अमर उजाला में लीड ख़बर छपी है। अशोक मिश्र की बाइलाइन है। अवैध खनन करने वाली उमाशंकर सिंह की कंपनियों को देना होगा 400 करोड़ का आयकर। सोचिए, जब आयकर की गणना 400 करोड़ है तो कितने हज़ार करोड़ का अवैध खनन हुआ होगा? सीएजी की रिपोर्ट तक में इस भीषण अवैध खनन की पुष्टि हो चुकी है।इस दौर में चहेते ठेकेदारों को नियम कायदों को ताक पर रखकर पीडब्ल्यूडी से लेकर खनन तक के कितने हज़ार करोड़ के कितने ठेके दिए गए और उन ठेकों से कमीशन और भ्रष्टाचार की कितनी गंगा बही और कहां कहां तक बही, यही इस दौर की सबसे बड़ी स्टोरी है।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह की कंपनियों से आयकर विभाग 400 करोड़ रुपये से अधिक टैक्स वसूलने की तैयारी में है। छापों में मिले सबूतों और टैक्स चोरी के विश्लेषण के बाद विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। अंतिम निर्धारण के लिए इसे नई दिल्ली स्थित आयकर मुख्यालय भेजा जा रहा है। यह खुलासा अमर उजाला के अशोक मिश्रा की रिपोर्ट में हुआ है।
बलिया की रसड़ा सीट से तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का 6 अगस्त 2026 को निधन हो गया था। इससे पहले फरवरी में आयकर की इंवेस्टिगेशन विंग ने लखनऊ, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और कौशांबी के 30 से अधिक ठिकानों पर छापा मारा था। अवैध खनन और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों के साथ करीब 10 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। कार्रवाई उनकी छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी और साईं राम इंटरप्राइजेज से जुड़ी थी। ये कंपनियां सड़क निर्माण और खनन के काम से जुड़ी बताई जाती हैं।
विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ और आयकर विभाग को भी कर नहीं मिला। मिर्जापुर और सोनभद्र में ड्रोन व सैटेलाइट इमेजिंग से भी अवैध खनन के सबूत जुटाए गए। खनन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई अधिकारियों की भूमिका का भी जिक्र है। जांच के दौरान कंपनी संचालकों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, छापों के दौरान जिन अधिकारियों ने जवाब-तलब किया था, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।
सीएजी की रिपोर्ट में सोनभद्र के अवैध खनन से करीब 60 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का उल्लेख था। उसी सूत्र पर आयकर विभाग ने जांच शुरू की थी। फरवरी की छापेमारी के समय प्रारंभिक आकलन करीब 100 करोड़ की टैक्स चोरी का था। आठ महीने बाद विश्लेषण पूरा होने पर यह आंकड़ा 400 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है।
यहीं असली सवाल है। जब अकेले आयकर की गणना 400 करोड़ से अधिक बन रही है, तो खनन की कुल मात्रा और उससे जुड़ा कारोबार इससे कई गुना बड़ा होना चाहिए। टैक्स, अवैध निकासी पर बनी आय का एक हिस्सा भर है। खनिज रॉयल्टी, जीएसटी और पेनल्टी अलग मदें हैं। सोनभद्र में सीएजी का 60 करोड़ का राजस्व-नुकसान का आंकड़ा उसी श्रृंखला की एक कड़ी है, पूरी तस्वीर नहीं।
इस दौर की बड़ी कहानी यहीं से निकलती है। पीडब्ल्यूडी के ठेकों से लेकर खनन पट्टों तक, नियमों को दरकिनार कर चहेते ठेकेदारों को कितने हजार करोड़ के काम दिए गए, उन ठेकों से कमीशन की गंगा कहां-कहां बही, और खनन विभाग के कौन से अफसर इसमें शामिल रहे। 400 करोड़ का आयकर प्रस्ताव उसी सिलसिले का पहला सार्वजनिक हिसाब है। अंतिम निर्धारण दिल्ली मुख्यालय करेगा। वसूली उसके बाद ही शुरू हो सकती है।

