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उत्तर प्रदेश

बरेली कलेक्ट्रेट में एडीएम के स्टेनो से रंगदारी मांगने के आरोप में पांच पत्रकारों पर FIR की इनसाइड स्टोरी!

Man in a maroon shirt holding a printed document outdoors, with banners and a white car in the background.

बरेली: पिछले तीन दिनों से उत्तरप्रदेश का बरेली शहर स्वतंत्र पत्रकारिता करने वालों पर मुकदमा दर्ज होने को लेकर सुर्खियों में है। तीन दिन में तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। सबसे अनोखा मामला यह है कि एडीएम प्रशासन के स्टेनो से पांच पत्रकारों ने दिनदहाड़े दफ्तर के अंदर रंगदारी मांग ली और स्टेनो ने पेशकार की मौजूदगी में दस हजार रुपए रंगदारी दे भी दी। फिर घटना के तीन दिन बाद इस पर एफआईआर कराई।

सबसे पहले एडीएम प्रशासन के स्टेनो की एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम की बात। एफआईआर में स्पष्ट रूप से स्टेनो संजीव कुमार कश्यप का कहना है कि 22 सितंबर 2026 को अवधेश कुमार नाम के आवेदक उनके कार्यालय एक हैसियत प्रमाणपत्र की जानकारी लेने आए और उन्होंने वहां एक क्यूआर कोड में पांच हजार रुपए जमा करने को कहा, जो कि बरेली जनकल्याण समिति का अकाउंट है और समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी हैं। इसके बाद चार अन्य लोग भी अवधेश के साथ आए और उन्होंने वीडियो बनाकर धमकाया कि 15 हजार रुपए दो, नहीं तो सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करके बदनाम कर देंगे। स्टेनो ने यह भी कहा है कि वीडियो पब्लिश भी कर दी गई और अगले दिन पांचों यूट्यूबर पत्रकार आए और 15 हजार रुपए रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद स्टेनो ने पेशकार की मौजूदगी में दस हजार रुपए दे दिए और बाद में वीडियो डिलीट कर दी गई। इस आधार पर पुलिस ने पांच पत्रकारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। इनमें एक पत्रकार अमल सैनी, जो एफआईआर में मुख्य आरोपी बनाया गया, वह स्टेनो की एफआईआर दर्ज होने के पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। स्टेनो की एफआईआर में क्या लिखा है, आप सबसे नीचे पढ़ सकते हैं-

अब कुछ अन्य तथ्यों पर आते हैं। जिस 22 सितंबर की घटना का जिक्र स्टेनो ने किया है, उसी दिन अवधेश कुमार ने जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की थी, जिसकी रिसीविंग भी उन्होंने डीएम ऑफिस से ली। इस शिकायत में कहा गया था कि एडीएम प्रशासन के स्टेनो के कार्यालय के बाहर एक क्यूआर कोड से पांच हजार रुपए जमा करने को कहा जा रहा है। इस संबंध में हमने सरकारी आदेश की जानकारी मांगी तो हमें स्पष्ट कुछ भी नहीं बताया गया। अवधेश ने शिकायत में अवैध धनराशि वसूले जाने की आशंका जताकर मामले की जांच कराने की मांग की। पूरा शिकायती पत्र पाठकगण स्वयं पढ़ सकते हैं। इस शिकायती पत्र के साथ अवधेश ने कुछ डिजिटल न्यूज पब्लिशर पत्रकारों के माइक पर बयान दिया। यह शिकायती पत्र उसी दिन एएनबी न्यूज चैनल के एक्स अकाउंट पर पब्लिश हुआ, जो आज भी उसके हैंडल पर मौजूद है। इसका स्क्रीन शॉट भी देखा जा सकता है।

Dark-mode screenshot of ANB News' Twitter post in Hindi, discussing issues like a ₹5,000 complaint and QR code, with a blue verified badge visible and a document image at the bottom, all in a social media feed context.
Instagram post screenshot from ANB NEWS with Hindi text and a blue verification badge, plus an image of a stamped official document at the bottom of the post.

इस मामले में दर्ज एफआईआर में इंडस न्यूज टीवी के विशेष संवाददाता संतोष शाक्य का भी नाम है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक संतोष शाक्य लंबे समय से स्वतंत्र लेखन और पत्रकारिता कर रहे हैं। बीते लगभग तीन साल से इंडस न्यूज टीवी के साथ जुड़े हैं। संतोष शाक्य ने पूरा घटनाक्रम भड़ास से साझा किया है। संतोष शाक्य का कहना है कि अधिकांश पत्रकार कलेक्ट्रेट गेट के पास पहुंचते हैं, 22 सितंबर को भी ऐसा हुआ। मेरा रोज इलेक्ट्रिक सिटी बस से आना जाना होता है, मैं भी पहुंचा। इसके बाद अवधेश, जिन्होंने बरेली कॉलेज से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है, उन्होंने सूचना दी कि एडीएम प्रशासन के स्टेनो कार्यालय पर क्यूआर कोड पर पांच हजार रुपए मांगे जा रहे हैं हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने के। अवधेश ने वहां मौजूद पत्रकारों को बताया कि उन्होंने शिकायत कर दी है डीएम से। इसके बाद अवधेश ने वहां मौजूद कुछ पत्रकारों को कैमरे पर पूरी बात बताई। इसके बाद पत्रकारों ने विमर्श किया और अवैध वसूली की आशंका में एसपी विजिलेंस को कॉल लगाई, फोन नहीं लगा, फिर सीओ विजिलेंस के सीयूजी नंबर पर कॉल की, जिसे किसी महिला ने पिक किया और उन महिला ने बताया कि एसपी विजिलेंस कार्यालय में मौजूद हैं, आप लोग आ जाएं। यह बातचीत ऑडियो कॉल रिकॉर्ड में मौजूद है।

सभी पत्रकार वहां पहुंचे और एसपी विजिलेंस से मिले, उन्होंने सबका परिचय लिया, उनके चैनल और अखबारों में नाम पूछे। साथ ही पूरा माजरा सुना। एसपी विजिलेंस ने पत्रकारों से कहा कि हम लोग गजेटेड अधिकारी से नीचे के कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं करते, बेहतर हो आप लोग एंटी करप्शन सेल जाएं। पत्रकार वहां से पुलिस लाइन स्थित एंटी करप्शन सेल पहुंचे, जहां उनसे कहा गया कि मामला ऑनलाइन लेनदेन का है, अगर नकदी का होता तो हम पैसे देकर रंगे हाथ पकड़ लेते। उन्होंने वहां से सलाह दी कि इस मामले की शिकायत डीएम से कर दो, वहां जांच करा लेंगे। मामला घूमकर वहीं पहुंच गया। डीएम से शिकायत तो पहले ही की जा चुकी थी।

Hindi official letter alleging illegal ₹5,000 collection for a certificate and QR-code payment, with an embossed seal stamp visible.
Printed document page with Hindi text, showing a date 22/09/2026, several paragraphs, signatures, and a contact mobile number (9627972113) at the bottom left and right addresses or names.

संतोष ने बताया कि इसके बाद हम लोग स्टेनो संजीव कुमार कश्यप के पास पहुंचे, जिससे उनका पक्ष जान सकें और अपने सवाल उनसे पूछ सकें। हमने ऐसा किया भी और कुछ विजुअल्स भी बनाए, जिसमें स्टेनो संजीव कह रहे हैं कि हमें फंसाया जा रहा है, यह क्यूआर तो नाजिर ने लगवाया है। फिर संजीव कश्यप पत्रकारों को नाजिर के पास भी ले गए। नाजिर ने कहा कि हमने नहीं लगवाया है, यह तो एडीएम मैडम के आदेश पर लगा है। इसके बाद सब खबर लगाने की चर्चा करते हैं और कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंचे, जहां अक्सर मिलने वाले एलआईयू के अमित पत्रकारों से खबर न लगाने को कहते हैं और अवधेश का काम बिना कोई पैसा दिए करा देने को कहते हैं। ऐसा होता भी है, वह स्टेनो को कॉल करते हैं और अवधेश को प्रमाणपत्र मिल भी गया।

तब तक यह सूचना तमाम अन्य पत्रकारों तक भी पहुंच चुकी थी। खबर रोकने के लिए तरह-तरह की सिफारिशें भी आती हैं, जिसमें कुछ पत्रकारों ने ही सिफारिश की। लेकिन एक पत्रकार मनोज गौतम ने पब्लिश कर दी थी, जिसे पत्रकार मित्रों के कहने पर हटा दिया। एएनबी न्यूज के पत्रकार अमल सैनी पूरे दिन के इस घटनाक्रम में नहीं थे, उन्हें वाट्सएप के जरिए अवधेश का प्रार्थनापत्र मिला था, जो एनएनबी ने एक्स पर पोस्ट किया और अमल ने खुद या किसी अन्य से डीएम ने ग्रुप पर इसे शेयर की। एक्स पर यह पत्र अभी भी मौजूद है। संतोष ने कहा कि मैं अगले दिन स्टेनो के पास नहीं गया। एसपी विजिलेंस कार्यालय, एंटी करप्शन कार्यालय, कलेक्ट्रेट गेट से लेकर स्टेनो कार्यालय, नजारत, सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 22 सितंबर और 23 सितंबर की फुटेज जांच के लिए संरक्षित की जाएं।

इस पूरे प्रकरण से कुछ सवाल निकलते हैं, जिनकी जांच होना आवश्यक है। सबसे पहला, बरेली जन कल्याण समिति क्या है, इसका संचालन कौन करता है, इसका उद्​देश्य क्या है और प्रमाणपत्रों को जारी करने से पहले इसमें धनराशि ट्रांसफर करने का आदेश किसका है? अब तक इस समिति के अकाउंट में कितना धन आया और कहां खर्च हुआ? इसका पूरा फाइनेंशियल ऑडिट होना जरूरी है। अवधेश कुमार की शिकायत पर अब तक क्या जांच हुई? सबसे अहम बात जो एफआईआर में कहीं गई है कि दस हजार रुपए देने के बाद वीडियो डिलीट कर दी गई। क्या था उस वीडियो में, जिसकी वजह से स्टेनो ने दस हजार रुपए पेशकार की मौजूदगी में अति सुरक्षित परिसर में दिनदहाड़े दे दिए? एफआईआर देरी से दर्ज होने का कारण क्या था? क्या इससे पहले स्टेनो ने अपने अधिकारी को या पुलिस को कोई सूचना दी? इसका भी रेकॉर्ड जांचा जाना जरूरी है। स्टेनो की एफआईआर में अमल सैनी मुख्य आरोपी है, जो कि दोनों दिन स्टेनो से मिला, इसको भी सीसीटीवी रिकॉर्ड से जांचा जाना चाहिए, क्योंकि संतोष शाक्य का दावा है कि 22 सितंबर के घटनाक्रम में अमल सैनी की मौजूदगी नहीं थी। दूसरे दिन अमल की अन्य मामले में गिरफ्तारी हो गई। संतोष का दावा है कि 23 सितंबर को वह स्टेनो के पास नहीं गए। जबकि स्टेनो का एफआईआर में दावा है कि पांचों आरोपी अगले दिन आए और उन्होंने दस हजार रुपए दिए, जिससे स्पष्ट हो सके कि कथित रंगदारी के पैसे किसे दिए?

यहां बता दें, एएनबी न्यूज के पत्रकार अमल सैनी को केंद्र में रखते हुए लगातार तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं। पहले 23 सितंबर को हुई और गिरफ्तारी हुई। आरोप था कि उन्होंने एक अन्य व्यक्ति शोएब के साथ मिलकर पारिवारिक विवाद से जूझ रही महिला को एसएसपी दफ्तर के बाहर आत्मदाह के लिए उकसाया और महिला के ससुर से छह हजार रुपए वसूलने के साथ ही 50 हजार रुपए रंगदारी मांगी। इस एफआईआर में भी अज्ञात आरोपी बनाए गए हैं और सीओ प्रथम आशुतोष शिवम ने रात में वीडियो बयान जारी करके कहा कि अमल की गैंग में और कौन है, उसकी छानबीन की जा रही है। बहरहाल, महिला ने आत्मदाह की कोशिश के पहले क्या मांग की थी पुलिस से और अभी क्या राहत मिली है, यह स्थानीय समाचारपत्रों में स्पष्ट नहीं हुई। महिला से सीधे किसी पत्रकार ने बातचीत करना मुनासिब नहीं समझा। अमल के जेल जाने के बाद स्टेनो द्वारा कराई एफआईआर में अमल को मुख्य आरोपी बनाया गया और उसके अलगे दिन टीएसआई की शिकायत पर एक और एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें तीन अज्ञात आरोपी हैं। टीएसआई का आरोप है कि अमल और उसके साथियों ने उसे यातायात व्यवस्था में झोल, लापरवाही के एआई से बने फोटो डालकर ब्लैकमेल किया।

Smartphone screen showing an SBI Scan & Pay QR code for UPI payments, with logos at the bottom and the UPI ID displayed.
क्यूआर जिसपर एडीएम के स्टेनो ने अवधेश से पैसे मांगे
Mobile payment screen showing a user named BAREILLY JAN KALYAN SMI with masked password, enter amount field highlighted in purple, and optional message box above the Proceed To Pay button.
स्टेनो द्वारा 5 हजार रुपये डलवाने वाले क्यूआर कोड का स्क्रीनशॉट
WhatsApp chat screenshot showing a green message bubble addressed to Ma'am asking for details about a FIR and extortion money, with several questions included.
एडीएम से की गई शिकायत का स्क्रीनशॉट

मूल खबर…

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