Connect with us

Hi, what are you looking for?

सुख-दुख

मीडिया कारोबार में बड़ा बदलाव: प्रिंट पर दबाव, डिजिटल का उभार, TV चैनलों के लाइसेंस सरेंडर

Indian Media Industry

Indian Newspaper Society: मीडिया इंडस्ट्री की तस्वीर तेजी से बदल रही है। एक तरफ डिजिटल मीडिया लगातार मजबूत हो रहा है, वहीं पारंपरिक मीडिया के सामने विज्ञापन और रेवेन्यू का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। Indian Newspaper Society (INS) की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट और FICCI-EY की रिपोर्ट के आंकड़े मीडिया कारोबार में हो रहे इस बदलाव की तस्वीर सामने रखते हैं।

INS की 2025-26 वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, उसके सदस्य प्रकाशनों का कुल विज्ञापन कारोबार 2024 के ₹15,316 करोड़ से घटकर 2025 में ₹14,773.74 करोड़ रह गया। यानी विज्ञापन कारोबार में करीब 3.54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

अखबारों के बीच भी तस्वीर एक जैसी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार अंग्रेजी दैनिकों के एजेंसी विज्ञापन में 3.83 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि भारतीय भाषाओं के दैनिकों को एजेंसी विज्ञापन के मोर्चे पर 3.68 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा।

अंग्रेजी अखबारों के लिए विज्ञापन बाजार में कुछ मजबूती दिखाई दे रही है, लेकिन भारतीय भाषाओं के प्रिंट मीडिया पर दबाव बना हुआ है। खासतौर पर ऐसे समय में जब डिजिटल प्लेटफॉर्म विज्ञापन का बड़ा हिस्सा अपनी तरफ खींच रहे हैं।

इसी दबाव के बीच Indian Newspaper Society ने न्यूजप्रिंट पर लगने वाली 5 फीसदी कस्टम ड्यूटी हटाने की मांग उठाई है। INS का तर्क है कि न्यूजप्रिंट की लागत में राहत मिलने से अखबारों पर बढ़ता वित्तीय दबाव कुछ कम हो सकता है।

दूसरी तरफ FICCI-EY की रिपोर्ट मीडिया-एंटरटेनमेंट सेक्टर की एक अलग तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत का मीडिया-एंटरटेनमेंट उद्योग 9.1 फीसदी बढ़कर करीब ₹2.78 लाख करोड़ का हो गया।

इस ग्रोथ का सबसे बड़ा संकेत डिजिटल सेक्टर से मिलता है। डिजिटल मीडिया का कारोबार ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। यानी दर्शकों और विज्ञापनदाताओं दोनों का झुकाव तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ रहा है।

इसके उलट Linear TV यानी पारंपरिक टीवी के रेवेन्यू में 2025 में 9.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। टीवी इंडस्ट्री के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है, क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक टीवी को लगातार अपने बिजनेस मॉडल के दबाव से जूझना पड़ रहा है।

हालांकि, प्रिंट मीडिया के लिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। FICCI-EY के मुताबिक 2025 में प्रिंट मीडिया का रेवेन्यू करीब 1 फीसदी बढ़कर ₹25,900 करोड़ रहा, लेकिन INS के विज्ञापन कारोबार के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि प्रिंट के भीतर भी विज्ञापन बाजार का दबाव अलग-अलग कैटेगरी में अलग तरह से दिखाई दे रहा है।

टीवी सेक्टर में बदलाव का एक और बड़ा संकेत चैनलों के लाइसेंस सरेंडर करने के आंकड़े से मिलता है। 2022 से 2026 के बीच 114 टीवी चैनलों ने अपने लाइसेंस सरेंडर किए। इन आंकड़ों को एक साथ देखें तो मीडिया इंडस्ट्री में बदलाव की दिशा साफ दिखाई देती है। डिजिटल का विस्तार जारी है, पारंपरिक टीवी के रेवेन्यू पर दबाव है और प्रिंट मीडिया को विज्ञापन बाजार में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

मीडिया संस्थानों के सामने अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दर्शक और पाठक कहां जा रहे हैं. बड़ा सवाल यह भी है कि विज्ञापन का पैसा किस प्लेटफॉर्म पर जा रहा है और पारंपरिक मीडिया संस्थान बदलते बाजार में अपने कारोबार को कैसे टिकाए रखेंगे।

INS की न्यूजप्रिंट ड्यूटी हटाने की मांग इसी व्यापक आर्थिक दबाव का एक हिस्सा है। आने वाले वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा सिर्फ अखबार, टीवी और डिजिटल के बीच नहीं होगी, बल्कि विज्ञापन, दर्शकों का समय और डिजिटल वितरण मॉडल इस प्रतिस्पर्धा को और ज्यादा प्रभावित करेंगे।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन