लक्ष्मी प्रताप सिंह-
जंतर मंतर पर हजारों की संख्या में क्रिएटर जा रहे हैं। हजारों की संख्या में मोबाइल वाले, यूट्यूब और इंस्टग्राम के पत्रकार खड़े हो गए हैं। जंतर मंतर कंटेंट का घर बन गया है। ये सच है।
लेकिन इसका जिम्मेदार कौन है?
सन 2014 का चुनाव कवर करने के लिए आजतक के पास करीब 120 ग्राउंड रिपोर्टर थे। जो अलग शहरों में काम करते थे। कुछ सीधे पेरोल पर थे और कुछ फ्रीलांसिंग करते थे जो कई चैनलों को फुटेज बेचते थे। ये लोग सरकार की पॉलिसी, उस शहर की घटनाएं, सरकारी योजनाओं में कमी निकाल के रिपोर्ट करते थे। उनका भी घर चल जाता था।
फिर सरकार बदली और मीडिया को सरकार की तरफ से मोटा फंड मिलने लगा। ऊपर से दबाव आने लगा कि सरकार के खिलाफ मत बोलो। हर चैनल पर शाम के वक्त का टाइम सबसे महंगा और सबसे ज्यादा TRP वाला शो होता था इसी लिए उस वक्त को उसे प्राइम टाइम कहते हैं। ऐसे शो में सरकार की बुराई करने वाले पत्रकारों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। सरकार की किसी भी योजना, काम या नेता की बुराई बंद हो गई।
कभी किसी शहर की खबर का वीडियो चाहिए होता तो एशियन न्यूज एजेंसी ANI से फुटेज खरीद के चला दो और पर वीडियो पैसा दो, खर्चा भी कम। इसी लिए सारे चैनल लगभग एक सा वीडियो दिखाते हैं।
स्टूडियो वाले एंकर ही चैनल का फेस बन गए। दिन भर उनका काम सरकार का पक्ष रखना था, उसके लिए ग्राउंड रिपोर्टर की जरूरत ही नहीं। उदाहरण के लिए दिल्ली में जमुना के पानी की रिपोर्टिंग करनी हो तो CM रेखा गुप्ता जाएंगी और साथ में सुधीर चौधरी जाएगा जो एजेंडा वाला एपिसोड बना देगा। अब ग्राउंड रिपोर्टर की क्या जरूरत?
जब कुछ रिपोर्ट ही नहीं करना तो पत्रकारों की फौज रख के चैनल खर्चा क्यों बढ़ाए। वो भी तो एक बिजनेस है। सबने पत्रकारों को नौकरी से निकालना शुरू कर दिया। 2024 के चुनाव में आजतक के करीब 120+ का आंकड़ा घट के करीब 10 रह गया। यही हाल बाकी चैनलों का हुआ। जबकि वक्त के साथ ये आंकड़ा बढ़ना था।
अब जो हर साल जर्नलिज्म की पढ़ाई करके लाखों बच्चे निकल रहे ये कहां जाएंगे?
यहां अंबानी का जिओ इंटरनेट काम आया। ये बच्चे सस्ता सा माइक खरीद के मोबाइल उठाते हैं और निकल लेते हैं। Youtube अच्छा पैसा देता है। अगर कहीं कुछ कांड हो गया, पुलिस ने पीट दिया, किसी से भिड़ गए तो तुरंत क्रांतिकारी घोषित और फेमस भी हो जाएंगे और व्यू भी फटाफट मिलियन में जाने लगेंगे। चैनल एस्टेब्लिश हो जाएगा।
आपने बेरोजगारी बढ़ाई है। कंटेंट क्रिएशन को मोदी जी ने सरकार की उपलब्धि बताया है तो उपलब्धि को एंजॉय करिए अब। आप ही की पैदा की हुई वानर सेना है ये और आपकी ही लंका लगा रही है।

