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उत्तराखंड

अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा के सत्ताधारी तंत्र की मिलीभगत पर BJP की इन फायरब्रांड महिला नेताईनों की चुप्पी भी सवालों में?

Side-by-side portrait: a smiling older man in an orange kurta on the left and a young woman in a pink top on the right.

सुची विश्वास-

अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा के सत्ताधारी तंत्र की मिलीभगत और निर्लज्जता अब किसी से छिपी नहीं। 19 साल की बेटी को रिसॉर्ट में वीआईपी के लिए देह व्यापार के दबाव में डालकर कत्ल कर दिया गया, फिर आरोपी के रिसॉर्ट पर रातों-रात बुलडोजर चलाकर सबूत जला दिए गए और मिटा दिए गए, ताकि सच्चाई हमेशा के लिए दफन हो जाए।

परिवार चीखता रहा, लेकिन धामी ने आंखें बंद कर लीं और सबूतों को नष्ट करने की इस साजिश को अवैध निर्माण का जामा पहना दिया और अब चरम शर्मनाक हरकत उसी दुष्यंत गौतम को, जिनका नाम अंकिता के परिवार और वायरल ऑडियो में बार-बार वीआईपी के रूप में लिया गया, जिन पर आरोप लगे कि वे उस काले कारोबार से जुड़े थे, उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाकर इनाम दे दिया गया है। यह सिर्फ नियुक्ति नहीं, बल्कि अंकिता जैसी बेटी की हत्या पर मोदी और पुष्कर सिंह धामी का खुला संदेश है जहां हत्यारों और आरोपियों को संरक्षण और पद देकर न्याय की हत्या की जाती है

जनवरी 2026 में सीबीआई ने वीआईपी पर औपचारिक जांच शुरू की उसी महीने गौतम ने गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी छह महीने बाद राठौड़ साजिश के आरोप में गिरफ्तार चार महीने बाद दुष्यंत गौतम सिक्किम के राज्यपाल नियुक्त कर दिए गये एक ऐसे व्यक्ति को, जो एक चल रही आपराधिक जांच में नामजद है, संवैधानिक पद पर बैठाना यह कहाँ का न्याय और कहाँ का लोकतंत्र है।

स्मृति ईरानी, रेखा गुप्ता, बांसुरी स्वराज, मैथिली ठाकुर, कंगना रनौत, मीनाक्षी लेखी, शोभा करंदलाजे, कमलजीत सहरावत, ऋतु खंडूरी भूषण, रेखा आर्य, सरिता आर्य, हनी पाठक, दीया कुमारी और बीजेपी की तमाम जैसे रूपा गांगुली अपराजिता सारंगी, लॉकेट चटर्जी, नवनीत राणा, अग्निमित्रा पॉल, धर्मशीला गुप्ता, रूपकुमारी चौधरी, शाजिया इल्मी, रेखा वर्मा प्रीति गांधी स्वाति सिंह खुशबू सुंदर, माधवी लता और इरानी घोष दूसरी महिला नेताओं से सवाल है कि अंकिता भंडारी के मामले में आपकी आवाज़ कहाँ है कहाँ थी?

Woman candidate on stage with hands pressed together in greeting, wearing an orange scarf over colorful attire, against a red campaign backdrop with bold political text in the foreground.
Close-up of a woman's face with a blue caption box containing a political quote about 'Smash the Patriarchy' and Rahul Gandhi.
Two Indian women in colorful sarees smiling and posing together at a festive event.
News headline accusing Congress of celebrating defeat of the Women’s Reservation Bill; woman in red glasses speaking at a press conference at a microphone.

राहुल गांधी पर बयान देना हो, कांग्रेस को घेरना हो, विपक्ष पर आरोप लगाना हो या अपनी पार्टी के नेताओं के बचाव में उतरना हो, तब आपकी आवाज़ बुलंद रहती है; लेकिन जब बेटी को न्याय दिलाने का सवाल आता है, तब वही आवाज़ क्यों सुनाई नहीं देती?

महिला सुरक्षा पर आपके भाषण, नारी सम्मान के आपके दावे और बेटी बचाओ के आपके नारे आखिर किसके लिए हैं? क्या मुद्दा आपके आका के आदेशानुसार राजनीतिक सुविधा के हिसाब से तय होता है? सत्ता से सवाल पूछना और पीड़ित के लिए न्याय माँगना भाजपा कार्यालय और संघ की शाखा में नहीं सिखाते क्या….राजनीति को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना, नेताओं की चाटुकारिता करना और विपक्ष पर निशाना साधने के लिए चुनिंदा मुद्दों पर शोर मचाना यही बीजेपी की राजनीतिक संस्कृति है अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की माँग महिला होने के नाते नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्ति होने के नाते आवाज उठाईये बेटियों के न्याय पर खामोशी और विपक्ष के खिलाफ बयानबाज़ी इस दोहरे रवैये का जवाब देश की जनता माँगेगी

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