
अमेरिका ने भारतीय आईटी सेक्टर की छह बड़ी कंपनियों, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी और एचसीएल को स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित करने का ऐलान किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह खबर ब्रेक की।
इसी बीच भारत में एक दूसरा मोर्चा खुल गया है। स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर एलन मस्क की टिप्पणी पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तंज कसा, और मस्क ने जवाब देकर इस बहस को और हवा दे दी। मस्क का यह ट्वीट कुछ ही घंटों में मिलियंस से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
PERM अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की पहली और अनिवार्य सीढ़ी है। इसके तहत कंपनी को अमेरिकी श्रम विभाग से प्रमाणित कराना होता है कि उस पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला। निलंबन का मतलब है कि ये कंपनियां फिलहाल अपने विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाएंगी।
सबसे ज्यादा असर H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा। इनमें से बड़ी संख्या इन्हीं कंपनियों में काम करती है और स्थायी निवास की उम्मीद में सालों से कतार में है।
रिपोर्टों के मुताबिक यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के H-1B ‘दुरुपयोग’ विरोधी अभियान का हिस्सा है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस मुद्दे पर बड़ी टेक कंपनियों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते विदेशी कर्मचारी रख रही हैं।
मस्क ने भारत में स्टारलिंक के कमर्शियल लाइसेंस में देरी पर सवाल उठाते हुए रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी की ओर इशारा किया। उन्होंने X पर पूछा कि क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं।
मस्क के इस पोस्ट को कोट करते हुए राहुल गांधी ने लिखा, “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” यानी “भारत में स्वागत है, एलन। जरा दूसरे वाले को जान लीजिए।” इसे अडानी समूह की ओर इशारा माना जा रहा है।
मस्क ने एक घंटे के भीतर जवाब दिया, “Thank you, Rahul. This is indeed troubling.” यानी “शुक्रिया राहुल, यह वाकई परेशान करने वाला है।”
इस जवाब के साथ एक कारोबारी शिकायत सीधे ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ की उस राजनीतिक बहस में जा मिली, जिसे कांग्रेस लंबे समय से उठाती रही है। खबरों के मुताबिक दूरसंचार विभाग ने भेदभाव के आरोप को निराधार बताया है और कहा है कि स्टारलिंक, जियो और वनवेब सभी एक जैसी नियामक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
दोनों घटनाओं को एक साथ देखने पर लगता है कि भारतीय कारोबार पर अमेरिका की ओर से दोतरफा दबाव है। पर ये दो अलग-अलग लड़ाइयां हैं, जो संयोग से एक ही समय पर सामने आई हैं।
पहली लड़ाई अमेरिका के भीतर की है। PERM पर रोक ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ रोजगार नीति से निकली है, मस्क के एजेंडे से नहीं। निशाने पर आउटसोर्सिंग मॉडल है, और चोट सबसे ज्यादा भारतीय आईटी सेवा उद्योग को लगती है।
दूसरी लड़ाई भारतीय बाजार की है। सैटेलाइट इंटरनेट में स्टारलिंक का सीधा मुकाबला जियो से है। मस्क ‘मुक्त बाजार’ और जनमत के दबाव के जरिए लाइसेंस की राह खोलना चाहते हैं, जबकि सरकार प्रक्रिया को निष्पक्ष बता रही है। विपक्ष को इसमें सरकार पर हमले का नया मौका मिल गया है।
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