नौशाद अली-
सहारा से जुड़े संपत्ति विवाद को लेकर विश्व भारती जनसेवा संस्थान ने गंभीर आरोप लगाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं सर्वोच्च न्यायालय से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। संस्था के राष्ट्रीय सचिव नागेंद्र कुमार कुशवाहा की ओर से 12 सितंबर 2026 को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि सहारा इंडिया ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों में कई जमीनों को बेच दिया।
पत्र के अनुसार, सहारा सेबी विवाद के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत 71 संपत्तियों के टाइटल डीड सेबी के पास जमा कराए गए थे तथा इन संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। संस्था का कहना है कि 11 जुलाई 2016 को सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त प्रतिबंध हटाते हुए संपत्तियों की बिक्री की अनुमति दी थी, लेकिन इसके साथ बिक्री को लेकर कड़े निर्देश भी दिए गए थे।
संस्था के मुताबिक न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सहारा इंडिया की संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि में से टीडीएस एवं अन्य वैध खर्चों की कटौती के बाद शेष राशि सेबी के खाते में जमा कराई जाए तथा संपत्तियों की बिक्री सर्किल रेट के 90 प्रतिशत से कम पर नहीं की जाए।
कई राज्यों में संपत्तियां बेचे जाने का दावा
पत्र में आरोप लगाया गया है कि उपलब्ध जानकारी और बिक्री विलेखों के आधार पर 71 संपत्तियों में से बड़ी संख्या में संपत्तियां बेच दी गई हैं। संस्था ने इसके समर्थन में बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों की कई संपत्तियों के डीड नंबरों का उल्लेख किया है।
पत्र में बिहार के पटना, बेगूसराय एवं दरभंगा, पश्चिम बंगाल के खड़गपुर, उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के कानपुर, नोएडा, बस्ती, झांसी, बरेली, अयोध्या/फैजाबाद, बिजनौर, अलीगढ़, प्रतापगढ़, शाहजहांपुर, लखनऊ आदि स्थानों की संपत्तियों का उल्लेख करते हुए इनके बिक्री दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है।
बिक्री राशि और न्यायालय के निर्देशों की जांच की मांग
विश्व भारती जनसेवा संस्थान का कहना है कि यदि उक्त संपत्तियां वास्तव में बेची गई हैं तो यह जांच का विषय है कि क्या उनकी बिक्री सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरूप हुई, क्या निर्धारित मूल्य से कम पर बिक्री तो नहीं की गई और बिक्री से प्राप्त पूरी देय राशि सेबी के खाते में जमा कराई गई या नहीं।
संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि संबंधित संपत्तियों के बिक्री विलेख, बिक्री मूल्य, सर्किल रेट, प्राप्त रकम तथा सेबी के खाते में जमा राशि का सत्यापन कराया जाए। साथ ही, यदि न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए।
संस्था ने कहा है कि मामला देशभर के सहारा जमाकर्ताओं और सहारा से जुड़ी संपत्तियों के हितों से संबंधित है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच आवश्यक है।



