नई दिल्ली, 6 अक्टूबर – दिल्ली पुलिस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पत्रकारिता जगत में नई बहस छेड़ दी है। पुलिस ने प्रोटेस्ट कवर करने वाले पत्रकारों के लिए गाइडलाइन जारी करते हुए लिखा – “The story matters, So does how you get it! Guidelines for journalists.”
यह एडवाइजरी 5 अक्टूबर को जारी की गई है, जिसमें पुलिस ने कहा है कि पत्रकारों को प्रदर्शन के दौरान वैध पहचान पत्र रखना चाहिए और उसे हमेशा दिखाकर रखना चाहिए ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियां उनकी पहचान कर सकें।
दिल्ली पुलिस की 4 गाइडलाइन क्या हैं?
पुलिस द्वारा जारी AI इमेज वाले पोस्टर में 4 बिंदु बताए गए हैं:
1. वैध ID कार्ड साथ रखें: सभी पत्रकारों को अपनी संस्था द्वारा जारी वैध प्रेस कार्ड और/या PIB/DIP का एक्रेडिटेशन कार्ड रखना होगा।
2. कार्ड हमेशा दिखाकर रखें: साइट पर मौजूद पुलिस को पहचान में आसानी हो, इसके लिए ID कार्ड हर समय visibly displayed होना चाहिए।
3. पुलिस ऑपरेशन में बाधा नहीं: पत्रकारों की मौजूदगी या गतिविधि से पुलिस ऑपरेशन या जवानों की मूवमेंट में बाधा नहीं आनी चाहिए।
4. सुरक्षित दूरी बनाए रखें: तनावपूर्ण स्थिति में पत्रकारों को उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और खुद को प्रदर्शनकारियों से अलग दिखाना चाहिए।
पुलिस का कहना है कि इसका मकसद पत्रकारों की पहचान आसान बनाना और उन्हें पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप से बचाना है।
गाइडलाइन आई क्यों? जंतर-मंतर विवाद से कनेक्शन
यह गाइडलाइन ऐसे समय में आई है जब दिल्ली पुलिस पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन की कवरेज के दौरान 3 महिला पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।
यह प्रदर्शन 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायतें क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच के लिए भेज दी थीं।
इसी विवाद के बीच एक ACP विवेक भगत का नाम भी सामने आया, जिन पर एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था। बाद में उन्होंने खुद अतिरिक्त चार्ज न लेने का अनुरोध किया।
पत्रकारों का सवाल – फ्रीलांसर का क्या होगा?
गाइडलाइन जारी होते ही वरिष्ठ पत्रकारों ने सवाल उठा दिए हैं। पत्रकार उमेश के. रे ने पोस्ट लिखते हुए कहा –
“दिल्ली पुलिस को कोई बताए कि फ्रीलांसर्स के पास कोई आइकार्ड नहीं होता, तो क्या वो प्रोटेस्ट कवर ही नहीं सकते? बाकी सवाल तो यह भी है कि दिल्ली पुलिस होती कौन है, जर्नलिस्ट्स के लिए गाइडलाइन इश्यू करने वाली।”
सोशल मीडिया पर यही दो बड़े सवाल घूम रहे हैं:
1. फ्रीलांस पत्रकारों का क्या? भारत में बड़ी संख्या में स्वतंत्र और डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास किसी बड़ी संस्था का ID या PIB कार्ड नहीं होता। क्या उन्हें प्रोटेस्ट कवर करने का अधिकार नहीं होगा?
2. गाइडलाइन जारी करने का अधिकार किसे? पत्रकारिता की एथिक्स के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और संपादकीय संस्थाएं हैं। क्या पुलिस #EthicsofJournalism के नाम पर पत्रकारिता सिखा सकती है?
पत्रकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर पहचान पत्र चेक करना समझा जा सकता है, लेकिन “कैसे कवर करें, कितनी दूरी रखें” जैसी बातें पुलिस नहीं, बल्कि न्यूजरूम और प्रेस बॉडी तय करती हैं।
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने इन सवालों पर कोई सफाई नहीं दी है, लेकिन उसकी यह पोस्ट वायरल होने के बाद बहस तेज हो गई है कि – खबर जरूरी है, पर खबर लाने का तरीका पुलिस तय करेगी या पत्रकारिता के सिद्धांत?

