गिरीश मालवीय-
क्या शेयर मार्केट क्रैश नजदीक है?…
अक्टूबर 2026 के शुरुआती दिनों में वोट चोरी को लेकर जंतर मंतर का आंदोलन चर्चा में बना हुआ है उसी वक्त भारत के शेयर बाजार की मजबूत समझी जाने वाली दीवारें तेजी से दरक रही है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अक्टूबर में महज छह कारोबारी सत्रों में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के भारतीय शेयर की बिकवाली की है। अक्टूबर के सिर्फ छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने लगभग उतने शेयर बेच दिए, जितने उन्होंने पूरे सितंबर में बेचे थे। यह बिकवाली की गति तेज होने का स्पष्ट संकेत है।
यह लगातार आठवां हफ्ता है, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में नेट सेलर्स यानी बिकवाल बने हुए हैं. NSDL साल 2002 से इन आंकड़ों को कलेक्ट कर रहा है. इन 24 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल लिए हैं. यह बड़ी बात है क्योंकि अभी साल पूरा होने में ढाई महीने बाकी है
साल 2020 के बाद ये तीसरा ऐसा साल है जब विदेशी निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा शेयर बाजार से निकाले हैं. शेयर मार्केट से विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने 2026 में नया रिकॉर्ड बना दिया है. पहले 9 महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने भारतीय शेयरों से 3.6 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. यह पहली बार है जब किसी साल में सेकेंडरी मार्केट से FPI आउटफ्लो 3 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है. इससे पहले 2025 में FPI ने 2.4 लाख करोड़ रुपये और 2024 में 1.21 लाख करोड़ रुपये निकाले थे.
इस निरंतर बिकवाली ने घरेलू शेयरों पर दबाव बढ़ा दिया है, जिसके चलते निफ्टी 50 में साल-दर-साल लगभग 14% की गिरावट आई है। सेंसेक्स 32 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है
उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हमलों के चलते कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ गए है भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहले से दबाव में है और हाल ही में यह करीब 95.65 से 96.88 के रिकॉर्ड निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है और कंपनियों की कमाई कमजोर हो रही है ज्यादातर मझोले और छोटे स्तर की कंपनियों की ग्रोथ धीमी हो रही है इस बार सामान्य से करीब 13% कम मानसून की बारिश हुई है, जिसका सीधा असर कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों की मांग पर पड़ा है यानी भविष्य की कमाई को लेकर भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगर इस समय घरेलू खरीदारों का बैकअप नहीं होता, तो बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती थी. अक्टूबर के सात कारोबारी सत्रों में घरेलू संस्थागत निवेशकों की कुल शुद्ध खरीद ₹43,400 करोड़ रही है इससे स्थिति थोड़ी संभली दिख रही है, यानि क्रैश से बचाने के लिए घरेलू निवेशकों को और अधिक पैसा झोंकना होगा देखते है वो कब तक ऐसा कर पाएंगे?….
अभी जो कुछ भी दिख रहा है उसका साफ और सीधा मतलब यही है कि शेयर बाजार में बड़ी और तेज गिरावट का जोखिम काफी बढ़ गया है ….



