लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने पुराने वोटबैंक माने जाने वाले ब्राह्मण समाज को साधने की दिशा में एक और बड़ा संदेश दिया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। यूपी की राजनीति में दिनेश शर्मा को भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिना जाता है।
इससे पहले भाजपा ने ब्राह्मण चेहरे हरीश द्विवेदी को संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी थी। अब दिनेश शर्मा को उपराज्यपाल बनाए जाने को भी यूपी में भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की ओर से ब्राह्मण समाज को अपने पाले में लाने की कोशिशों के बीच सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी का संदेश देना चाहती है।
संघ से भाजपा तक लंबा राजनीतिक सफर
डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य के प्रोफेसर रहे हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा से जुड़े रहे हैं। वह वर्ष 2006 और 2012 में लखनऊ के महापौर चुने गए। इसके बाद 2014 से 2018 तक उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली।
दिनेश शर्मा दो बार विधान परिषद के सदस्य भी रहे। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वर्ष 2023 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए। अब उन्हें अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने के फैसले को उनके राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है।
ब्राह्मण वोटबैंक पर सपा-बसपा की भी नजर
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज लंबे समय से भाजपा के प्रमुख समर्थक वर्गों में माना जाता है। हालांकि, विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा भी इस वोटबैंक को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी हैं।
वर्ष 2007 में मायावती ने ब्राह्मण-दलित सोशल इंजीनियरिंग के जरिए उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। अब बसपा एक बार फिर अपने पुराने सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी ब्राह्मण समाज को साधने के संकेत दे चुके हैं। हाल ही में जनेश्वर मिश्र जयंती के कार्यक्रम में उन्होंने पीडीए में ‘पीडी’ को ‘पंडित’ का शॉर्ट फॉर्म बताया था।
भाजपा से ब्राह्मणों की नाराजगी की चर्चाओं के बीच फैसला
इस बीच यूजीसी के नए नियमों से लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद तक कई मुद्दों को लेकर ब्राह्मण समाज के भाजपा से नाराज होने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में भाजपा की ओर से लगातार ब्राह्मण समाज को सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी का संदेश देने की कोशिश के तौर पर इन फैसलों को देखा जा रहा है।
हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद अब दिनेश शर्मा को उपराज्यपाल बनाना भी इसी राजनीतिक संदेश की कड़ी माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के इन फैसलों के जरिए यह संकेत देने की कोशिश नजर आती है कि पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखना चाहती है।
दिनेश शर्मा बोले- प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के भरोसे पर खरा उतरूंगा
उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद दिनेश शर्मा ने कहा कि उन्हें हमेशा पार्टी का पूरा आशीर्वाद मिला है और उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उन पर विश्वास जताया है और वह इस विश्वास पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।

लखनऊ के पूर्व मेयर, राज्यसभा सांसद डॉ दिनेश शर्मा अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल बनें। हालांकि डॉ दिनेश शर्मा के राज्यपाल बनने का समय नहीं था। उनके समर्थक उन्हें लखनऊ से लोकसभा का सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में देखने के इच्छुक हैं। टीम गुजरात ने यूपी के एक और सौम्य राजनीतिज्ञ को सक्रिय राजनीति से जबरन रिटायर कर दिया। फिलहाल यूपी के वरिष्ठ नेताओं के लिये यह अच्छा संकेत नहीं है। आज डॉ दिनेश शर्मा को बनाया गया कल किसी और प्रदेश के दिग्गज का नम्बर आना तय है। वरिष्ठ सावधान रहें। केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार से पहले संभावित लोगों में नितिन गडकरी से लेकर न जाने कौन-कौन जद में आ सकता है। अभी तो ये अंगड़ाई है…….।
-मनोज सामना, वरिष्ठ पत्रकार


