विजय चावला-
दो महिला पत्रकारों ने अमित शाह-नियंत्रित सुरक्षा बलों के दो कर्मियों द्वारा खुलेआम यौन गुस्ताखी करने का संगीन आरोप लगाया है!
वैसे कुछ बीजेपी नेताओं द्वारा महिलाओं से दुराचार करने की खबरें भी वायरल होती रहती हैं।
इन महिला पत्रकारों ने जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनसे यौन गुस्ताखी करने के ये संगीन आरोप लगाए:
पहली महिला पत्रकार रोज़ी का आरोप: “ACP विवेक भगत ने मेरी breast (छाती) को squeeze (दबाया) किया और मुझे push किया”
दूसरी पत्रकार आफ़रीन खान का एक CRPF जवान पर आरोप: “भीड़ नहीं थी मैं साइड पे खड़ी थी। और ये hip (नितंब) से पूरा टच करने का क्या मतलब बनता है?… और ये वर्दी में हैं। ये तो हमारे रक्षक हैं। ये ऐसी रक्षा करेंगे?
दोनों पत्रकारों की वायरल रील के लिंक पोस्ट के अंत में लगाए हैं।
इन महिला पत्रकारों के उल्लेखित संगीन आरोपों के मद्देनजर यह सवाल उठता है: जो जमात राहुल द्वारा अपने लोकतान्त्रिक अधिकार के अंतर्गत विदेश में मोदी सरकार की स्वस्थ आलोचना से तिलमिला जाती है, क्या उसे यह एहसास है कि दुनिया में इन महिला पत्रकारों के संगीन यौन गुस्ताखी आरोपों वाले वीडियो भी वायरल होते हैं।
दूसरा सवाल: इन वायरल वीडियो के आधार पर दुनिया, भारत के वर्तमान हिंदुत्ववादी निजाम, जो हिन्दू धर्म/संस्कृति का तथाकथित रखवाला होने का दम भरता है, को किस नजर से देखती है?
पहली फोटो रोज़ी की है। वह एक वायरल रील में अपना कड़वा जंतर मंतर अनुभव इन शब्दों में बयां करती हैं:
“मैं रोज़ी इस समय पार्लियामेंट स्ट्रीट के पुलिस स्टेशन में बैठी हूँ और मुझे यहाँ पे बैठे हुए साढ़े तीन घंटे हो चुके हैं। आज जब नेहा बोरा को डिटैन किया जा रहा था, उस समय मैं उनकी वीडियो बना रही थी… (तब) ACP विवेक भगत ने मेरी breast (छाती) को squeeze (दबाया) किया और मुझे push किया। जब मैंने उनसे (इस हरकत पर) सवाल पूछा तो वो वहाँ से भाग गए… मेरी FIR नहीं लिखी जा रही है। मुझे सिर्फ टाइम दिया जा रहा है। कोई भी एक्शन नहीं लिया जा रहा है… “
ताजा खबर के अनुसार ACP विवेक भगत पर लगे आरोपों की जांच बिना FIR दर्ज किए क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है.
रोज़ी की रील की शुरुआत में नेहा बोरा (दूसरी फोटो) पुलिस कर्मियों की ज़ोर-जबरदस्ती के कारण उन्हें आई चोटों के निशान दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को यह चुनौती देती हैं:
“बड़ी तकलीफ होती है दिल्ली पुलिस आपको जब महिला प्रोटेस्टर्स प्रोटेस्ट करती हैं, महिला पत्रकार उस प्रोटेस्ट को कवर करती हैं। क्या सोचा था आपने, महिलाओं को पीट करके, uniformed officers (वर्दीधारी अफसर) women journalists को grope (अनुचित स्पर्श) करके ज्ञानेश कुमार को बचा लीजिएगा, कल मार्च करेंगे हम इंडिया गेट से जंतर मंतर। तीन बजे इंडिया गेट पर इकट्ठा होंगे ये कहने के लिए कि ना आप हम से हमारी आज़ादी छीन सकते हैं, न प्रोटेस्ट करने का अधिकार छीन सकते हैं और ना ज्ञानेश कुमार को बचा सकते हैं।”
तीसरी फोटो आफ़रीन खान की है। वह तेज Tarrar चैनल से जुड़ी हैं। वह एक वायरल रील में उस CRPF जवान (चौथी फोटो) पर बुरी तरह बिफर रहीं हैं, जिस पर वह यौन गुस्ताखी करने का आरोप लगाती हैं। तमतमाई आफ़रीन के बयां के कुछ अंश निम्नलिखित हैं:
“ये क्या किया है आपने? ये क्या करके गए हो आप? कैसे टच किया है आपने, तमीज़ नहीं है आपको? यहाँ (नितंब) पे टच करके जाओगे?… किस बात के (किन मूल्यों के साथ) फोर्स में हैं?…
“भीड़ नहीं थी मैं साइड पे खड़ी थी। और ये hip (नितंब) से पूरा टच करने का क्या मतलब बनता है?… और ये वर्दी में हैं। ये तो हमारे रक्षक हैं। ये ऐसी रक्षा करेंगे?… मैं साइड पर खड़े हो कर अपना काम कर रहीं हूँ। ऐसे टच करके (अपने नितंब पर हाथ फेर कर दिखाती हैं) करके जा रहा है, मुस्कुरा के मुझे देख रहें हैं…
“… (मेरे) कपड़े भी देख लीजिए। दुपट्टे से लेकर सब कुछ तो पहना हुआ है… कुर्ती पहनी हुई है, जींस पहनी हुई है, एक अंग नहीं दिख रहा होगा… अब इससे ज़्यादा क्या पहनें… जो लोग कह देते हैं लड़कियों के कपड़े खराब होते हैं, इसलिए उनके साथ गलत होता है… आप खुद बताइए इससे ज़्यादा क्या पहनूँ…”
रोज़ी की रील का लिंक https://www.facebook.com/reel/28285405817825190
आफ़रीन की रील का लिंक https://www.facebook.com/reel/1760252335270005


