नई दिल्ली: म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और अनधिकृत यात्रा के आरोप में गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिकों में शामिल अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और एक यूक्रेनी नागरिक को गुरुवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। दोनों को अपने-अपने देश लौटने की अनुमति दी गई है। वैनडाइक की रिहाई को लेकर अब विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या उसे अमेरिकी दबाव में छोड़ा गया है।
इस मामले में विवाद की मुख्य वजह यह है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ यूएपीए की धारा 18 के तहत आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने का मामला दर्ज किया था। हालांकि, सितंबर में दाखिल की गई पहली चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं शामिल नहीं की गईं। चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत अपराधों का उल्लेख किया गया।
इसके बाद विशेष एनआईए अदालत ने सभी सात विदेशी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दे दी। इसके साथ ही इन सभी के तिहाड़ जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया।
कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना
कांग्रेस ने मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोपी अमेरिकी नागरिक को रिहा कर उसे देश लौटने की अनुमति दी गई।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक डेटलाइन साझा करते हुए इस पूरे मामले की घटनाओं का क्रम भी बताया।
जयराम रमेश ने गिनाईं तारीखें
जयराम रमेश के मुताबिक, 13 मार्च को NIA ने मैथ्यू वैनडाइक समेत विदेशी नागरिकों के एक समूह को भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था।
इसके बाद 16 मार्च को NIA की ओर से अदालत में दाखिल रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि आरोपी भारत विरोधी विद्रोही समूहों का समर्थन कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी आरोप था कि आरोपी ने आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने की बात स्वीकार की थी।
अब वैनडाइक की रिहाई और उसके खिलाफ चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाए जाने को लेकर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष इसे सरकार के रुख में बदलाव के तौर पर देख रहा है और अमेरिकी दबाव की संभावना पर सवाल कर रहा है। हालांकि, इन आरोपों और अमेरिकी दबाव के दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
गिरीश मालवीय-
इस ख़बर से मीडिया में भूचाल आ जाना चाहिए था लेकिन यहां किसी के माथे पर जूं तक नहीं रेंग रही,
अब कहां दुम दबा के बैठे है छप्पन इंच छप्पन इंच का रट्टा लगाने वाले!…एक आतंकवादी अपने छह लोगों के ग्रुप के साथ भारत में गिरफ्तार होता है तीन महीने उसे जेल में रखने के बाद उन्हें ससम्मान अमेरिका जाने वाले प्लेन में बिठा दिया जाता है
इट्स हैप्पन ओनली इन इंडिया
अमेरिका से आया मैथ्यू वैनडाइक आतंकवादी गतिविधियों में इंवॉल्व था, म्यांमार में गैर-कानूनी तरीके से घुसने और ड्रोन-युद्ध की ट्रेनिंग देने के आरोप लगे थे UAPA की धारा 18 और अन्य अपराधों के तहत दर्ज किया गया था.
तीन महीने से अधिक अवधि उसे जेल में रखा गया लेकिन न जाने किसके दबाव NIA ने चार्जशीट पेश करते समय उस पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का चार्ज नहीं लगाया !….इसी आधार पर उसे 8 सितम्बर को उसे जमानत मिल गई
तब भी लोगों ने सवाल उठाए कि ऐसे कैसे आप एक आतंकवादी को आप बचा रहे हो?
लोगों को समझाया गया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मैथ्यू एरन वैन डाइक समेत 7 आरोपियों पर लगे आतंक से जुड़े चार्ज को हटाया नहीं है
वह दिल्ली में ही रहेगा देश छोड़ कर नहीं जाएगा, लेकिन कुछ दिनों बाद 23 सितम्बर को तिहाड़ जेल से निकलते ही उसे मात्र 5 लाख रुपए में जमानत दे दी जाती है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत उसे अपने परिवार से मिलने के लिए एक महीने के लिए अमेरिका वापस जाने की अनुमति दे देती है।
सबसे बड़ी बात तो यह हुई कि मैथ्यू की जमानत की शर्त बदलते हुए उसे श्योरिटी बॉन्ड के बजाय सिर्फ कैश बॉन्ड पर देश छोड़कर जाने की इजाजत भी दे दी गई।
यानि अगर वो वापस नहीं आया तो आप सिर्फ 5 लाख रखकर खुश हो जाओ क्योंकि किसी की भी जिम्मेदारी नहीं है कि उसे वापस लाया जाए !
है न कमाल!….. कोई मूर्ख ही होगा जो अब वापस लौटेगा
मार्च में जब उसे गिरफ्तार किया गया तो दावा किया गया था कि यह समूह भारतीय सीमा के करीब म्यांमार में सशस्त्र जातीय समूहों के लिए प्रशिक्षण सत्र चला रहा था, जिसमें उन्हें ड्रोन युद्ध, ड्रोन निर्माण और ड्रोन जैमिंग जैसी चीजें सिखाई जा रही थीं। जिन गुटों को वह प्रशिक्षण दे रहा था वही गुट भारत के मणिपुर में हिंसा में इंवॉल्व बताए जा रहे थे ऐसे में मैथ्यू वैनडाइक को न सिर्फ जमानत देना बल्कि उसे देश छोड़कर जाने की इजाज़त देना कैसे वाजिब है आप ही बताए?


