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उत्तर प्रदेश

पद्मश्री से सम्मानित बुजुर्ग डॉक्टर टीके लाहिड़ी को जूनियर डॉक्टर अरविंद पांडेय ने बीएचयू के ICU में बेरहमी से थप्पड़ों से पीटा, आँख, कान और गाल ज़ख़्मी, देखें तस्वीरें

BHU कुलपति और प्रशासन आरोपी चिकित्सक को बचाने में लगा है, एक हफ्ते पहले की घटना में FIR तक प्रशासन ने दर्ज नहीं करवाया है!

Two close-up portraits of an elderly man wearing glasses, shown side by side, focusing on his eyes and facial features.

प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में पद्मश्री कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ टी के लाहिड़ी साहब की उनके ही विभाग के सिरफ़िरे डॉ अरविंद पांडे द्वारा अस्पताल में पिटाई। BHU कुलपति (जो कि पहले से ही अपराधियों को संरक्षण देने में मशहूर हैं), और प्रशासन आरोपी चिकित्सक को बचाने में लगा है। एक हफ्ते पहले की घटना में अबतक FIR तक प्रशासन ने दर्ज नहीं करवाया है।
-डॉ ओम शंकर

Close-up of an older man with gray hair and glasses, his left eye red and irritated.
Close-up side view of an older man with gray hair and glasses resting on his nose, showing purple bruising or marks along the jawline and cheek in a clinical setting

विनय मौर्या-

डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है। टीके लहरी उनमें से ही हैं। मगर जब उसी भगवान के साथ उसी चिकित्सा संस्थान में मारपीट हो जाए, तो इससे शर्मनाक बात और क्या होगी। बनारस के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के गहन चिकित्सा कक्ष में पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीके लहरी के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप एक एसोसिएट प्रोफेसर पर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि उसी ने डॉ. लहरी को थप्पड़ मारे।

डॉ. टीके लहरी को धरती का भगवान कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। वह 2003 में चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी मरीजों को निःशुल्क देखते रहे। बताया जाता है कि वह अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा भी जरूरतमंदों की मदद के लिए दान करते हैं।

Front page of Amar Ujala (Varanasi edition) dated 06-09-2026 with a teal masthead, Trump photo on the right, and a Hindi headlines banner below.

चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ऐसे चिकित्सक, जिन्होंने अपना जीवन मरीजों की सेवा में लगा दिया, उनके साथ कथित मारपीट होना बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है।

इस घटना की निंदा करते हुए प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर ओम शंकर ने भी कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने फेसबुक पर जो लिखा है उस स्क्रीनशॉट में पढ़िए उनके आरोप क्या हैं।

सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि डॉ. टीके लहरी के साथ क्या हुआ। सवाल यह भी है कि जिस संस्थान में मरीजों को जीवन देने का काम होता है, वहां एक वरिष्ठ और सम्मानित चिकित्सक के सम्मान और गरिमा की रक्षा कौन करेगा।


वाराणसी: BHU के ICU में पद्मश्री डॉ. टीके लहरी से कथित बदसलूकी, थप्पड़ मारने का आरोप : वाराणसी स्थित BHU के ICU में पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीके लहरी के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडे पर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि डॉ. पांडे ने डॉ. लहरी को थप्पड़ मारे। हालांकि, मारपीट की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। डॉ. टीके लहरी को लोग ‘डॉ. गॉड’ के नाम से भी जानते हैं। वह 2003 में IMS-BHU से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन इसके बाद भी मरीजों को निःशुल्क देखते रहे। बताया जाता है कि वह अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा भी जरूरतमंदों की मदद के लिए दान करते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
-मनीष यादव, वरिष्ठ पत्रकार


अमन कबीर-

जिस डॉ टीके लहरी ने बीएचयू में हजारों मरीजों को जीवन दिया, उन्हें उसी बीएचयू में मारा गया थप्पड़, दी गईं गलियां… क्या जिसने अपनी पूरी जीवन की सैलरी बीएचयू को दे दिया हो, तो क्या बीएचयू की इतनी भी जिम्मेदारी नहीं कि उनकी अंतिम अवस्था में उनके साथ दे सके

वाराणसी के बीएचयू अस्पताल से सामने आया 85 वर्षीय पद्मश्री डॉ. टीके लहरी से कथित बदसलूकी का मामला सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हमारी चिकित्सा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को आईना दिखाने वाला सवाल है।

जिस उम्र में एक बुजुर्ग को देखकर लोग सम्मान से सिर झुकाते हैं, जिस उम्र में उन्हें सहारे और संवेदना की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में अगर आईसीयू में भर्ती एक वरिष्ठ चिकित्सक के साथ गाली-गलौज और थप्पड़ मारने जैसे गंभीर आरोप सामने आएं, तो स्वाभाविक है कि हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल दुखेगा।

बताया जा रहा है कि 85 वर्षीय पद्मश्री और एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. टीके लहरी 27 जनवरी 2026 से बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में उपचाराधीन हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि 29 अगस्त की रात उनके साथ कथित तौर पर अभद्रता की गई और उन्हें थप्पड़ मारा गया। परिजनों के मुताबिक, घटना में उनके चेहरे और आंख में चोट भी आई।

इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है और निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आएगी। लेकिन आरोप इतने गंभीर हैं कि इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सोचिए… जिस व्यक्ति ने जिंदगीभर मरीजों की सेवा की, वह खुद अस्पताल के आईसीयू में असहाय पड़ा हो…

डॉ. लहरी ने चिकित्सा के क्षेत्र में लंबा समय बिताया। जिस व्यवस्था का हिस्सा बनकर उन्होंने वर्षों तक मरीजों की सेवा की, उसी अस्पताल में अपने जीवन के इस पड़ाव पर उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की खबर मन को भीतर तक झकझोर देती है।

आईसीयू में भर्ती मरीज सामान्य स्थिति में नहीं होता। वह बीमारी, कमजोरी और शारीरिक असहायता से जूझ रहा होता है। ऐसे मरीज के साथ डॉक्टर, नर्स और अस्पताल के प्रत्येक कर्मचारी से सबसे पहले मानवीय व्यवहार, धैर्य और संवेदना की अपेक्षा की जाती है।

अगर किसी मरीज से कोई गलती हो जाए, वह कुछ कह दे, नाराज हो जाए या उसकी स्थिति के कारण उसका व्यवहार सामान्य न हो—तब भी उसका जवाब गाली या थप्पड़ नहीं, बल्कि चिकित्सा की भाषा में धैर्य और संवेदना होना चाहिए।

डॉ. टीके लहरी पद्मश्री से सम्मानित हैं, लेकिन इस मामले की गंभीरता केवल इसलिए नहीं बढ़ जाती कि वह पद्मश्री हैं।

हर मरीज सम्मान का अधिकारी है। चाहे वह गरीब हो या अमीर, आम आदमी हो या कोई बड़ा अधिकारी, डॉक्टर हो या मजदूर—अस्पताल के बिस्तर पर पड़े व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। और जब मरीज 85 वर्ष का हो तथा आईसीयू में उपचाराधीन हो, तब जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

Medical team in a clinic room shows debriefing a seated elderly patient; one doctor in yellow suit and mask stands near a glass desk, another in white coat watches on the wall.
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