देवास: मध्य प्रदेश के देवास में डॉक्टरों और नर्सिंग होम संचालकों से ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के मामले में आरोपी बनाए गए कथित खोजी पत्रकार विनय कुमार अरोड़ा ने मीडिया संस्थानों और खबर प्रकाशित करने वालों को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में प्रकाशित खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने तथा 10 लाख रुपये के हर्जाने की मांग किए जाने का दावा किया गया है।
पुलिस कार्रवाई के बाद सामने आए इस मामले में आरोप है कि एक गिरोह निजी डॉक्टरों को फंसाने के लिए मरीज या नर्स बनकर उनके पास जाता था। इसके बाद बातचीत को कथित तौर पर छिपे कैमरों से रिकॉर्ड किया जाता था। पुलिस के अनुसार, रिकॉर्डिंग को संपादित कर डॉक्टरों पर गैर-कानूनी गर्भपात या भ्रूण के लिंग परीक्षण जैसे आरोपों में कार्रवाई की धमकी दी जाती थी और कथित तौर पर उनसे पैसे मांगे जाते थे।
मामले में श्रीराम नर्सिंग होम से 15 लाख रुपये की कथित मांग और माहेश्वरी नर्सिंग होम के डॉक्टरों से 10 लाख रुपये की कथित वसूली का भी उल्लेख सामने आया है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगी।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी विनय कुमार अरोड़ा समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। आरोपी ने अदालत में खुद को पत्रकार और खोजी पत्रकारिता से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए जमानत की मांग की थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने मामले की प्रकृति पर गंभीर टिप्पणी की और इसे प्रेस के नाम के कथित दुरुपयोग से जुड़ा संगठित अपराध बताया। अदालत के समक्ष सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड जैसे साक्ष्यों का भी उल्लेख हुआ।
अब आरोपी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में मीडिया में प्रकाशित खबरों को लेकर आपत्ति जताई गई है। नोटिस में दावा किया गया है कि इन खबरों से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। खबरों और उनसे जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट तथा अन्य लिंक हटाने के लिए 15 दिन का समय दिए जाने की बात भी सामने आई है।
नोटिस में 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग किए जाने का भी दावा है। दूसरी ओर, मामले से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वाले पक्ष का कहना है कि रिपोर्टिंग पुलिस कार्रवाई, जांच और अदालत में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।
ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोप और अदालत की अंतिम पुष्टि अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा। वहीं, मीडिया को भेजा गया मानहानि नोटिस अपने आप में प्रकाशित खबरों की सत्यता या असत्यता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।




