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उत्तर प्रदेश

यह पहली बार है जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की किसी कुलपति को पूरा दूसरा कार्यकाल मिला है!

शीतल पी सिंह-

सरकार और न्यायपालिका में “गठजोड़” का नया प्रतीक

Older woman standing at a wooden podium with a microphone, delivering a speech; floral arrangement at the front. (Outdoor event)

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की कुलपति संगीता श्रीवास्तव को दूसरी बार 5 साल के लिए कुलपति बनाया गया। यह पहली बार हुआ है जब किसी कुलपति को पूरा दूसरा कार्यकाल मिला है।

लेकिन सवाल यह है — क्यों?

उनके पति जस्टिस विक्रम नाथ जल्द ही देश के अगले चीफ जस्टिस बनने वाले हैं। यानी जज साहब रिटायर होने से पहले ही पत्नी को दूसरा कार्यकाल मिल गया।

यह कोई अलग-अलग घटना नहीं है। यह एक पैटर्न है।

  • रिटायर होने वाले उन जजों को राज्यपाल बनाया जाता है जिनके फैसलों में सरकार या उसके शीर्ष नेताओं को राहत मिली
  • रिटायर होने वाले ऐसे जजों को आयोगों का अध्यक्ष भी बनाया जाता है और उनके समायोजन के लिए क़ायदे भी बदले जाते हैं
  • रिटायर होने वाले ऐसे जजों को ट्रिब्यूनल में बिठाया जाता है
  • और अब तो रिटायरमेंट से पहले ही परिवार को फायदा पहुंचाया जा रहा है

इसे क्या कहेंगे?

अगर सरकार जजों को रिटायरमेंट के बाद पद और पैसा देती है, तो क्या वो जज सरकार के खिलाफ निष्पक्ष फैसला दे पाएंगे?

अगर जज की पत्नी को कुलपति बनाया जा रहा है, तो क्या वो जज सरकार से डरकर फैसला नहीं देगा?

यही तो “गठजोड़” है।

न्यायपालिका देश का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ है। अगर यह स्तंभ ही सरकार के इशारे पर नाचेगा, तो आम आदमी को न्याय कहां मिलेगा?

यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है जो ज़ोर ज़ोर से बज रही है!

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