मुंबई के शिवाजी पार्क में चुनाव आयोग के खिलाफ जुटे हजारों प्रदर्शनकारियों के बीच CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ऐसा तंज कसा, जिसने राजनीतिक बहस को चुनाव आयोग से आगे सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचा दिया।
मोदी के सार्वजनिक जीवन में बार-बार सामने आने वाले ‘चाय बेचने’ के प्रसंग पर सवाल उठाते हुए दिपके ने पूछा- आखिर प्रधानमंत्री हर बार अपने चाय बेचने के अतीत को राजनीतिक कथा के रूप में क्यों दोहराते हैं?
दिपके ने कहा, “यह व्यक्ति हमारे पैसों से दुनिया भर में घूम रहा है। एक बात है कि वह बार-बार कहते हैं- ‘मैंने चाय बेची, मैंने चाय बेची, मैंने चाय बेची।’ आपने चाय क्यों बेची? क्या हमने आपसे चाय बेचने को कहा था? हमने तो कहा था कि आप स्कूल जा सकते थे, पढ़ाई कर सकते थे और नौकरी कर सकते थे।”
दिपके का यह हमला 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित CJP के प्रदर्शन के दौरान हुआ। प्रदर्शन की मूल मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की थी। CJP चुनावी मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।
शिवाजी पार्क के मंच से दिपके ने केवल मोदी के ‘चाय बेचने’ वाले नैरेटिव पर ही निशाना नहीं साधा। उन्होंने चुनावी राजनीति और मतदाता सूचियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दिपके ने दावा किया कि कथित वोटर डिलीशन के बाद BJP ने ऐसे राज्यों में जीत हासिल की, जहां वह कथित तौर पर ‘मोदी लहर’ के चरम पर भी नहीं जीत सकी थी। यह दिपके का राजनीतिक दावा है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
CJP ने अब आंदोलन को मुंबई से दिल्ली ले जाने का ऐलान किया है। दिपके ने कहा है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘Jantar Mantar 2.0’ किया जाएगा।
दिपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि देशभर से CJP कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचेंगे और इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस जहां प्रदर्शनकारियों को रोकेगी, वहीं ‘जंतर-मंतर’ बना दिया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि आंदोलन की मांग अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आई है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक दिपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की दिशा में भी बयान दिया।
यानी शिवाजी पार्क का मंच अब तीन अलग-अलग राजनीतिक सवालों को एक साथ जोड़ रहा है—मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की राजनीतिक जवाबदेही।
दिपके का ‘क्या हमने आपसे चाय बेचने को कहा था?’ वाला तंज इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मोदी की साधारण पृष्ठभूमि और चाय बेचने का प्रसंग लंबे समय से उनकी सार्वजनिक राजनीतिक पहचान का हिस्सा रहा है। दिपके इसी पहचान को उलटकर सवाल बना रहे हैं- क्या व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी शासन और राजनीतिक जवाबदेही के सवालों का विकल्प हो सकती है?


