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आज के अखबार (दो) : नंदीग्राम उपचुनाव जीतने की ‘तैयारियों’ में टाटा संस को बर्बाद करने की कोशिशें!

Hindi newspaper front page reporting 11% drop in Tata shares with images of two executives and bold 58,000 figure; market reaction

संजय कुमार सिंह

आज द हिन्दू की लीड में बहुत कुछ नया और दूसरे अखबारों से बिल्कुल अलग है। मुख्य शीर्षक है, डेटा से पता चलता है कि अमेरिकी पाबंदियों के बाद भारत की तेल खरीद में कमी आई है। उपशीर्षक है, सरकार का कहना है कि ऊर्जा की खरीद ‘राष्ट्रीय हित’ पर आधारित है, लेकिन अमेरिका के दबाव के बाद भारत ने वेनेज़ुएला, ईरान और रूस से आयात कम कर दिया था और पाबंदियां कम होने के बाद फिर से खरीद शुरू कर दी।

2) द हिन्दू की एक और खबर महत्वपू्र्ण है। इसके अनुसार, एनआईए के चार्जशीट दाखिल करने की समय-सीमा चूकने पर अमेरिकी नागरिक को ज़मानत। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को जमानत दे दी। वैन डाइक को म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े कथित सीमा पार षड्यंत्र के सिलसिले में मार्च में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने गौर किया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अनिवार्य 180 दिनों की अवधि के भीतर कथित आतंकी अपराधों से संबंधित आरोप पत्र दाखिल नहीं किया था।

3) आज की तीसरी महत्वपूर्ण खबर 2006 के निठारी हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त सुरिन्दर कोली की मौत है। खबरों के अनुसार, उसे 13 मौत की सजा मिली थी, फांसी होने ही वाली थी पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया था। हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि के बाद जेल से रिहा हो गया था। नाम बदल कर हरिद्वार में रह रहा था। खबरों से लगता है कि मुकदमे में इतना समय खराब करने के बाद व आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से कमजोर हो गया था और जीने की मुश्किलें नहीं झेल पाया।

4) टाटा संस में 18.4 प्रतिशत शेयर वाले शपूरजी पलोनजी समूह ने इसकी लिस्टिंग का समर्थन किया है और कहा है कि यह सामाजिक और नैतिक रूप से जरूरी है। (टाइम्स ऑफ इंडिया)। टाटा संस के एन चंद्रशेखर के लिए शेयर होल्डिंग का गणित ऐसा है कि उनके लिए अपना निदेशक का पद बचाना मुश्किल हो सकता है (हिन्दुस्तान टाइम्स) लिस्टिंग पर ऊहापोह… टाटा के शेयरों में 11% की गिरावट। 

नोएल टाटा ने स्पष्ट किया है कि टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग टाटा समूह के मूल सिद्धांतों और उसकी प्रकृति के खिलाफ है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापारिक मुनाफे के बजाय समाज कल्याण और लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा देना है, इसलिए इसे सार्वजनिक रूप से लिस्ट करना इसके मूल चरित्र के अनुकूल नहीं है।

अमर उजाला में यह भी छपा है कि लिस्टिंग की वकालत करने वाले शपूरजी पलोनजी समूह के चेयरमैन ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की थी। मुझे लगता है कि यह प्रधानमंत्री की इच्छा या पसंद का मुद्दा है। चूंकि मामला देश के बड़े समूह, मुनाफे आदि से जुड़ा है इसलिए तमाम लोग बल्लेबाजी करेंगे और डर है कि इसका नुकसान समूह को और फिर कर्मचारियों के साथ आम निवेशकों को होगा। 

5) साइबर अपराध : 6 साल में 54 लाख शिकायतें, एफआईआर सिर्फ 2.4 प्रतिशत। एनसीआरबी के डेटा में कई अपराध छूट रहे हैं। शिकायतें 78 गुना बढ़ीं, केस का अनुपात गिरा (दैनिक भास्कर की लीड)। 

अब नंदीग्राम की कहानी – तथ्य यह है कि पिछली बार भी ममता बनर्जी नन्दी ग्राम से चुनाव हार गई थीं। इस बार उन्होंने उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और उनकी उम्मीदवार ने अंतिम समय में नामांकन वापस ले लिया। नवोदय टाइम्स ने शीर्षक लगाया है, ममता के पास न मानुष, न माटी। फैसला सुनाने जैसा शीर्षक इस तथ्य के बावजूद है कि अंतिम समय में नामांकन वापस लेने से पहले ममता की उम्मीदवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। क्या आश्वासन मिला क्या धमकी दी गई कोई नहीं जानता है और बाद में वह किसी इनाम के रूप में सामने आएगा तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। इसलिए नाम वापस लेना साधारण नहीं है पर कई अखबारों में खबरें बहुत साधारण ढंग से छपी है। आज इस खबर को प्राथमिकता देने में जो खबरें रह गईं वो अलग।

इस तरह खेल चल रहा है लेकिन नंदीग्राम में कल जो हुआ उससे पता चलता है कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए क्या सब उपाय कर रखे थे। उसपर आने से पहले नंदीग्राम के महत्व को भी समझना होगा। ममता बनर्जी ने पहली बार 2021 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से किस्मत आजमाई थी। इस बेहद कड़े मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी सुवेन्दू अधिकारी ने उन्हें 1,956 मतों के अंतर से हराया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जून 2021 में कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर पुनर्मतगणना की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मतगणना में अनियमितताओं का आरोप लगाया और वोटों की दोबारा गिनती कराने की याचिका दायर की। टीएमसी का दावा था कि रिटर्निंग ऑफिसर पर दोबारा गिनती न करने के लिए दबाव बनाया गया था।

ममता बनर्जी का मामला शुरू में न्यायमूर्ति कौशिक चंद्रा की पीठ के सामने सूचीबद्ध हुआ। ममता बनर्जी के वकीलों ने जज के अतीत में भाजपा के लीगल सेल से जुड़े होने का हवाला देते हुए उनसे केस से अलग होने की मांग की। न्यायमूर्ति चंद्रा ने केस से खुद को अलग तो कर लिया, लेकिन न्यायपालिका पर सवाल उठाने के तरीके के कारण ममता बनर्जी पर ₹पांच लाख का जुर्माना भी लगा दिया। दूसरी पीठ ने चुनाव आयोग को 2021 के नंदीग्राम चुनाव से संबंधित सभी दस्तावेज़, ईवीएम और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। विजेता प्रत्याशी सुवेन्दु अधिकारी ने इस मामले को बंगाल से बाहर स्थानांतरित करने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी। नतीजा यह रहा कि मामले पर कोई फैसला नहीं हुआ और ममता बनर्जी की याचिका का निपटारा ही नहीं हुआ।

इस बीच एक अलग मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने समय पूर्व सेवानिवृत्ति ली और 2024 को वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्हें अगस्त 2024 में सेवानिवृत्त होना था। न्यायपालिका से राजनीति में आने के बाद, भाजपा ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की तामलुक सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने जीत दर्ज की और जून 2024 में लोकसभा सांसद के रूप में शपथ ली। अभिजीत गंगोपाध्याय का मामला ममता बनर्जी से संबद्ध हो या नहीं, भाजपा (और भारत) की राजनीति से जरूर संबंधित है। इसलिए नंदीग्राम के उपचुनाव को समग्रता में देखा जाना चाहिए। इस कारण कल जो हुआ वह भी महत्वपूर्ण है।   

नंदीग्राम 2007 के किसान आंदोलन के समय से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र रहा है। सुवेन्दू अधिकारी के लिए यह उनका गृह गढ़ और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल है। दिलचस्प है कि बंगाल की हार के बाद भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने – बांटने में कोई कसर नहीं रखी और उपचुनाव के कारण बंटवारे पर फैसला होना ही था। इस समय ममता बनर्जी विधायक नहीं हैं, पहले नंदीग्राम से लड़ चुकी हैं इसलिए संभवाना थी कि ममता बनर्जी उपचुनाव लड़ेंगी। बागियों ने यह एलान भी किया था कि ममता बनर्जी लड़ेंगी तो वे अपना उम्मीदवार नहीं लड़ाएंगे। बाद में ममता बनर्जी ने संचिता प्रधान को चुनाव लड़ाने की घोषणा की। कल नाम वापसी के अंतिम दिन पार्टी के बंटवारे पर फैसला नहीं हुआ। अंतरिम व्यवस्था यह हुई कि दोनों को नया नाम और नया चुनाव निशान दे दिया गया। उधर ममता बनर्जी की उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की तो कल ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पंकज चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा हुई तो वे प्रचार में थे। शाम पांच बजे नंदी ग्राम प्रखण्ड 2 के रेवापाड़ा के पास गाँव में थे, तब उन्हें 2007 के एक प्रकरण में गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला नंदी ग्राम आंदोलन से जुड़ा है और जिस मामले में गिरफ़्तारी हुई है उस प्रदर्शन का नेतृत्व उस समय स्वयं शुवेन्दू अधिकारी कर रहे थे, जो उस समय कांग्रेस में थे। यही नहीं, तृणमूल के बागी ऋतवत गुट को  चुनाव आयोग ने “लिफाफा” चुनाव चिन्ह दिया है।

यह 2021 से मुस्लिम गुरु फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास द्वारा स्थापित राजनीतिक दल इंडियन सेक्यलर फ्रन्ट द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। अभी मई महीने में चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह का नवीनीकरण भी किया था। यह सजिशन मुस्लिम वोट को, बीजेपी परस्त दल को डलवाने की बड़ी योजना है और आईएसएफ ने इसको ले कर शिकायत भी की है। इन और ऐसे तमाम कारणों, जो राजनीतिक दांव-पेच ज्यादा है के कारण इस सीट पर कांटे की टक्कर होगी। पर खबर ऐसी नहीं है। (समाप्त)

पिछली किस्त पढ़ें – आज के अखबार : नंदीग्राम उपचुनाव जीतने की भाजपा की ‘तैयारियों’ पर चार हिन्दी अखबारों के अलग रूप

यह रहा लिंक – https://www.bhadas4media.com/nandigram-jeetne-kee-bjp-kee-taiyariyon-par-chaar/

Smiling older man with gray hair and glasses wearing a light striped shirt, seated in a booth at a restaurant.

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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