नई दिल्ली। जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस आदेश को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अपनी संपत्तियों को सीधे या परोक्ष रूप से बेचने या ट्रांसफर करने से रोक दिया गया था। यह मामला उनकी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही से जुड़ा है।
NCLAT की तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को सुभाष चंद्रा की अपील पर सुनवाई की और उन्हें संबंधित कर्जदाताओं को अपील की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। सुभाष चंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता पेश हुए।
सुभाष चंद्र ने NCLAT में मुख्य रूप से NCLT की पांच सदस्यीय विशेष पीठ के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया है। उनकी दलील है कि विशेष पीठ ने मूल पीठ के सदस्यों के बीच मतभेद के आधार पर बने सीमित संदर्भ के दायरे से आगे जाकर आदेश दिया। उन्होंने अपनी किसी भी संपत्ति को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अलग करने पर लगाई गई रोक को भी चुनौती दी है।
यह विवाद सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में प्रस्तावित 6.25 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को 6.25 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव था। इसके अलावा दिवाला प्रक्रिया की लागत के लिए 25 लाख रुपये अलग रखे गए थे।
मामले की शुरुआत Indiabulls Housing Finance की ओर से दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) की धारा 95 के तहत दायर याचिका से हुई थी। NCLT की दो सदस्यीय पीठ के सदस्यों ने प्रस्ताव पर अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य के पास भेजा गया।
25 अगस्त को तीसरे सदस्य ने पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने के पक्ष में राय दी थी। उन्होंने 960 लोगों की ओर से अनिल कुमार और 300 लोगों की ओर से सुनील जैन द्वारा दाखिल दावों को बाहर रखने का निर्देश दिया था। इसके बाद शेष पात्र कर्जदाताओं के बीच राशि बांटने की बात कही गई। उन्होंने यह भी माना था कि मंजूर योजना विरोध करने वाले कर्जदाताओं समेत सभी कर्जदाताओं पर लागू होगी।
हालांकि, जब मामला मूल दो सदस्यीय पीठ के सामने वापस आया तो उसने माना कि तीनों सदस्यों की अलग-अलग राय होने के कारण स्पष्ट बहुमत का फैसला सामने नहीं आया है। इसके बाद NCLT के अध्यक्ष ने पांच सदस्यीय विशेष पीठ का गठन किया।
1 सितंबर को पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने 25 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी और सुभाष चंद्र को मामले की सुनवाई लंबित रहने तक अपनी किसी भी संपत्ति को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने, ट्रांसफर करने या अन्य तरीके से अलग करने से रोक दिया। विशेष पीठ ने मामले को दोबारा सुनने का फैसला भी किया था।
अब सुभाष चंद्र ने इसी आदेश के खिलाफ NCLAT का रुख किया है। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने फिलहाल संबंधित कर्जदाताओं को अपील की प्रतियां देने और आवश्यक पक्षकारों को मामले में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।




