देहरादून: उत्तराखंड की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं को दिए गए सरकारी विज्ञापनों की रकम एक बार फिर चर्चा में है। सरकारी दस्तावेजों के आधार पर सामने आई सूची में राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े प्रकाशनों को करोड़ों रुपये का विज्ञापन भुगतान दिखाया गया है। सूची के मुताबिक दैनिक जागरण को करीब ₹6 करोड़, अमर उजाला को ₹4.59 करोड़, हिंदुस्तान को ₹4.14 करोड़ और इंडिया टुडे को ₹4.02 करोड़ दिए गए।
इसी सूची में पाञ्चजन्य को ₹1.91 करोड़ और पंजाब केसरी समूह को ₹2.09 करोड़ दिए जाने का उल्लेख है। यानी केवल इन छह राष्ट्रीय प्रकाशनों के सामने दर्ज रकम करीब ₹22.75 करोड़ बैठती है। पंजाब केसरी के मामले में दस्तावेज में समूह का विभाजन स्पष्ट नहीं बताया गया है।
उत्तराखंड से प्रकाशित राज्य और क्षेत्रीय प्रकाशनों को भी सरकारी विज्ञापनों के जरिए रकम मिली। द संडे पोस्ट को ₹1.26 करोड़, न्यूज वायरस को ₹70.62 लाख, दैनिक हॉक को ₹70.13 लाख, गढ़वाल पोस्ट को ₹57.74 लाख और क्राइम स्टोरी को ₹55.94 लाख दिए जाने का उल्लेख है।
खास बात यह है कि सरकारी विज्ञापनों की रकम सिर्फ उत्तराखंड में प्रकाशित होने वाले अखबारों तक सीमित नहीं रही। सूची में उत्तराखंड से बाहर प्रकाशित कई प्रकाशनों के नाम भी शामिल हैं। लखनऊ से प्रकाशित दस्तक टाइम्स को ₹93.67 लाख, दिल्ली की हिल मेल को ₹83.47 लाख, खबर मानक को ₹71.99 लाख, अमर भारती को ₹64.08 लाख और दैनिक टॉप स्टोरी को ₹54.33 लाख दिए जाने का उल्लेख है।
इसके अलावा लखनऊ के राष्ट्रीय स्वरूप को ₹52.80 लाख, कानपुर के मता-ए-आखिरत को ₹39.61 लाख, मुंबई के हिंदी विवेक को ₹35.45 लाख, गाजियाबाद के दैनिक हिन्ट को ₹33.24 लाख और राजस्थान बाल कल्याण समिति की स्मारिका को ₹26.24 लाख दिए जाने की बात सूची में है। इन दस प्रकाशनों के सामने दर्ज रकम ही करीब ₹5.55 करोड़ है।
इस तरह सामने आई सूची में राष्ट्रीय, राज्य-क्षेत्रीय और उत्तराखंड से बाहर प्रकाशित प्रकाशनों को मिलाकर करीब ₹32.10 करोड़ की रकम दर्ज है। हालांकि यह आंकड़ा सिर्फ साझा किए गए दस्तावेज में सूचीबद्ध प्रकाशनों की रकम का योग है, इसे सरकार द्वारा दिए गए कुल विज्ञापन खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उत्तराखंड सरकार के सूचना विभाग के रिकॉर्ड में विज्ञापन खर्च को लेकर पहले भी बड़े आंकड़े सामने आ चुके हैं। अक्टूबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, धामी सरकार के कार्यकाल में प्रिंट मीडिया के जरिए ₹314.37 करोड़ खर्च किए गए थे। इसमें अखबारों-पत्रिकाओं को सीधे विज्ञापन, एजेंसियों के जरिए विज्ञापन और अन्य प्रिंट प्रचार शामिल थे।
सरकारी सूचना विभाग की वेबसाइट पर भी मार्च 2026 में सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर सूचीबद्ध समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में विज्ञापन प्रकाशित कराने संबंधी आदेश दर्ज है।
ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किस अखबार को कितना विज्ञापन मिला, बल्कि यह भी है कि सरकारी विज्ञापन बांटने के लिए किन मानकों, प्रसार संख्या और अन्य पात्रता मानदंडों को आधार बनाया गया और अलग-अलग प्रकाशनों को रकम आवंटित करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही।

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-अनिल तिवारी


