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कुछ कह रहे हैं कि पत्रकार होकर मुझे अमित शाह मुर्दाबाद के नारे नहीं लगाने चाहिए थे- श्याम मीरा सिंह

श्याम मीरा सिंह-

कुछ कह रहे हैं कि पत्रकार होकर मुझे अमित शाह मुर्दाबाद के नारे नहीं लगाने चाहिए थे। मैंने उस आदमी का नाम लिया जो असल में इस गुंडागर्दी का असली जिम्मेदार है। मैंने मुश्किल समय में गुंडों की भीड़ में भी सच ही बोला।

इससे बड़ा पत्रकारीय धर्म शायद मैं अपने जीवन में कभी ना निभा पाऊं। देश में हालत ये है कि किसी को भी प्रदर्शन करने नहीं दिया जा रहा। बच्चियों को सड़कों पर पीटा जा रहा है। पुलिस उन्हें अरेस्ट तक नहीं कर रही। अदालतें उन्हें एक दिन में छोड़ दे रही हैं।

गुंडों के कहने पर पुलिस आम प्रोटेस्टर्स और पत्रकारों को अरेस्ट कर ले रही है। तीन दिन में 36 से ज़्यादा पत्रकारों को डिटेन किया गया। हजारों प्रोटेस्टर्स को इलीगल तरीके से डिटेन किया गया। कल करीब 10 पत्रकारों को भाजपाई भीड़ ने घेरा, उन्हें अपना पत्रकारीय काम नहीं करने दिया। और पुलिस इन गुंडों का पूर्ण संरक्षण कर रही। सड़कों पर हो रही इस खुली गुंडागर्दी के लिए अमित शाह जिम्मेदार है तो किसको कहा जाए? आपमें दम नहीं है तो चुप घर बैठिए, आपको डर है कि ये गुंडे अगले ही दिन आपको घेर लेंगे।

वैसे भी घेर ही रहे हैं। जो गृह मंत्री इस देश में चल रही जहालत के लिए ज़िम्मेदार है उसका नाम लेने से आप डरिए। मैं अमित शाह को भारत के लोकतंत्र का हत्यारा मानता हूँ इसलिए खुले में नाम लेता हूँ।

मैं पत्रकार होने की शुचिता की एक्टिंग नहीं करता। भीड़ अगर मुझे नोचेगी तो मैं अपने पुरखे- भगत सिंह का नाम लूंगा। इंक़लाब ज़िंदाबाद कहूँगा। और उस गुंडे का नाम लूंगा जो इस व्यवस्था का असली ज़िम्मेदार है।

मैं जब तक रिपोर्टिंग कर रहा था मैंने किसी पार्टी के नेता का नाम नहीं लिया। जब मुझे और मेरे जैसे अन्य पत्रकारों को उनका काम ही नहीं करने दिया जाएगा तो उस वक़्त मैं बराबर दर्जे का प्रोटेस्टर भी हूँ, और पत्रकार भी। उस समय मैं भारत का नागरिक हूँ।

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