गुजरात के आनंद शहर में सत्यवादी रक्षक पार्टी का रजिस्टर्ड ऑफिस एक फ्लैट में है। मौके पर न तो पार्टी का कोई बोर्ड लगा था और न ही कोई पोस्टर। फ्लैट पर ताला लगा हुआ था। यह स्थिति देखकर यकीन करना मुश्किल था कि पार्टी को वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 330 करोड़ रुपये का चंदा मिला था।
पार्टी के रिकॉर्ड के मुताबिक, इतनी बड़ी रकम मिलने के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने सिर्फ एक उम्मीदवार उतारा। ऑडिट रिपोर्ट में पार्टी ने चुनाव प्रचार पर 8.48 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी, जबकि 316 करोड़ रुपये ‘जनकल्याण’ के नाम पर खर्च किए गए। पार्टी अध्यक्ष स्वाति बेन ने चंदे के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर कहा कि पैसा चैरिटी में खर्च किया गया, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
यह मामला उन छह रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPP) की पड़ताल का हिस्सा है, जिन्हें 2023-24 में सबसे ज्यादा चंदा मिला। पड़ताल में इन पार्टियों के फंड और उनके इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता की कमी सामने आई है। भारत में 2,800 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां हैं, लेकिन चुनाव आयोग से राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी की मान्यता सिर्फ 73 को मिली हुई है। बाकी पार्टियां RUPP की श्रेणी में आती हैं।
इन छह पार्टियों की कुल आय 2023-24 में बीजेपी को छोड़कर बाकी पांच राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय से ज्यादा थी। इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में इन छह पार्टियों ने मिलकर सिर्फ 15 उम्मीदवार मैदान में उतारे। वहीं, बीजेपी को छोड़कर बाकी पांच राष्ट्रीय पार्टियों ने 893 उम्मीदवार उतारे थे।
दो साल में 20 हजार से 620 करोड़ रुपये तक पहुंचा चंदा
आम जनमत पार्टी को इन छह RUPP में सबसे ज्यादा चंदा मिला। 2020 में पटना में बनी इस पार्टी को शुरुआती दो साल में 20 हजार रुपये से ज्यादा का कोई चंदा नहीं मिला था। लेकिन 2022-23 में पार्टी को 216 करोड़ रुपये और 2023-24 में 620 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सिर्फ एक उम्मीदवार उतारा।
पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष अनामिका पासवान ने दावा किया कि उन्होंने 2022 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उनके मुताबिक पार्टी ने अपना बेस पटना से अहमदाबाद शिफ्ट कर लिया था। हालांकि, अहमदाबाद में पार्टी का रजिस्टर्ड ऑफिस बंद मिला। पार्टी के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव ने भी दावा किया कि उन्होंने कामकाज बंद कर दिया था, जबकि बैंक खाते में चंदा आना जारी था।
गरीब कल्याण पार्टी को 138 करोड़ रुपये का चंदा मिला था और उसने लोकसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारे। इसका ऑफिस भी अहमदाबाद में बंद मिला। पार्टी अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय की मां ने बताया कि उन्हें पार्टी के कामकाज की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह जरूर बताया कि इनकम टैक्स विभाग ने उनके घर पर छापा मारा था।
टैक्स छूट का फायदा उठाकर चंदे के दुरुपयोग का आरोप
विशेषज्ञों और टैक्स अधिकारियों के मुताबिक, राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाली टैक्स छूट और राजनीतिक चंदे पर टैक्स लाभ का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। अहमदाबाद के चार्टर्ड अकाउंटेंट महेश छाजेड़ ने बताया कि कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स राजनीतिक पार्टियों को चंदा देते हैं, उसकी रसीद के आधार पर टैक्स में छूट लेते हैं और आरोप है कि पार्टी अपना कमीशन काटकर बाकी रकम नकद में वापस कर देती है।
इनकम टैक्स विभाग ने दिसंबर 2025 की एक प्रेस रिलीज में भी RUPP को दिए जाने वाले फर्जी डोनेशन और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। विभाग के मुताबिक, कुछ RUPP का इस्तेमाल फंड ट्रांसफर, हवाला लेन-देन, सीमा-पार रेमिटेंस और फर्जी डोनेशन रसीदें जारी करने के लिए किया जा रहा था।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिसर्चर शैली महाजन ने कहा कि कुछ RUPP मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल हो सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई पार्टी चुनावी तौर पर सक्रिय नहीं है, फिर भी उसे सैकड़ों करोड़ रुपये का फंड मिल रहा है, तो यह जांच का विषय है कि वह वास्तव में राजनीतिक पार्टी है या किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल की जा रही है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल
जांच में कुछ टैक्स अधिकारियों ने दावा किया कि कई RUPP स्वतंत्र रूप से काम नहीं करतीं और उनके कामकाज आपस में जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट इन पार्टियों और टैक्सपेयर्स के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं।
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी ने भी दावा किया कि उनकी पार्टी को 2023-24 में 219 करोड़ रुपये मिले, लेकिन उन्हें उस रकम के इस्तेमाल का अधिकार नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए कुछ पैसे दिए और टैक्स में छूट चाहने वाले लोगों को प्रचार के वीडियो दिखाए जाते थे।
हालांकि, पार्टी के चार्टर्ड अकाउंटेंट मयूर सिंह ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ पार्टियों की अनिवार्य ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग में जमा करते हैं।
इनकम टैक्स विभाग ने हजारों करोड़ के फर्जी डोनेशन की पहचान की
टैक्स विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, विभाग कम से कम 2022 से संदिग्ध RUPP की जांच कर रहा है। एक इंटरनल डोजियर के हवाले से बताया गया कि टैक्स छूट हासिल करने के लिए टैक्सपेयर्स की ओर से RUPP को दिए गए 5,591 करोड़ रुपये के कथित फर्जी डोनेशन की पहचान की गई है। इनमें से 2,749 करोड़ रुपये की वसूली किए जाने का दावा है। इसके अलावा पार्टियों से जुड़े 665 करोड़ रुपये के विदेशी लेन-देन की भी पहचान की गई।
डोजियर में इनकम टैक्स एक्ट, फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट और चुनाव आयोग के नियमों के उल्लंघन का भी जिक्र है। विभाग ने संदिग्ध पार्टियों के खिलाफ तलाशी और जब्ती की कार्रवाई किए जाने की बात कही है। हालांकि, इस जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि के लिए पूछे गए सवालों का इनकम टैक्स विभाग और CBDT की ओर से अभी जवाब नहीं मिला है।
चुनाव आयोग से भी पूछा गया है कि क्या उसे इनकम टैक्स विभाग से RUPP की वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी मिली है। इस पर भी अभी कोई जवाब नहीं मिला है।
पिछले साल चुनाव आयोग ने 800 से ज्यादा RUPP को अपनी सूची से हटा दिया था। आयोग के मुताबिक, इन पार्टियों ने पिछले छह वर्षों में किसी भी चुनाव में एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस कार्रवाई में वित्तीय अनियमितताओं को भी आधार बनाया गया था या नहीं।
गिरीश मालवीय-
‘इट्स हैप्पन ओनली इन इंडिया’
बीबीसी में आज शुभांगी मिश्रा की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है जिसमें भारत की उन ‘पेपर पार्टियां’ की पोल खोली गई है जो बमुश्किल चुनाव लड़ती हैं पर करोड़ों चंदा पाती हैं
इस रिपोर्ट में 2023-24 जो लोकसभा चुनाव से पहले का वित्तीय वर्ष है उसमें सबसे ज़्यादा चंदा पाने वाली छह रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की आमदनी का विवरण है
2023-24 में इन पार्टियों की कुल आय, सत्ताधारी बीजेपी को छोड़कर बाकी पांच राष्ट्रीय पार्टियों की आय से ज़्यादा है. यानि कांग्रेस समाजवादी दल और बीएसपी से भी कही ज्यादा…..
कमाल की बात हैं सबसे ज्यादा चंदा पाने वाली आम जनमत पार्टी जिसे 620 करोड़ से अधिक का चंदा मिला उसने चुनाव में सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार उतारा …..

और सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन छह राजनीतिक दलों में से चार के रजिस्टर्ड ऑफिस अहमदाबाद के नरोड़ा इलाके में हैं. बाकी दो भी गुजरात में ही हैं.
समझ रहे हो विनोद…… सारा गड़बड़ घोटाला कहा से ऑपरेट हो रहा है
BBC हिन्दी की खोजी पत्रकारिता का जबाब नहीं. बीबीसी हिंदी की पत्रकार शुभांगी मिश्रा ने सनसनी खेज खुलासा किया है.
क्या आप लोगों ने Aam Janmat Party का नाम सुना है. इस पार्टी को 2023-24 में 620 करोड़ रुपए चंदा मिला है.
सभी बड़ी विपक्षी पार्टी Congress को 2023-24 में 281 करोड़ रुपए चंदा मिला है.
यानी Congress पार्टी से भी 339 करोड़ रुपए ज्यादा चंदा Aam Janmat Party को मिला है.
जब Shubhangi Mishra गुजरात के अहमदाबाद गयीं तो पार्टी का दफ्तर बंद निकला. पार्टी के अध्यक्ष Gaurav Mishra फ़ोन नहीं उठा रहे हैं.
स्रोत : चुनाव आयोग & ADR
न्यूज़ सौजन्य : BBC Hindi
-हेमंत कुमार


