सूत्रों के हवाले से: इंडियन एक्सप्रेस के सनसनीखेज़ खुलासे के बाद सरकार चाहती थी कि ज्ञानेश कुमार, सुखबीर संधू और विवेक जोशी एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहें कि SIR पर आयोग के अन्दर कोई विवाद नहीं है.
लेकिन संधू और जोशी इसके लिये तैयार नहीं हुये जिसके बाद एक प्रेस रिलीज़ जारी की गई.
अब ईडी, सीबीआई और दिल्ली पुलिस की एंट्री हो सकती है.
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार
आशुतोष कुमार पांडेय-
इंडियन एक्सप्रेस में आयी इन्वेस्टिगेशन पढ़ने के बाद यूट्यूब की ओर नज़र डाली. इंडियन एक्सप्रेस का अंग्रेजी यूट्यूब चैनल ने इस इन्वेस्टिगेशन का 8 मिनट 42 सेकेंड का वीडियो बनाया है. वीडियो के डिस्क्रिप्शन में रिपोर्टर का नाम लिखा है. प्रोड्यूसर-एडिटर में फैसल मलिक और कैमरा पर्सन में विकास कुमार तथा श्याम और मधुर श्याम का नाम लिखा हुआ है.
जबकि इसी खबर को इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के समाचार वाचक सौरभ द्विवेदी ने 26 मिनट 31 सेकेंड में पढ़ा है. देह ऐंठने और कुछ अतिरिक्त ज्ञान देने के चलते वीडियो लंबा ही गया है. वीडियो के डिस्क्रिप्शन में रिपोर्टर का नाम नहीं है. प्रोड्यूसर में इंडियन एक्सप्रेस हिंदी का नाम और एडिट में रजत सेन का नाम है. अब सोचिए कि हिंदी वाले रिपोर्टर का नाम क्यों नहीं दिया है. हिंदी में किसी काम की विश्वसनीयता क्यों नहीं है?
क्रेडिटखोर लोग हमेशा गप्प ज्यादा करते हैं. गप्प को ज्ञान की संज्ञा देते हैं. ग्राउंड रिपोर्ट के नाम पर चार लोग मिल गए उन्हीं लोगों के साथ कुछ बतमजई करके रिकॉर्ड कर लिया. आज बहुत से युट्यूबर इस विषय को अपना प्राइम टाइम ख़बर बनायेंगे. मगर रिपोर्टर का नाम गायब कर देंगे.
क्रेडिबिलिटी अभी भी अंग्रेजी अखबारों में ही बची है. इलेक्शन कमीशन द्वारा SIR से जुड़ी इंडियन एक्सप्रेस में रितिका चोपड़ा की ख़बर द हिन्दू न लाइन खबर चला रहा है. उसमें इंडियन एक्सप्रेस को नाम लेकर क्रेडिट दिया है. हिंदी की दुनिया में ऐसा होता है? तो इसकी साख क्या होगी? हिंदी पत्रकारिता आलस भरा प्रवचन हो गया है.

महेश शर्मा-
सच में पत्रकारिता अभी जिंदा है। बदनाम होते मीडिया के दौर में उन मीडिया कर्मियों के लिए इंडियन एक्सप्रेस की रितिका चोपड़ा की चुनाव आयोग पर खोजपूर्ण रिपोर्ट ने सत्ता की आँखों में डालकर सवाल पूछने वाले पत्रकारों को नैतिक साहस दिया है। किसी भी पार्टी की सत्ता के दौर में करताल बजाते हुए देश भर में कीर्तन करने वाली पत्रकार मंडली के मुंह पर रितिका की यह रिपोर्ट करारा तमाचा है। चुनाव आयोग को भी सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी। आयोग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, यह चौंकाने वाली बात है। रितिका चोपड़ा इंडियन एक्सप्रेस की स्थानीय संपादक हैं। यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।
चुनाव आयोग के प्रेस बयान का मूल पाठ।
भारत निर्वाचन आयोग
निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली–110001
क्रमांक: ECI/PN/119/2026
दिनांक: 23.09.2026
- भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों तथा स्थापित संस्थागत परंपराओं के कड़े अधिदेश के तहत कार्य करता है। आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में कार्य करता है। लिखित टिप्पणियां, अवलोकन, तकनीकी सुझाव तथा आंतरिक जांच-पड़ताल और संतुलन की व्यवस्थाएं पूर्ण पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और कार्यगत सुदृढ़ता सुनिश्चित करने के लिए आयोग की नियमित एवं सतत प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं। आयोग की सभी कार्रवाइयां कानूनों और आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप रही हैं।
- आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश, निर्णय और प्रशासनिक निर्देश मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत पूर्ण कानूनी आधार और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप जारी किए जाते हैं।
- मसौदा तैयार करने के चरण में आयोग के सदस्यों द्वारा उठाए गए किसी भी संचालन संबंधी प्रश्न अथवा दिए गए सुझाव, मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से अपनाई जाने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव निर्वाचन प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से होते हैं।
- किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले ये निर्णय-निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी भी निर्वाचन प्रणाली में सुधार के लिए आयोग के समक्ष अपने सुझाव देने के लिए पूर्णतः अधिकृत है।
- दस महीने की अवधि में सामने आई कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को प्रमुखता देना, जबकि आयोग द्वारा लिए गए बड़ी संख्या में अनुमोदनों, निर्णयों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज कर देना, पूरे परिदृश्य का केवल एक हिस्सा प्रस्तुत करता है। हाल के महीनों में आयोग ने अनेक निर्णय लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहल शुरू की हैं और कई चुनावी सुधार किए हैं। इनमें पूरे देश में निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, जिसमें एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) भी शामिल है, प्रमुख है। पिछले एक वर्ष में लिए गए ये सभी निर्णय पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
- आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में प्रमुख चुनाव तथा इस अवधि के दौरान चुनाव से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक संचालित की हैं। इस कार्य में व्यापक प्रशासनिक एवं परिचालन तंत्र के साथ-साथ आयोग के अनेक अनुमोदन और निर्देश शामिल रहे हैं।
- आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे ECINet, कड़े डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं, ताकि अनधिकृत छेड़छाड़, हेरफेर आदि को रोका जा सके। राष्ट्रीय डेटाबेस में आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण के मानक साइबर सुरक्षा उपाय लागू किए जाते हैं। निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) सहित वैधानिक प्राधिकारी कानून के तहत पंजीकरण और नाम हटाने संबंधी अपने वैधानिक अधिकारों के अनुसार कार्य करते हैं।
- भारत निर्वाचन आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों को पूर्ण निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करता है।
पी. पवन
उप निदेशक





