहते हैं. जो लोग आज भी डर के मारे लिखने और बोलने से बच रहें हैं वे ख़ुश न हो कि आज सिर्फ “खान ” को निशाना बनाया जा रहा है. आपको भी इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. दोनों पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान बहादुर है वे अमित शाह के पुलिस से डरने वाली नहीं है.
देश के प्रमुख पत्रकार संगठनों ने दो महिला पत्रकारों द्वारा केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने पर की पुलिस मारपीट की कड़े शब्दों में निन्दा की है।
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
-शकील अख्तर

इमरान प्रतापगढ़़ी-
आज 4PM की जिन पत्रकार बेटियों के साथ पुलिस ने बेदर्दी से मारपीट की है उन बेटियों से फोन पर बात हुई, दोनों बेटियों ने जो घटनाक्रम बताया वो बेहद दर्दनाक है, साकेत पुलिस ने जिस तरह मुख्यमंत्री से सवाल पूछने वाली इन बेटियों के साथ दुर्व्यवहार किया और फिर नाम पूछने के बाद मारपीट की वो दिल्ली पुलिस की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिंह खड़ा करता है।
दिल्ली पुलिस के मुखिया को व्यक्तिगत तौर पर इस मामले का संज्ञान लेना चाहिये।
कॉंग्रेस पार्टी देश की बेटियों के साथ खड़ी है।
ए कयूम हाकिम-
क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब इतना बड़ा अपराध हो गया है कि पत्रकार को पुलिस बेरहमी से पीटेगी?
आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ जो हुआ, वह बेहद गंभीर और डराने वाला है.
शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं. शाहीन का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते थाने ले गई. उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुना, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई.

मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध कब से हो गया? पत्रकार का सवाल सत्ता के लिए इतना खतरनाक कब से हो गया? और किसी पत्रकार के नाम में ‘खान’ होना क्या उसके साथ मारपीट की वजह बन सकता है?
खान नाम सुनते ही शाहीन के साथ बदसुलूकी की गई। दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए.
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